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पवित्र क़ुरआन तथा उससे संबंधित अन्य विषय
क़ुरआन से संबंधित साधारण विषय
3 hadiths
क़ुरआन तथा मुसहफ़ों से संबंधित अहकाम
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क़ुरआन पढ़ने तथा उससे जुड़े लोगों के आदाब
2
3 hadiths
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : “निश्चय ही क़ुरान वाले का उदाहरण रस्सी से बंधे हुए ऊँटों के मालिक के समान है। यदि वह उनकी ठीक से देखभाल करेगा, तो उन्हें अपने पास रखने में सफल होगा और अगर उन्हें छोड़ देगा, तो वे भाग खड़े होंगे।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, वह कहती हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सभी हालतों में अल्लाह का ज़िक्र (गुणगान) किया करते थे।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
जुंदुब बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमाया : “क़ुरआन उस समय तक पढ़ो, जब तक तुम्हारे दिल अनुकूल रहें। जब प्रतिकूलता आने लगे, तो पढ़ना छोड़ दो।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।