Hadith for the World
Topic

सीरत एवं इतिहास

38 hadiths

38 hadiths

मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, वह कहती हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जूता पहनना, कंघी करना, पवित्रता प्राप्त करना तथा अपने सभी कार्यों को दाएँ से करना पसंद करते थे।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) वर्णन करते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का में कदा की ओर से, बतहा की ऊँची घाटी से होते हुए दाखिल हुए और नीची घाटी से निकले।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) यात्रा पर निकलने वाले व्यक्ति से कहते थेः मेरे पास आओ, ताकि मैं तुम्हें उसी तरह विदा करूँ, जैसे अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमें विदा करते थे। आप फ़रमाते थेः "मैं तेरे धर्म, तेरी अमानत और तेरे अंतिम कर्मों को अल्लाह के हवाले करता हूँ।" तथा अब्दुल्लाह बिन यज़ीद ख़तमी (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब सेना को विदा करते, तो फ़रमातेः "मैं तुम्हारे धर्म, तुम्हारी अमानत और तुम्हारे अंतिम कर्मों को अल्लाह के हवाले करता हूँ।"इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, वह कहती हैं : मैंने कभी अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को इस तरह खिल-खिलाकर हँसते हुए नहीं देखा कि आपके गले का कौआ नज़र आने लगे। आप केवल मुस्कुराया करते थे।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
हुज़ैफ़ा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब रात में सोकर उठते, तो अपने मुँह को मिसवाक से रगड़कर साफ़ करते।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
ज़ैनब बिंत जहश रज़ियल्लाहु अनहा से रिवायत है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम घबराए हुए उनके पास आए और कहने लगे : "अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, अरबों का विनाश उस बुराई से होना है, जो निकट आ गई है। आज याजूज और माजूज की दीवार में इतना छेद हो गया है।" तथा आपने अंगूठे और उससे सटी हुई उँगली का गोला बनाकर दिखाया। मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, क्या हम हलाक कर दिए जाएँगे, जबकि हमारे बीच सदाचारी लोग भी होंगे? फ़रमाया : "हाँ, जब पाप बढ़ जाएगा।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
तथा अबू सईद खुदरी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम पर्दानशीं अविवाहित लड़की से भी अधिक हया वाले थे। परन्तु, जब कोई ऐसी चीज़ देखते, जिसे नापसंद करते, तो हम उसे आपके चेहरे पर पहचान लेते।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) का वर्णन है, वह कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की बात इतनी स्पष्ट और दो-टूक होती कि हर सुनने वाला समझ जाता।इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "यदि मुसलमानों पर -या : मेरी उम्मत पर- कठिन न होता, तो मैं उन्हें आदेश देता कि प्रत्येक नमाज़ के समय मिसवाक कर लिया करें।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
महमूद बिन लबीद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मुझे तुम्हारे बारे में जिस वस्तु का भय सबसे अधिक है, वह है, छोटा शिर्का।" सहाबा ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! छोटा शिर्क क्या है? आपने उत्तर दिया : "दिखावा। सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ऐसे लोगों से क़यामत के दिन, जब लोगों को उनके कर्मों का प्रतिफल दे दिया जाएगा, कहेगा : उन लोगों के पास जाओ, जिनको दिखाने के लिए तुम दुनिया में काम करते थे। देखो, क्या तुम उनके पास कोई प्रतिफल पाते हो?" bnइसे अह़मद ने रिवायत किया है
अबू बकर सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि जब हम ग़ार में थे और मुश्रिक हमें ढूँढते हुए हमारे सर के ऊपर पहुँच चुके थे, तो मैंने उनके पाँव देख लिए। ऐसे में, मैंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, अगर उनमें से किसी ने अपने पाँव के नीचे नज़र डाली, तो हमें देख लेगा। यह सुन आपने फ़रमायाः "ऐ अबू बक्र, उन दो लोगों के बारे में तुम्हारा क्या ख़याल है, जिनका तीसरा अल्लाह है?"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब कोई बात कहते, तो तीन बार कहते, ताकि आपकी बात को ठीक से समझ लिया जाए और जब किसी समूह के पास जाते और उन्हें सलाम करते, तो तीन बार सलाम करते।इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि एक व्यक्ति अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास अपने क़र्ज़ का तकाजा करने के लिए आया और आपके साथ अशिष्ट व्यवहार कर डाला। उसका व्यवहार देख सहाबा ने उसे मारने का इरादा कर लिया। परन्तु, अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "उसे छोड़ दो, अधिकार वाले को बोलने का हक़ है।" फिर फ़रमायाः "उसे उसी आयु का ऊँट दो, जिस आयु का ऊँट उसने मुझे दिया था।" सहाबा ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, हमें उससे अधिक आयु का ऊँट ही मिल पा रहा है। तो फ़रमायाः "उसे दे दो, क्योंकि तुममें सबसे उत्तम व्यक्ति वह है, जो सबसे अच्छे तरीके से उधार चुकाने वाला हो।