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655 hadiths

अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने एक अंसारी महिला से, जिसका नाम अब्दुल्लाह बिन अब्बास ने बताया था, लेकिन मैं उसका नाम भूल गया हूँ, पूछा : "तुझे हमारे साथ हज करने से किस चीज़ ने रोका?" उसने उत्तर दिया : हमारे पास केवल दो ही ऊँट थे। एक पर सवार होकर मेरे बच्चों के पिता और मेरे बेटे ने हज किया, जबकि दूसरा ऊँट हमारे पास पानी लाने के लिए छोड़ गए। उसकी बात सुन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जब रमज़ान आए, तो तुम उमरा कर लो। क्योंकि रमज़ान में किया गया उमरा हज के बराबर है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
फ़ज़ाला बिन उबैद, सलमान फ़ारसी और उक़बा बिन आमिर जुहनी- रज़ियल्लाहु अन्हुम- कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "प्रत्येक मरने वाले का अमल मृत्यु के बाद बंद हो जाता है। हाँ, मगर अल्लाह की राह में पहरेदारी करने वाले की बात अलग है। उसका अमल क़यामत के दिन तक बढ़ता रहता है और वह क़ब्र की परीक्षा से सुरक्षित रहता है।"इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैैंनेे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह कहते हुए सुना है : “जिसने हज किया तथा हज के दिनों में बुरी बात एवं बुरे कार्यों से बचा एवं अवज्ञा से दूर रहा, वह उस दिन की तरह लौटेगा, जिस दिन उसकी माँ ने उसे जन्म दिया था।”इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है कि उन्होंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! हम ज़िहाद को सबसे उत्तम कार्य समझते हैं, तो क्या हम जिहाद न करें? आपने उत्तर दिया : "नहीं! तुम्हारे लिए सबसे उत्तम जिहाद वह हज है, जो हर गुनाह से पाक एवं अल्लाह के निकट ग्रहणयोग्य हो।"इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जब क़यामत के दिन अल्लाह पहले के और बाद के तमाम लोगों को एकत्र करेगा, तो हर विश्वासघात करने वाले के लिए एक-एक झंडा ऊँचा किया जाएगा। कहा जाएगा : यह अमुक के पुत्र अमुक का विश्वासघात है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू बकरा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, उन्होंने कहा : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रनाया : "क्या मैं तुम्हें सबसे बड़े गुनाहों के बारे में न बताऊँ?" आपने यह बात तीन बार दोहराई। हमने कहा : अवश्य, ऐ अल्लाह के रसूल! तो आपने फ़रमाया : "अल्लाह का साझी बनाना और माता-पिता की बात न मानना।" यह कहते समय आप टेक लगाए हुए थे, लेकिन सीधे बैठ गए और फ़रमाया : "सुन लो, झूठी बात कहना (भी बड़ा गुनाह है)।" यह बात आप इतनी बार दोहराते रहे कि हमने कहा कि काश आप खामोश हो जाते।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह तुम्हें इस बात से रोकता है कि तुम अपने बाप-दादाओं की क़सम खाओ।" उमर रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं : अल्लाह की क़सम, जिस दिन से मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से यह हदीस सुनी है, मैंने कभी बाप-दादाओं की क़सम नहीं खाई। न जान-बूझकर और न किसी की क़सम नक़ल करते हुए।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं : एक औरत अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ज़माने में होने वाले किसी युद्ध में निहत पाई गई, तो अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने औरतों एवं बच्चों की हत्या का खंडन किया।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन अबू औफ़ा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल-सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- एक युद्ध में, जिसमें शत्रु का सामना था, प्रतीक्षा में रहे, यहाँ तक कि जब सूर्य ढल गया, तो अपने साथियों के बीच खड़े हुए और कहाः "लोगो, दुश्मन से मुठभेड़ की कामना न करो, बल्कि अल्लाह से आफ़ियत तलब करो। परन्तु जब मुठभेड़ हो जाए, तो डटकर मुक़ाबला करो और जान लो कि जन्नत तलवारों की छाँव में है।" फिर यह दुआ फ़रमाईः "ऐ अल्लाह, किताब उतारने वाले, बादलों को चलाने वाले और गिरोहों को पराजित करने वाले, इन्हें पराजय का मुँह दिखा और हमें इनपर विजय प्रदान कर।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
आयशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि कुरैश को एक मख़ज़ूमी स्त्री के मामले ने चिंतित किया, जिसने चोरी की थी। उन्होंने कहा कि इसके बारे में कौन अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से बात कर सकता है? फिर उन्होंने कहा कि इस कार्य की जुर्रत अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के प्रिय उसामा बिन ज़ैद (रज़ियल्लाहु अंहुमा) के सिवा कोई नहीं कर सकता। अंततः उसामा ने आपसे बात की, तो आप ने फ़रमायाः "क्या तुम अल्लाह की ओर से एक निर्धारित दंड के बारे में सिफ़ारिश करने आए हो?" फिर खड़े हुए और ख़ुतबा देते हुए फ़रमायाः "तुमसे पहले के लोगों का विनाश केवल इस बात ने किया कि जब उनमें से कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति चोरी करता, तो छोड़ देते और जब कोई असहाय व्यक्ति चोरी करता, तो उसे दंड देते। अल्लाह की क़सम, अगर मुहम्मद की बेटी फ़ातिमा भी चोरी करती, तो मैं उसका भी हाथ काटता।" तथा एक रिवायत में हैः एक औरत सामान माँगकर लेती और देने से इनकार कर देती थी। अथः, नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने उसका हाथ काटने का आदेश दिया।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मन्नत मानने से मना किया है और कहा है : "मन्नत कोई भलाई नहीं लाती। इसके द्वारा केवल कंजूस का धन निकाला जाता है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "क़यामत के दिन लोगों के बीच सबसे पहले रक्त के बारे में निर्णय किया जाएगा।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है, वह कहती हैं कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "चोर का हाथ एक चौथाई दीनार या उससे अधिक में काटा जाएगा।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
सह्ल बिन साद साइदी -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : अल्लाह के मार्ग में एक दिन की पहरेदारी दुनिया और उसकी तमाम चीज़ों से बेहतर है जन्नत में तुम में से किसी एक के कोड़ा के रखने के बराबर स्थान दुनिया और उसकी सारी वस्तुओं से बेहतर है तथा एक शाम एवं एक सुबह जो बंदा अल्लाह के रास्ते में निकले दुनिया तथा उसकी सारी वस्तुओं से बेहतर है।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू मूसा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से उस व्यक्ति के बारे में पूछा गया, जो बहादुरी दिखाने के लिए लड़ता हो, तथा उस व्यक्ति के बारे में पूछा गया जो अपनी क़ौम या देश के बचाव के लिए लड़ता हो एवं उस व्यक्ति के बारे में पूछा गया जो दिखावे के लिए लड़ता हो, इनमें से किसकी लड़ाई अल्लाह की राह में है? अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने उत्तर दिया : "जिसने युद्ध अल्लाह के शब्द को ऊँचा करने के लिए किया, उसका युद्ध अल्लाह की राह में है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुर रहमान बिन अबू लैला से रिवायत है कि वह हुज़ैफ़ा रज़ियल्लाहु अनहु के पास मौजूद थे कि उसी दौरान उन्होंने पीने के लिए पानी माँगा तो एक मजूसी ने पानी प्रस्तुत किया। जब उसने पानी का प्याला उनके हाथ में रखा, तो उन्होंने उसे उसी प्याले से मार दिया और फ़रमाया : अगर मैंने इसे एक-दो बार (सोने एवं चाँदी के बर्तन के प्रयोग से) मना न किया होता, तो मैं ऐसा न करता। मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को फ़रमाते हुए सुना है : "न रेशम पहनो और न दीबाज (मोटे रेशमी वस्त्र)। न सोने-चाँदी के बरतन में पियो और न उनकी थाली में खाओ। क्योंकि यह वस्तुएँ दुनिया में उन (काफ़िरों) के लिए हैं और आख़िरत में हमारे लिए।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
