फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह
عن عائشةَ أمِّ المؤْمنِين رضي الله عنها قالت:
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«आइशा बिंत अबू बक्र सिद्दीक़ (रज़ियल्लाहु अंहा) कहती हैं कि नबी (सल्लाल्लाहु अलैहि वसल्लम) किसी नफ़ल नमाज़ की उतनी पाबंदी नहीं करते थे, जितनी फ़ज्र की दो रकातों की करते थे।
तथा एक रिवायत में हैः "फ़ज्र की दो रकात सुन्नतें दुनिया और उसकी तमाम चीज़ों से उत्तम हैं।"»Meaning translation ·
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