Hadith for the World
नमाज़

जुमे की नमाज़

7 hadiths

7 hadiths

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जब जुमा के दिन इमाम खुतबा दे रहा हो और तुम अपने पास बैठे हुए आदमी से कहो कि खामोश हो जाओ, तो (ऐसा कहकर) तुमने खुद एक व्यर्थ कार्य किया।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
समुरा बिन जुनदुब (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जिसने जुमे के दिन वज़ू किया, उसने सुन्नत पर अमल किया और बहुत अच्छा किया तथा जिसने स्नान किया, उसका यह कार्य उससे बेहतर है।इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे दारिमी ने रिवायत किया है।
अम्र बिन सुलैम अंसारी कहते हैं : मैं गवाही देता हूँ कि अबू सईद ने कहा है और उन्होंने गवाही दी है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जुमे के दिन हर व्यस्क व्यक्ति पर स्नान करना अनिवार्य है तथा यह कि वह दातुन करे और मिल सके तो ख़ुशबू भी लगाए।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जुमे के दिन फ़रिश्ते मस्जिद के द्वार पर खड़े हो जाते हैं और सिलसिलेवार मस्जिद में आने वालों के नाम लिखते जाते हैं। सबसे पहले मस्जिद में प्रवेश करने वाले की मिसाल उस व्यक्ति की तरह है, जिसने ऊँट की क़ुर्बानी दी हो, फिर उसकी तरह जिसने गाय की क़ुर्बानी दी हो, फिर मेंढे की, फिर मुर्गी की और फिर अंडे की। जब इमाम प्रवचन के लिए निकल आता है, तो वे अपने रजिस्टर समेट लेते हैं और प्रवचन सुनने लगते हैं।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
عن أبي هريرة أن رسول الله صلى الله عليه وسلم ذكر يوم الجمعة، فقال: «فيه ساعة، لا يوافقها عبدٌ مسلمٌ، وهو قائم يصلي، يسأل الله تعالى شيئًا، إلا أعطاه إياه» وأشار بيده يقللها.متفق عليه
عن سلمان الفارسي قال: قال النبي صلى الله عليه وسلم: «لا يغتسل رجلٌ يوم الجمعة، ويتطهر ما استطاع من طهر، ويدَّهنُ مِن دهنه، أو يمسُّ من طيب بيته، ثم يخرج فلا يفرِّق بين اثنين، ثم يصلي ما كُتب له، ثم ينصت إذا تكلم الإمام، إلا غُفر له ما بينه وبين الجمعة الأخرى».رواه البخاري
عن جابر بن عبد الله قال: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا خطب احمرَّتْ عيناه، وعلا صوته، واشتد غضبه، حتى كأنه مُنذِرُ جيشٍ يقول: صبَّحكم ومسَّاكم، ويقول: «بُعثتُ أنا والساعةُ كهاتين»، ويقرن بين إصبعيه السبابة، والوسطى، ويقول: «أما بعد، فإن خير الحديث كتاب الله، وخير الهدى هدى محمد، وشر الأمور محدثاتها، وكل بدعة ضلالة» ثم يقول: «أنا أولى بكل مؤمن من نفسه، من ترك مالًا فلأهله، ومن ترك دينًا أو ضَياعًا فإليَّ وعليَّ».رواه مسلم