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फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह

अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि :

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«अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मन्नत मानने से मना किया है और कहा है : "मन्नत कोई भलाई नहीं लाती। इसके द्वारा केवल कंजूस का धन निकाला जाता है।"»

Meaning translation ·

Explanation

The meaning in a few plain lines

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने मन्नत मानने से मना किया है। मन्नत यह है कि इन्सान अपने ऊपर ऐसी कोई चीज़ वाजिब कर ले, जिसे अल्लाह ने उसपर वाजिब न किया हो। आपने आगे फ़रमाया कि मन्नत न किसी चीज़ को आगे करती है, न पीछे। उसके द्वारा तो केवल कंजूस व्यक्ति से, जो बस अनिवार्य कार्य ही पर खर्च करता हो, कुछ भलाई निकाली जाती है। मन्नत कोई ऐसी चीज़ नहीं लाती, जो तक़दीर में न लिखी हो।

Source
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
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