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अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के गुण तथा आचरण

नबवी तरीक़ा

7 hadiths

7 hadiths

मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, वह कहती हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जूता पहनना, कंघी करना, पवित्रता प्राप्त करना तथा अपने सभी कार्यों को दाएँ से करना पसंद करते थे।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
हुज़ैफ़ा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब रात में सोकर उठते, तो अपने मुँह को मिसवाक से रगड़कर साफ़ करते।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
ज़ैनब बिंत जहश रज़ियल्लाहु अनहा से रिवायत है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम घबराए हुए उनके पास आए और कहने लगे : "अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, अरबों का विनाश उस बुराई से होना है, जो निकट आ गई है। आज याजूज और माजूज की दीवार में इतना छेद हो गया है।" तथा आपने अंगूठे और उससे सटी हुई उँगली का गोला बनाकर दिखाया। मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, क्या हम हलाक कर दिए जाएँगे, जबकि हमारे बीच सदाचारी लोग भी होंगे? फ़रमाया : "हाँ, जब पाप बढ़ जाएगा।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
आइशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि जब किसी बीमारी आदि के कारण, अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की रात की नमाज़ छूट जाती तो दिन में बारह रकअत पढ़ लेते थे।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अनस -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के सहाबा में से कुछ लोगों ने आपकी पत्नियों से एकांत में आपके द्वारा किए जाने वाले कार्यों के बारे में पूछा और उसके बाद उनमें से किसी ने कहा कि मैं औरतों से शादी नहीं करूँगा, किसी ने कहा कि मैं मांस नहीं खाऊँगा और किसी ने कहा कि मैं बस्तर पर नहीं सोऊँगा। (नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- तक जब यह बात पहुँची) तो आपने अल्लाह की प्रशंसा की और उसके बाद फ़रमाया : "कुछ लोगों को क्या हो गया है कि वह इस प्रकार की बात करने लगे हैं। मैं तो नमाज़ भी पढ़ता हूँ और सोता भी हूँ। कभी रोज़ा रखता हूँ, कभी नहीं भी रखता। औरतों से शादी भी करता हूँ। जिसने मेरी सुन्नत से मुँह मोड़ा, उसका मुझसे कोई संबंध नहीं है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: إِنَّ خَيَّاطًا دَعَا رَسُولَ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ لِطَعَامٍ صَنَعَهُ، قَالَ أَنَسُ بْنُ مَالِكٍ: فَذَهَبْتُ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ إِلَى ذَلِكَ الطَّعَامِ، فَقَرَّبَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ خُبْزًا وَمَرَقًا، فِيهِ دُبَّاءٌ وَقَدِيدٌ، فَرَأَيْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَتَتَبَّعُ الدُّبَّاءَ مِنْ حَوَالَيِ القَصْعَةِ، قَالَ: فَلَمْ أَزَلْ أُحِبُّ الدُّبَّاءَ مِنْ يَوْمِئِذٍ.متفق عليه
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है, वह कहते हैं कि कहा गया : ऐ अल्लाह के रसूल! मुश्रिकों के विरुद्ध बद-दुआ कीजिए। तो आपने फ़रमाया : "बेशक मुझे लानत करने वाला बनाकर नहीं भेजा गया, बल्कि मुझे दया बनाकर भेजा गया है।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है