Hadith for the World
Tap the image to view it full size
फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह
Available in 17 languages
«आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) से वर्णित है कि उन्होंने कहा: क्या मैं तुम्हें अपनी और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की एक घटना न सुनाऊँ? हमने कहा: अवश्य सुनाएँ! वर्णनकर्ता का कहना है कि वह कहने लगीं: एक दिन मेरी बारी में अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मेरे पास थे। इसी बीच आपने करवट बदली, अपनी चादर तथा जूतों को उतारकर अपने पैरों के पास रख लिए और अपनी लुंगी के किनारे को बिस्तर पर बिछाकर लेट गए। बस इतनी देर गुज़रने के बाद कि आपको लगा कि मैं सो चुकी हूँ, आपने धीरे से अपनी चादर ली, धीरे से जूता पहना, द्वार खोलकर निकले और धीरे से बंद कर दिया। यह देख मैंने अपनी चादर को सर पर डाल लिया, तहबंद पहन लिया और आपके पीछे- पीछे चल पड़ी। आप बक़ी क़ब्रिस्तान आकर खड़े हो गए और देर तक खड़े रहे। फिर तीन बार अपने हाथों को उठाया (तथा दुआ की) और वापस चल दिए। मैं भी लौट पड़ी। आप तेज़ चलने लगे, तो मैं भी तेज़ चलने लगी। आप दौड़ने लगे, तो मैं भी दौड़ने लगी। इस तरह आप घर पहुँचे, तो मैं भी पहुँच गई। परन्तु, मैं आपसे पहले पहुँची और घर के अंदर प्रवेश कर गई। अभी मैं लेट ही पाई थी कि आप भी आ गए। आपने फ़रमाया: ऐ आइशा! बात क्या है, तुम्हारी साँस क्यों फूल रही है? वर्णनकर्ता का कहना है कि उन्होंने कहा: कुछ नहीं है। आपने फ़रमाया: तुम मुझे बताओगी या मुझे सूक्ष्मदर्शी तथा सबकी ख़बर रखने वाला अल्लाह बताएगा? वह कहती हैं कि मैंने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! आप पर मेरे माँ- बाप क़ुर्बान हों! फिर मैंने सब कुछ कह सुनाया। आपने फ़रमाया: तो तुम ही वह परछाँई हो, जिसे मैं अपने आगे देख रहा था? मैंने कहा: हाँ। इसपर आपने मेरे सीने पे ऐसा घूँसा जमाया कि मुझे दर्द का अनुभव हुआ। फिर फ़रमाया: क्या तुमको लगता है कि अल्लाह और उसका रसूल तुम्हारा हक़ मार लेंगे? उन्होंने कहा: लोग चाहे जितना छुपाएँ, अल्लाह तो जान ही लेता है। आपने कहाः सच कहती हो। दरअसल, जिबरील (अलैहिस्सलाम) मेरे पास आए थे, जब तुमने मुझे जाते देखा। उन्होंने मुझे तुमसे छिपाते हुए पुकारा और मैंने तुमसे छुपाते हुए उत्तर दिया। वैसे, वह तुम्हारे पास उस समय नहीं आते, जब तुम कपड़े उतार देती हो। मैंने समझा कि तुम सो चुकी हो, इसलिए मैंने तुम्हें जगाना मुनासिब न जाना। मुझे इस बात का भी भय था कि तुम्हें अकेले में डर महसूस होगा। फिर जिबरील ने कहा: आपका रब आपको आदेश देता है कि बक़ी वालों के पास जाएँ और उनके लिए क्षमा याचना करें। आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) का कहना है कि मैंने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! मैं उनके लिए किन शब्दों में दुआ करूँ? आपने फ़रमाया, कहो: السلام على أهل الديار من المؤمنين والمسلمين، ويرحم الله المستقدمين منا والمستأخرين، وإنا إن شاء الله بكم للاحقون अर्थात, इस स्थान में निवास करने वाले मोमिनों और मुसलमानों पर सलामती हो, अल्लाह हममें से पहले जाने वालों और बाद में आने वालों पर दया करे, अल्लाह ने चाहा तो हम भी तुमसे आ मिलने वाले हैं।»

Meaning translation ·

Explanation

The meaning in a few plain lines

تحكي أم المؤمنين عائشة رضي الله عنها قصة حدثت معها ومع رسول الله صلى الله عليه وسلم، بينما كان رسول الله صلى الله عليه وسلم عندها وفي ليلتها، أتى إلى فراشه، فوضعَ رداءه، وخلع نعلَيْه، فوضعهما عند رجليه، ثم اضطجع، فلما ظن أني قد نمت أخذ رداءه بلطف ورفق، حتى لا ينبهني، ولبس حذاءه برفق وفتح الباب فخرج، ثم أغلقه برفق، وإنما فعل ذلك صلى الله عليه وسلم في خفية لئلا يوقظها ويخرج عنها فربما لحقها خوف في انفرادها في ظلمة الليل، فلبست عائشة ثيابها واختمرت ثم انطلقت وراءه، حتى جاء البَقِيع وهو مقبرة بالمدينة فقام، فأطال القيام، ثم رفع يديه ثلاث مرات يدعو، ثم استدار ليرجع إلى منزله فاستدارت عائشة بسرعة، ثم أسرع في المشي فأسرعت، ثم جرى فجرت، فسبقته فدخلت، فاضطجعت فدخل، فقال: «ما لك؟ يا عائشُ، حَشْيا رابِية» معناه: قد وقع عليك الحشا وهو الربو والتهيج الذي يعرض للمسرع في مشيه والمحتد في كلامه من ارتفاع النفس وتواتره وقوله «رابية» أي: مرتفعة البطن. فقالت: ليس بي شيء. فقال: إما أن تخبريني أو يخبرني الله اللطيفُ الخبير. فأخبرته بالذي حدث، فقال: فأنتِ الشخص الذي رأيتُه أمامي؟ قالت: نعم، فدفعها بكفه في صدرها فأوجعها، ثم قال: «أظننتِ أنْ يَحِيفَ اللهُ عليك ورسولُه؟» أي: أتظنين أن يظلمك الله ورسوله بأن تكون ليلتك التي قسمتها لك ثم أذهب إلى غيرك من نسائي؟ قالت: «مَهْما يكتمِ الناسُ يعلمه الله، نعم» أي: أكُل ما يكتمه الناس يعلمه الله؟ وكأنها لما قالت هذا صدَّقت نفسها فقالت: نعم. ثم أخبرها أن جبريل أتاه، ولم يدخل عليه منزله؛ لأن عائشة كانت قد وضعت ثيابها وتجهزت للنوم، فظن النبي صلى الله عليه وسلم أنها قد نامت، وكره أن يوقظها حتى لا تخاف لانفرادها في ظلام الليل، فقال له جبريل: إنَّ ربَّك يأمركَ أن تأتيَ أهلَ البَقِيع فتستغفر لهم. فذهب النبي صلى الله عليه وسلم ممتثلا لهذا الأمر فأتى أهل مقبرة البقيع فاستغفر لهم ودعا لهم. فقالت عائشة: كيف أقول لهم يا رسول الله؟ قال: «قولي: السلامُ على أهل الدِّيار من المؤمنين والمسلمين، ويرحمُ اللهُ المستقدمين منا والمستأخرين، وإنَّا إن شاء الله بكم للاحِقون».

Source
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
Download image

Saved at original quality