उमर रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जिसने दुनिया में रेशमी वस्त्र पहना, वह उसे आख़िरत में नहीं पहनेगा।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जो व्यक्ति अल्लाह के रास्ते में ज़ख़्मी हो जाए, वह क़यामत के दिन इस हाल में आएगा कि उसके ज़ख़्म से रक्त बह रहा होगा। उसका रंग तो रक्त का होगा, लेकिन सुगंध कस्तूरी जैसी होगी।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जिसने शिकार तथा जानवरों की रखवाली के लिए पाले जाने वाले कुत्ता के अतिरिक्त कोई और कुत्ता पाला, हर दिन उसकी नेकी से दो क़ीरात घटा दिए जाएँगे।" सालिम कहते हैं कि अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- यह भी कहा करते थे : "या खेती की रखवाली के कुत्ते के सिवा।" और वह खुद खेतीबाड़ी किया करते थे।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
साबित बिन ज़ह्हाक (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि उन्होंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से पेड़ के नीचे बैअत की थी और अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहा थाः जिसने किसी बात पर जान-बूझकर इस्लाम के अतिरिक्त किसी अन्य धर्म की झूठी क़सम खाई, तो वह वैसा ही होगा, जैसा उसने कहा। और जिसने किसी वस्तु से अपनी हत्या कर ली, उसे क़यामत के दिन उसी के द्वारा यातना दी जाएगी। तथा किसी व्यक्ति के लिए ऐसी मन्नत को पूरा करना आवश्यक नहीं है, जिसका वह मालिक नहीं है। तथा एक रिवायत में हैः मोमिन पर लानत करना उसकी हत्या समान है। एक अन्य रिवायत में हैः जिसने धन बढ़ाने के लिए झूठा दावा किया, अल्लाह उसकी तंगी को और बढ़ा देता है।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू मूसा अशअरी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जिसने हमपर हथियार उठाया, वह हममें से नहीं है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन अबू औफ़ा (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ सात युद्धों में शरीक हुए और उनके दौरान हम टिड्डी खाते थे।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू वाक़िद हारिस बिन औफ़ (रज़ियल्लाहु अनहु) सेे रिवायत है कि एक बार अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मस्जिद में लोगों के साथ बैठे थे कि इतने में तीन आदमी आए। उनमें से दो लोग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए और एक वापस चला गया। जो दो व्यक्ति अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए, उनमें से एक मज्लिस में एक खाली स्थान देखकर बैठ गया और दूसरा लोगों के पीछे जाकर बैठा। रही बात तीसरे की, तो वह उलटे पाँव वापस हो गया। जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की व्यस्तता समाप्त हुई, तो फ़रमायाः क्या मैं तुम्हें उन तीन व्यक्तियों के बारे में न बताऊँ? उनमें से एक ने अल्लाह की शरण ली, तो अल्लाह ने उसे अपनी शरण दे दी। दूसरा शरमाया, तो अल्लाह ने भी उसकी लाज रख ली। तीसरे ने मुँह फेरा, तो अल्लाह ने भी उससे मुँह फेर लिया।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) शाम के समय यह दुआ पढ़तेः "أمسينا وأمسى الملك لله، والحمد لله، لا إله إلا الله وحده لا شريك له" (अर्थात्ः हमने शाम की और अल्लाह के आदेश से देश ने शाम की। सारी प्रशंसा अल्लाह की है। अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं है। वह अकेला है। उसका कोई साझी नहीं है।) वर्णनकर्ता कहते हैंः मुझे लगता है कि आप उक्त शब्दों के साथ यह भी कहा करते थेः "له الملك وله الحمد وهو على كل شيء قدير، ربِّ أسألك خير ما في هذه الليلة وخير ما بعدها، وأعوذ بك من شر ما في هذه الليلة وشر ما بعدها، رب أعوذ بك من الكسل، وسُوءِ الكِبَرِ، رب أعوذ بك من عذاب في النار، وعذاب في القبر" (अर्थात्ः उसी का राज्य है, उसी की प्रशंसा है एवं वह हर चीज़ की शक्ति रखता है। मेरे प्रभु! मैं तुझसे इस रात में जो कुछ है तथा इसके बाद जो कुछ है, उसकी भलाई माँगता हूँ, तथा इस रात में जो कुछ है एवं इसके बाद जो कुछ है, उसकी बुराई से तेरी शरण माँगता हूँ। मेरे प्रभु! मैं सुस्ती एवं अभिमान की बुराई से तेरी शरण माँगता हूँ। मेरे प्रभु! मैं जहन्नम और क़ब्र की यातना से तेरी शरण माँगता हूँ।) तथा जब सुब्ह करते, तो कहतेः "أصبحنا وأصبح الملك لله" (अर्थात्ः हमने सुब्ह की और अल्लाह के लिए देश ने भी सुब्ह की।)इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।