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पवित्र क़ुरआन तथा उससे संबंधित अन्य विषय
क़ुरआन की फ़ज़ीलतें
19 hadiths
क़ुरआन पर ध्यान केंद्रित करने की फ़ज़ीलत
9
सूरों एवं आयतों की फ़ज़ीलतें
9
19 hadiths
अब्दुल्लाह बिन मसऊद- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः ईर्ष्या केवल दो प्रकार के लोगों से रखना जायज़ है; एक वह व्यक्ति, जिसे अल्लाह ने धन प्रदान किया हो तथा उसने उस धन को सत्य के मार्ग में खर्च करने पर लगा दिया हो तथा दूसरा वह व्यक्ति, जिसे अल्लाह ने हिकमत (अंतर्ज्ञान) प्रदान की हो और वह उसी के अनुसार निर्णय करता हो और उसकी शिक्षा देता हो। तथा अब्दुल्लाह बिन उमर- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से रिवायत करते हैं कि आपने फ़रमायाः "ईर्ष्या केवल दो मामलों में जायज़ है; एक वह व्यक्ति, जिसे अल्लाह ने क़ुरआन दिया हो और वह रात दिन पढ़ने में लगा हो और एक वह व्यक्ति, जिसे अल्लाह ने धन दिया हो और वह रात दिन उसे- अल्लाह के रास्ते में- खर्च करने में लगा हो।"
इसे दोनों रिवायतों के साथ बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू उमामा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुनाः "क़ुरआन पढ़ो; क्योंकि क़ुरआन क़यामत के दिन अपने पढ़ने वालों के लिए सिफ़ारिशी बनकर आएगा।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
उसमान रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "तुम्हारे बीच सबसे उत्तम व्यक्ति वह है, जो खुद क़ुरआन सीखे और उसे दूसरों को सिखाए।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
बरा बिन आज़िब (रज़ियल्लाहु अनहुमा) का वर्णन है, वह कहते हैंः एक व्यक्ति सूरा कह्फ़ पढ़ रहा था और उसके निकट ही एक घोड़ा रस्सियों से बंधा हुआ था। अल्लाह का करना कि एक बादल ने उसे ढाँप लिया और धीरे-धीरे उसके निकट आने लगा तथा उसका घोड़ा उससे बिदकने लगा। जब सुब्ह हुई और वह अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया तथा आपको पूरी घटना बताई तो आपने फ़रमायाः यह सकीनत (शांति) थी, जो क़ुरआन के लिए उतरी थी।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अपने घरों को क़ब्रिस्तान मत बनने दो। शैतान उस घर से भाग जाता है, जिस घर में सूरा बक़रा पढ़ी जाती है।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू मूसा अशअरी रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "क़ुरआन पढ़ने वाले मोमिन का उदाहरण, उस तुरंज फल के जैसा है, जिसकी गंध अच्छी और जिसका स्वाद अच्छा होता है। क़ुरआन न पढ़ने वाले मोमिन का उदाहरण उस खजूर के जैसा है, जिसमें कोई खुश्बू तो नहीं होती, लेकिन उसका स्वाद मीठा होता है। क़ुरआन पढ़ने वाले मुनाफ़िक़ का उदाहरण उस तुलसी के जैसा है, जिसकी गंध तो अच्छी होती है लेकिन स्वाद कड़वा होता है और क़ुरआन न पढ़ने वाले मुनाफ़िक़ का उदाहरण उस इन्द्रायण फल के जैसा है, जिसके अंदर सुगंध नहीं होती और जिसका स्वाद बहुत ही कड़वा होता है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू दरदा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जिसने सूरा कह्फ़ के आरंभ की दस आयतें कंठस्थ कर लीं, वह दज्जाल से सुरक्षित रहेगा।" एक रिवायत में है : "सूरा कह्फ़ के अंत की।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जिसने सूरा बक़रा की अंतिम दो आयतें रात में पढ़ लीं, वह उसके लिए काफ़ी हो जाती हैं।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जो अल्लाह की किताब का कोई एक अक्षर पढ़ेगा, उसे एक नेकी मिलेगी और नेकी दस गुणा तक दी जाती है। मैं यह नहीं कहता कि अलिफ़ लाम मीम मिल कर एक अक्षर है, बल्कि अलिफ़ एक अक्षर, लाम एक अक्षर और मीम एक अलग अक्षर है।"
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है
