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रोज़े
रमज़ान के अंतिम दस दिन
4 hadiths
وجوب الصيام وحكم تاركه
1
रोज़े की फ़ज़ीलत
5
रोज़े की सुन्नतें
7
चाँद देखना
2
संदेह वाले दिन का रोज़ा
2
उज़्र वाले लोगों के रोज़े
1
रोज़ा तोड़ देने वाली वस्तुएँ
2
रोज़ेदार के लिए अनिवार्य कार्य
1
रोज़ेदार के लिए जायज़ कार्य
1
नफ़ल रोज़े
12
ऐतिकाफ़
1
रमज़ान के अंतिम दस दिन
4
रमज़ान
2
4 hadiths
मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है कि : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- रमज़ान महीने के अंतिम दस दिनों में दूसरे दिनों की तुलना में कहीं अधिक इबादत में लीन रहा करते थे।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, उन्होंने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जो ईमान के साथ और नेकी की आशा मन में लिए हुए, लैलतुल क़द्र (सम्मानित रात्रि) में कयाम करता है, उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "शब-ए-क़द्र को (रमज़ान के) अंतिम दस दिनों की विषम रातों में तलाश करो।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है, वह कहती हैं : जब रमज़ान के अंतिम दस दिन आते, तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- रातों को जागते, अपने घर के लोगों को जगाते, ख़ूब इबादतें करते और कमर कस लेते।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है