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फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह

आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है :

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«आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "शब-ए-क़द्र को (रमज़ान के) अंतिम दस दिनों की विषम रातों में तलाश करो।"»

Meaning translation ·

Explanation

The meaning in a few plain lines

अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने अधिक से अधिक नेकी के कामों के साथ लैलतुल क़द्र (सम्मानित रात्रि) को तलाश करने की कोशिश करने की प्रेरणा दी है। लैलतुल क़द्र के बारे में इसकी ज़्यादा आशा है कि वह रमज़ान के अंतिम दस दिनों की विषम रातों यानी इक्कीसवीं, तेईसवीं, पच्चीसवीं, सत्ताईसवीं और उनतीसवीं रातों में से किसी एक रात में हुआ करती है।

Source
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
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