अबू सईद राफ़े बिन मुअल्ला (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने मुझसे फ़रमाया: क्या मैं तुम्हें, तुम्हारे मस्जिद से निकलने से पहले- पहले क़ुरआन की महानतम सूरा न सिखाऊँ? आपने मेरा हाथ पकड़ लिया। जब हम मस्जिद से निकलने लगे, तो मैंने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! आपने कहा था कि आप हमें क़ुरआन की महानतम सूरा सिखाएँगे? तो फ़रमाया: यह सूरा है: अल- हमदु लिल्लाहि रब्बिल- आलमीन, यह सब-अल-मसानी (बार- बार दोहराई जाने वाली सात आयतें) और महान क़ुरआन का सार है, जो मुझे दिया गया है।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है, वह कहती हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जो कुरान में निपुण है, वह सम्मानित और नेक राजदूतों (फरिश्तों) के साथ होगा, तथा जो अटक-अटक कर क़ुरान पढ़ता है और उसे क़ुरान पढ़ने में कठिनाई होती है, उसके लिए दोहरा सवाब है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
उक़बा बिन आमिर (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: क्या तुम्हें मालूम नहीं कि जो आयतें आज रात उतरी हैं, उन जैसी आयतें कभी नहीं देखी गईं! ये आयतें हैं: क़ुल अऊज़ु बि-रब्बिल फ़लक़ और क़ुल अऊज़ु बि-रब्बिन्नास।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
उमर बिन ख़त्ताब (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: अल्लाह इस किताब के ज़रिए कुछ लोगों को ऊपर उठाता है तो इसी के कारण कुछ लोगों को नीचे गिरा देता है।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "किसी आदमी का यह कहना कि मैं अमुक-अमुक आयत भूल गया हूँ, नामुनासिब बात है। बल्कि वह भुला दिया गया है। क़ुरआन को लगातार याद करते रहो, क्योंकि क़ुरआन (गफलत बरतने वाले) लोगों के सीनों से निकल जाने के मामले में ऊँटों से भी ज़्यादा तेज़ है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू उमामा बाहिली (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुना : “क़ुरआन पढ़ो; क्योंकि क़ुरआन क़यामत के दिन अपने पढ़ने वालों के लिए सिफ़ारिशी बनकर आएगा। दो चमकती हुई सूरतेंः सूरा बक़रा तथा सूरा आल-ए- इमरान पढ़ो; क्योंकि दोनों सूरतें क़यामत के दिन इस प्रकार आएँगी, जैसे दो बादल हों, या दो सायबान हों, या पंक्तिबद्ध चिड़ियों के दो झुंड हों। दोनों सूरतें पढ़ने वालों के बचाव में बहस करेंगी। सूरा बक़रा पढ़ो; क्योंकि इसे लेना बरकत है, इसे छोड़ना हसरत है और जादूगर इसका मुक़ाबला नहीं कर सकते।”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा से वर्णित है, उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "क़ुरआन पढ़ने वाले से कहा जाएगा कि पढ़ते जाओ और चढ़ते जाओ। साथ ही तुम उसी तरह ठहर-ठहर कर पढ़ो, जिस तरह दुनिया में ठहर-ठहर कर पढ़ा करते थे। तुम्हारे द्वारा पढ़ी गई अंतिम आयत के स्थान पर तुम्हें रहने के लिए जगह मिलेगी।"
इसे अबू दावूद ने, तिर्मिज़ी ने तथा नसई ने अल-सुनन अल-कुबरा में एवं अह़मद ने रिवायत किया है
उबय बिन काब रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, उन्होंने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "ऐ अबुल मुंज़िर! क्या तुम जानतो हो कि तुम्हारे पास मौजूद अल्लाह की किताब की कौन-सी आयत सबसे महान है?" वह कहते हैं कि मैंने कहा : अल्लाह और उसके रसूल बेहतर जानते हैं। आपने कहा : "ऐ अबुल मुंज़िर! क्या तुम जानतो हो कि तुम्हारे पास मौजूद अल्लाह की किताब की कौन-सी आयत सबसे महान है?" वह कहते हैं कि मैंने कहा : {اللهُ لا إِلَهَ إِلا هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ} [सूरा अल-बक़रा : 255] वह कहते हैं : यह सुन आप ने मेरे सीने पर मारा और फ़रमाया : "अल्लाह की क़सम! ऐ अबुल मुंज़िर! तुमको यह ज्ञान मुबारक हो।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
عن أبي الدرداء عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «أيعجز أحدكم أن يقرأ في ليلة ثلث القرآن؟» قالوا: وكيف يقرأ ثلث القرآن؟ قال: «قل هو الله أحد تعدل ثلث القرآن».
رواه مسلم
عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ رَضيَ اللهُ عنهُ قَالَ: لَمَّا نَزَلَتْ: {إِنَّا فَتَحْنَا لَكَ فَتْحًا مُبِينًا لِيَغْفِرَ لَكَ اللهُ} إِلَى قَوْلِهِ {فَوْزًا عَظِيمًا} [الفتح: ١-٥] مَرْجِعَهُ مِنَ الْحُدَيْبِيَةِ، وَهُمْ يُخَالِطُهُمُ الْحُزْنُ وَالْكَآبَةُ، وَقَدْ نَحَرَ الْهَدْيَ بِالْحُدَيْبِيَةِ، فَقَالَ: «لَقَدْ أُنْزِلَتْ عَلَيَّ آيَةٌ هِيَ أَحَبُّ إِلَيَّ مِنَ الدُّنْيَا جَمِيعًا».
رواه مسلم