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि देहात के रहने वाले कुछ लोग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए और पूछाः क्या आप अपने बच्चों को बोसा देते हैं? आपने कहाः हाँ! उन लोगों ने कहाः लेकिन अल्लाह की क़सम! हम बोसा नहीं देंगे। इसपर अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः यदि अल्लाह ने तुम्हारे दिलों से दया को निकाल दिया है तो मैं क्या कर सकता हूँ?इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुनाः मैं तुम्हें जिस चीज़ से रोकूँ, उससे बचते रहो और जिस चीज का आदेश दूँ, उसे जहाँ तक हो सके किए जाओ, क्योंकि तुमसे पहले के लोगों को उनके अधिक प्रश्नों और नबियों के विरोध ने हलाक किया है।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि जब किसी बीमारी आदि के कारण, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की रात की नमाज़ छूट जाती तो दिन में बारह रकअत पढ़ लेते थे।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अनस- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ जा रहा था और आपके शरीर पर एक मोटे किनारे वाली नजरानी चादर थी। इसी बीच, आपको एक देहाती मिला और बड़े ज़ोर से चादर पकड़कर खींचा। मैंने देखा तो आपके कंधे पर ज़ोर से खींचने के कारण चादर के किनारे का निशान पड़ चुका था। फिर उसने कहाः ऐ मुहम्मद, अल्लाह का जो धन तुम्हारे पास है, उसमें से मुझे देने का आदेश दो। आपने उसकी ओर देखा, मुस्कुराए और उसे कुछ देने का आदेश दिया।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अंहु) से रिवायत है कि अंसार में से कुछ लोगों ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से (माल का) सवाल किया, तो आपने दे दिया। उन्होंने दोबारा माँगा, तो आपने फिर दे दिया। यहाँ तक कि आपके पास जो कुछ था, सब ख़त्म हो गया। अंततः, आपने फरमायाः "मेरे पास जो माल होगा, उसे तुम लोगों से बचाकर नहीं रखूँगा। लेकिन याद रखो, जो माँगने से बचेगा, अल्लाह उसे माँगने से बचाएगा, जो बेनियाज़ी दिखाएगा, अल्लाह उसे बेनियाज़ रखेगा और जो सब्र करेगा, अल्लाह उसे सहनशील बना देगा और किसी व्यक्ति को कोई ऐसी वस्तु नहीं दी गई, जो सब्र से बेहतर एवं व्यापक हो।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अनस -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के सहाबा में से कुछ लोगों ने आपकी पत्नियों से एकांत में आपके द्वारा किए जाने वाले कार्यों के बारे में पूछा और उसके बाद उनमें से किसी ने कहा कि मैं औरतों से शादी नहीं करूँगा, किसी ने कहा कि मैं मांस नहीं खाऊँगा और किसी ने कहा कि मैं बस्तर पर नहीं सोऊँगा। (नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- तक जब यह बात पहुँची) तो आपने अल्लाह की प्रशंसा की और उसके बाद फ़रमाया : "कुछ लोगों को क्या हो गया है कि वह इस प्रकार की बात करने लगे हैं। मैं तो नमाज़ भी पढ़ता हूँ और सोता भी हूँ। कभी रोज़ा रखता हूँ, कभी नहीं भी रखता। औरतों से शादी भी करता हूँ। जिसने मेरी सुन्नत से मुँह मोड़ा, उसका मुझसे कोई संबंध नहीं है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सब लोगों से ज़्यादा दानी थे। खासकर रमज़ान में जब जिबरील अलैहिस्सलाम से आपकी मुलाक़ात होती तो और अधिक दानी हो जाते। जिबरील अलैहिस्सलाम रमज़ान में हर रात आपसे मुलाक़ात करते और आप को क़ुरआन मजीद का दौर फ़रमाते। ऐसे में, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सदक़ा करने में आंधी से भी ज़्यादा द्रुतगामी हो जाते थे।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं: अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सबसे उत्तम चरित्र के इनसान थे।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
असवद बिन यज़ीद कहते हैं कि आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) से प्रश्न किया गया कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) घर में क्या करते थे? उन्होंने कहाः आप अपने घर वालों की सेवा में लगे रहते और जब नमाज़ का समय आ जाता, तो नमाज़ के लिए चले जाते थे।इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
अनस (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि मैंने किसी ऐसे मोटे और महीन रेशम को नहीं छुआ है, जो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की हथेली से अधिक मुलायम हो और न ही ऐसी खुश्बू सूंघी है, जो अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के शरीर की ख़ुश्बू से अधिक सुगंधित हो। मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की दस साल तक सेवा की है लेकिन कदापि आप ने मुझे ओह तक नहीं कहा और न ही मैंने कोई काम किया, तो उस पर फ़रमाया कि तुम ने अमुक काम क्यों किया? और मेरे किसी कार्य के न करने पर यह नहीं कहा कि तुम ने ऐसा क्यों नहीं किया?इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है, वह कहती हैं : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को जब भी दो चीज़ों में से किसी एक का चयन करना होता, तो आप हमेशा दोनों में से अधिक आसान का चयन करते, जब तक कि वह आसान काम पाप न होता। यदि वह पाप होता, तो आप उससे सबसे ज़्यादा दूर रहते। (इसी तरह) अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने कभी अपने लिए बदला नहीं लिया। आप बदला केवल उस समय लेते, जब अल्लाह की सीमाओं का उल्लंघन किया जाता। जब ऐसा होता, तो अल्लाह के लिए बदला लेते।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है