Hadith for the World
अक़ीदा

फ़रिश्तों पर ईमान

9 hadiths

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उम्मे दरदा- रज़ियल्लाहु अन्हा- से रिवायत है कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः मुसलमान की, अपने भाई के हक़ में, उसकी अनुपस्थिति में की गई दुआ क़बूल होती है। उसके सिर के निकट एक फ़रिश्ता नियुक्त होता है। वह जब भी अपने भाई के लिए कोई अच्छी दुआ करता है, वह नियुक्त फ़रिश्ता कहता है कि अल्लाह इसे ग्रहण करे तथा तुझे भी ऐसी ही भलाई मिले।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबु हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "आदमी को जमात के साथ नमाज़ पढ़ने से घर तथा बाज़ार में नमाज़ पढ़ने की तुलना में पच्चीस गुना अधिक सवाब मिलता है। वह इसलिए कि जब अच्छी तरह वज़ू करता है, फ़िर मस्जिद सिर्फ नमाज़ के लिए ही निकलता है, तो प्रत्येक क़दम पर उसकी एक श्रेणी ऊँची की जाती है तथा उसका एक पाप मिटाया जाता है। फिर जब नमाज ख़त्म हो जाती है, तो फ़रिश्ते उसके लिए प्रार्थना करते रहते हैं, जब तक वह मस्जिद में होता है। वे कहते रहते हैंः ऐ अल्लाह, उसपर दया कर। ऐ अल्लाह, उसे क्षमा कर दे। ऐ अल्लह, उसपर रहम कर। तथा वह जब तक नमाज़ की प्रतीक्षा में रहता है, उस समय तक नमाज़ ही में होता है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब खाना खाते, तो अपनी तीनों उँगलियों को चाट लेते। वह कहते हैं कि आपने फ़रमायाः "जब तुममें से किसी का कोई लुक़मा गिर जाए, तो उसे उठाकर गंदगी साफ करके खा ले तथा उसको शैतान के लिए न छोड़े।" आपने यह भी आदेश दिया कि प्याले को उँगली से पोंछकर साफ कर लिया जाए फ़रमाया: "तुम नहीं जानते कि खाने के किस भाग में बरकत है।" तथा जाबिर बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "तुम्हारे प्रत्येक कार्य के समय शैतान हाज़िर रहता है। यहाँ तक कि खाने के समय भी मौजूद होता है। अतः जब तुममें से किसी का कोई लुक़मा गिर जाए, तो उसे उठाकर गंदगी साफ़ करके खा ले और उसको शैतान के लिए न छोड़े। फिर जब खाना समाप्त कर ले, तो अपनी उँगलियों को चाट ले। क्योंकि वह नहीं जानता कि खाने किस भाग में बरकत है।"इसे इमाम मुस्लिम ने दोनों रिवायतों के साथ नक़ल किया है।
عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعاً: «إذا أَحَبَّ اللهُ تعالى العَبْدَ، نَادَى جِبْرِيلَ: إنَّ اللهَ تعالى يُحِبُّ فلاناً، فَأَحْبِبْهُ، فَيُحِبُّهُ جِبْرِيلُ، فَيُنَادِي في أَهْلِ السَّمَاءِ: إنَّ اللهَ يحِبُّ فلاناً، فَأَحِبُّوهُ، فَيُحِبُّهُ أَهْلُ السَّمَاءِ، ثُمَّ يُوضَعُ لَهُ القَبُولُ في الأرضِ». وفي رواية: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «إنَّ اللهَ تعالى إذا أَحَبَّ عَبْدًا دَعَا جِبْرِيلَ، فقال: إني أُحِبُّ فلاناً فَأَحْبِبْهُ، فَيُحِبُّهُ جِبْرِيلُ، ثم ينادي في السَّمَاءِ، فيقول: إنَّ اللهَ يُحِبُّ فلاناً فَأَحِبُّوهُ، فَيُحِبُّهُ أَهْلُ السَّمَاءِ، ثُمَّ يُوضَعُ له القَبُولُ في الأرضِ، وإذا أَبْغَضَ عَبْدًا دَعَا جِبْرِيلَ، فيقول: إني أُبْغِضُ فلاناً فَأَبْغِضْهُ. فَيُبْغِضُهُ جِبْرِيلُ، ثُمَّ ينادي في أَهْلِ السَّمَاءِ: إنَّ اللهَ يُبْغِضُ فلاناً فَأَبْغِضُوهُ، ثُمَّ تُوضَعُ له البَغْضَاءُ في الأرضِ».متفق عليه. الرواية الأولى لفظ البخاري، والثانية لفظ مسلم
इयाज़ बिन हिमार मुजाशिई (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि एक दिन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने संबोधन में फ़रमाया: सुन लो, मेरे रब ने मुझे आदेश दिया है कि उसने आज मुझे जो बातें सिखाई हैं, उनमें से वह बातें मैं तुम्हें बता दूँ, जो तुम नहीं जानते। (अल्लाह तआला का फ़रमान है) हर वह माल, जो मैंने अपने बंदे को दिया है, वह उसके लिए हलाल है। मैंने अपने सारे बंदों को एक अल्लाह की वंदना करने वाला बनाकर पैदा किया है। फिर शैतान उनके पास आए और उन्हें उनके धर्म से बहकाने लगे। उनपर वह चीज़ें हराम कर दीं, जो मैंने उनके लिए हलाल की थीं। उन्हें आदेश दिया कि उन चीज़ों को मेरा साझी