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फ़ज़ीलतें तथा आदाब

जाबिर रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को फ़रमाते हुए सुना है :

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«जाबिर रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को फ़रमाते हुए सुना है : "तुममें से हर व्यक्ति की मृत्यु इस अवस्था में आनी चाहिए कि वह अल्लाह से अच्छा गुमान रखता हो।"»

Meaning translation ·

Explanation

The meaning in a few plain lines

अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- इस बात की प्रेरणा दे रहे हैं कि एक मुसलमान की मृत्यु अल्लाह से अच्छा गुमान रखते हुए ही होनी चाहिए। मरते वक़्त उम्मीद का पहलू प्रबल होना चाहिए और दिल में यह उम्मीद होनी चाहिए कि अल्लाह उसपर रहम करेगा और उसे माफ़ कर देगा। क्योंकि असल में, डर की ज़रूरत कर्मों को बेहतर बनाने के लिए होती है और वह समय कर्म का होता नहीं है। इसलिए, वहाँ उम्मीद का पहलू प्रबल होना चाहिए।

Source
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
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