Hadith for the World
Every Friday

Friday: supplication and peace

Supplications and greeting etiquette that suit Friday and meeting people.

3 hadiths
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अनहुमा से रिवायत है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम दो सजदों के बीच में यह दुआ पढ़ते थे : "ऐ अल्लाह! तू मुझे माफ कर दे, मेरे ऊपर रहम कर, मुझे आफियत (स्वास्थ्य इत्यादि) दे तथा मुझे रोज़ी प्रदान कर।"इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब कोई बात कहते, तो तीन बार कहते, ताकि आपकी बात को ठीक से समझ लिया जाए और जब किसी समूह के पास जाते और उन्हें सलाम करते, तो तीन बार सलाम करते।इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
यज़ीद बिन हय्यान कहते हैंः मैं, हुसैन बिन सबरा और अम्र बिन मुस्लिम ज़ैद बिन अर्क़म- रज़ियल्लाहु अन्हु- के पास आए। हम उनके पास बैठे, तो हुसैन ने उनसे कहाः ज़ैद, आपके हिस्से में बहुत- सी भलाइयाँ आई हैं। आपने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को देखा, आपकी बातें सुनीं, आपके साथ युद्ध किया और आपके पीछे नमाज़ पढ़ी। इस तरह आपको बहुत- सी भलाइयाँ प्राप्त रहीं। अतः हमें अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की कोई हदीस सुनाइए। उन्होंने कहाः ऐ भतीजे, अल्लाह की क़सम, मेरी आयु अधिक हो चुकी है, अल्लाह के रसूल के साथ रहे बहुत दिन गुज़र चुके हैं और अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से याद की हुई बहुत-सी बातें भूल चुका हूँ। अतः जितना सुना दूँ, उसे ग्रहण कर लो और जो न सुना सकूँ, उसे सुनाने की ज़िम्मेवारी मुझ पे न डालो। फिर कहाः एक दिन रसूल - सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मक्का और मदीना के बीच स्थित ख़ुम्म नामी एक जल-स्रोत के पास हमारे बीच भाषण देने के लिए खड़े हुए, अल्लाह की प्रशंसा एवं तारीफ़ की, उपदेश दिए, नसीहत की और कहाः "इसके बाद, ऐ लोगो, सुन लो, मैं केवल एक इनसान हूँ, समीप है कि मेरे प्रभु का संदेशवाहक (मौत का फरिश्ता) आ जाए और मैं तुम से जुदा हो जाऊँ। मैं तुम्हारे बीच दो भारी वस्तुएँ छोड़े जा रहा हूँ। एक अल्लाह की किताब, जिसमें हिदायत और प्रकाश है। अतः अल्लाह की किताब को पकड़ लो और उसे मज़बूती से थाम लो।" आपने अल्लाह की किताब को थामे रहने पर उभारा तथा उसकी शिक्षाओं पर अमल करने की प्रेरणा दी। फिर कहाः "मेरे परिवार के लोगों का ख़याल रखना। मैं तुम्हें अपने परिवार के लोगों के बारे में अल्लाह के आज्ञापालन की नसीहत करता हूँ।" तो हुसैन ने उनसे कहाः ऐ ज़ैद, आपके परिवार के लोग कौन हैं? क्या आपकी पत्नियाँ आपके परिवार के लोगों में शामिल नहीं हैं? उन्होंने कहाः हाँ, आपकी पत्नियाँ आपके परिवार के लोगों में शामिल हैं, लेकिन आपके परिवार के लोग वे हैं, जिनपर आपके बाद सदक़ा हराम है। उन्होंने कहा कि वे कौन हैं? तो कहाः वे हैं, अली की संतान, अक़ील की संतान, जाफ़र की संतान और अब्बास की संतान। उन्होंने पूछा कि इन सभी लोगों पर सदक़ा हराम है? तो कहाः हाँ। तथा एक रिवायत में हैः "सुन लो, मैं तुम्हारे बीच दो भारी वस्तुएँ छोड़े जा रहा हूँ। एक अल्लाह की किताब, जो अल्लाह की रस्सी है, जो उसका अनुसरण करेगा, वह हिदायत पर होगा और जो उसे छोड़ देगा,कूपथगामी होगा।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।