अक़ीदा
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं :
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«अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "उच्च एवं महान अल्लाह कहता है : मैं अपने बारे में अपने बंदे की सोच के निकट होता हूँ तथा मैं उसके साथ होता हूँ, वह जब भी मुझे याद करे। अगर वह अपने मन में मुझे याद करता है, तो मैं भी उसे अपने मन में याद करता हूँ। अगर वह किसी सभा में मेरा ज़िक्र करता है, तो मैं उसका ज़िक्र ऐसी सभा में करता हूँ, जो उसकी सभा से बेहतर होती है। अगर वह मेरी ओर एक बित्ता आता है, मैं उसकी ओर एक हाथ जाता हूँ, और अगर मेरी ओर एक हाथ आता है, मैं उसकी ओर दो हाथ जाता हूँ तथा अगर मेरी ओर चलकर आता है, मैं उसकी ओर दौड़कर जाता हूँ।"»Meaning translation ·
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