ठहराएँ, जिनके साझी होने की कोई दलील मैंने नहीं उतारी है। अल्लाह ने धरती की ओर देखा, तो कुछ बचे- खुचे अह्ले किताब (यहूदी और ईसाई) को छोड़कर उनके अरब तथा ग़ैरअरब सबसे नाराज़ हुआ तथा फ़रमाया: मैंने तुम्हें इसलिए भेजा है, ताकि तुम्हें आज़माऊँ और तुम्हारे द्वारा अन्य लोगों को भी। मैंने तुमपर एक ऐसी किताब उतारी है, जिसे पानी धो नहीं सकता। तुम उसे सोते- जागते पढ़ते हो। अल्लाह ने मुझे आदेश दिया है कि मैं क़ुरैश को जला डालूँ। मैंने कहा: ऐ मेरे रब! तब तो वे मेरे सर को कुचलकर रोटी बना देंगे। अल्लाह ने कहा: उन्हें निकालो, जैसे उन्होंने तुम्हें निकाला, उनसे युद्ध करो, हम तुम्हें युद्ध करने की शक्ति प्रदान करेंगे, ख़र्च करो, हम तुमपर ख़र्च करेंगे, तुम सेना भेजो, हम उस जैसी पाँच सेनाएँ भेजेंगे तथा अपने मानने वालों को साथ लेकर उन लोगों से युद्ध करो, जो नहीं मानते। अल्लाह ने कहा: जन्नती तीन प्रकार के लोग होंगे: न्यायकारी, सदक़ा करने वाला और अल्लाह की ओर से सत्य पर चलने का सामर्थ्य प्राप्त किया हुआ बादशाह, सभी रिश्तेदारों तथा मुसलमानों के लिए नर्म दिल तथा दयालु व्यक्ति एवं पाकदामन और माँगने से बचने वाला परिवार वाला। अल्लाह ने कहा: जहन्नम में पाँच प्रकार के लोग दाख़िल होंगे: बुद्धिहीन कमज़ोर जो तुम्हारे अधीन हो और परिवार तथा धन की चाहत न रखता हो, ऐसा छल करने वाला, जिसका लालच छुपा नहीं रहता, छोटी से छोटी चीज़ के बारे में भी छल करने पर उतर आता हो और ऐसा व्यक्ति, जो तुम्हें सुबह व शाम तुम्हारे परिवार तथा धन के बारे में धोखा दे। तथा कंजूस अथवा झूठे व्यक्ति और ऐसे बदचलन एवं अशिष्ट आदमी का भी ज़िक्र किया, जो गंदी तथा अश्लील भाषा प्रयोग करता हो।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अनस (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है, वह कहते हैं: ऐसा लगता है कि आज भी मैं बनी ग़नम की गली में वह उड़ती हुई धूल देख रहा हूँ, जो जिबरील (सलवातुल्लाहि अलैहि) के क़ाफ़िले से उठी थी, जब वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ बनू क़ुरैज़ा की ओर चले थे।इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
ज़ैद बिन साबित (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास रहकर चर्मपत्रों से क़ुरआन एकत्र कर रहे थे। इसी बीच आपने कहा: शाम की धरती धन्य है! हमने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! आपने ऐसा क्यों कहा? तो आपने फ़रमाया: क्योंकि दयावान (अल्लाह) के फ़रिश्ते उसपर अपने पर फैलाए हुए हैं।इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
जाबिर (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: इब्लीस (शैतान) अपना सिंहासन पानी पर रखता है। फिर अपनी सेनाओं को भेजता है। उसके यहाँ निकटतम स्थान उसे प्राप्त होता है, जो सबसे अधिक उपद्रव मचाने वाला हो। उनमें एक आकर कहता है: मैंने (आज) ऐसा और ऐसा किया है। इब्लीस कहता है: तुमने कुछ नहीं किया। फिर कोई आता है और कहता है: मैंने अमुक व्यक्ति को नहीं छोड़ा, यहाँ तक कि उसके तथा उसकी पत्नी के बीच जुदाई डाल दी। तब शैतान उसे अपने निकट करता है और कहता है: हाँ, तुमने अच्छा किया है। आमश कहते हैं: मैं समझता हूँ कि उन्होंने यह भी कहा था: फिर वह उसे सीने से लगा लेता है।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
उसमान बिन अबुल आस रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं : वह अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आए और कहने लगे : ऐ अल्लाह के रसूल! शैतान मेरे, मेरी नमाज़ तथा मेरी तिलावत के बीच रुकावट बनकर खड़ा हो जाता है। मुझे उलझाने के प्रयास करता है। यह सुन अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "यह एक शैतान है, जिसे ख़िंज़िब कहा जाता है। जब तुम्हें उसके व्यवधान डालने का आभास हो, तो उससे अल्लाह की शरण माँगो और तीन बार अपने बाएँ ओर थुत्कारो।" उनका कहना है कि मैंने इसपर अमल करना शुरू किया, तो अल्लाह ने मेरी इस परेशानी को दूर कर दिया।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है