Hadith for the World
फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह

दवा, इलाज तथा वैध झाड़-फूँक

9 hadiths

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अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है कि उन्होंने अता बिन अबू रबाह से कहाः क्या मैं तुम्हें जन्नती स्त्रियों में से एक स्त्री न दिखाऊँ? अता कहते हैं कि मैंने कहाः अवश्य दिखाएँ। उन्होंने कहाः यह काली-कलोटी स्त्री, नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आई और कहने लगीः मुझपर मिर्गी का दौरा पड़ता है और मेरा शरीर खुल जाता है। अतः अल्लाह से मेरे लिए दुआ फ़रमाएँ। आपने कहाः "अगर तुम चाहो, तो सब्र करो, तुम्हें जन्नत मिलेगी और अगर चाहो, तो मैं अल्लाह से तुम्हारे लिए स्वास्थ्य लाभ की दुआ कर दूँ।" यह सुनकर उसने कहाः मैं सब्र करूँगी। फिर उसने कहाः मेरा शरीर खुल जाता है। अतः, अल्लाह से दुआ करें कि मेरा शरीर न खुले। चुनांचे आपने उसके लिए दुआ फ़रमाई।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि उन्होंने साबित (रह़िमहुल्लाह) से फ़रमायाः क्या मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के शब्दों के द्वारा तुम्हरा इलाज न करूँ? उन्होंने कहाः अवश्य कीजिए। तब उन्होंने यह दुआ पढ़ीः “ऐ लोगों के रब (पालनहार), तकलीफों तथा रोगों को दूर करने वाले, रोग से मुक्ति प्रदान कर। तेरे सिवा कोई शिफा देने वाला नहीं है। रोग से ऐसा छुटकारा प्रदान कर कि फिर कोई रोग शेष न रहे।”इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) से रिवायत है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: बुख़ार जहन्नम की भाप से आता है, अतः तुम उसे पानी से ठंडा करो।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: मदीने की गुज़रगाहों पर फरिश्ते नियुक्त हैं, यहाँ न ताऊन प्रवेश कर सकता है, न दज्जाल।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू मूसा (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: मेरी उम्मत की मौत नेज़े के आघात तथा ताऊन से होगी। किसी ने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! नेज़े का आघात तो हम समझ गए, लेकिन यह ताऊन क्या है? आपने फ़रमाया: जिन्नों में से तुम्हारे दुश्मनों का प्रहार। वैसे दोनों से मरने वाले शहीद हैं।इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
عَنْ سَعْدٍ قَالَ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «مَنْ تَصَبَّحَ سَبْعَ تَمَرَاتٍ عَجْوَةً لَمْ يَضُرَّهُ ذَلِكَ اليَوْمَ سُمٌّ وَلاَ سِحْرٌ».متفق عليه
عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «‌الشِّفَاءُ فِي ثَلاَثَةٍ: فِي شَرْطَةِ مِحْجَمٍ، أَوْ شَرْبَةِ عَسَلٍ، أَوْ كَيَّةٍ بِنَارٍ، وَأَنَا أَنْهَى أُمَّتِي عَنِ الكَيِّ».رواه البخاري
عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ: كَانَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يُعَوِّذُ الحَسَنَ وَالحُسَيْنَ، وَيَقُولُ: «إِنَّ أَبَاكُمَا كَانَ يُعَوِّذُ بِهَا إِسْمَاعِيلَ وَإِسْحَاقَ: أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ، مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ، وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لاَمَّةٍ».رواه البخاري
عَنْ عَائِشَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهَا قَالَتْ: أَمَرَنِي رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ أَوْ أَمَرَ أَنْ يُسْتَرْقَى مِنَ العَيْنِ.متفق عليه