फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह
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«अब्दुल्लाह बिन ज़ैद बिन आसिम माज़िनी (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) वृष्टि माँगने के लिए नमाज़ पढ़ने को निकले, तो क़िबले की ओर मुँह करके दुआ की, अपनी चादर पलटी और फिर दो रकात नमाज़ पढ़ी, जिसमें ऊँची आवाज़ में तिलावत की।
तथा एक रिवायत में है कि आप 'मुसल्ला' (नमाज़गाह) की ओर निकले।»Meaning translation ·
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