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रोज़े
रमज़ान
2 hadiths
وجوب الصيام وحكم تاركه
1
रोज़े की फ़ज़ीलत
5
रोज़े की सुन्नतें
7
चाँद देखना
2
संदेह वाले दिन का रोज़ा
2
उज़्र वाले लोगों के रोज़े
1
रोज़ा तोड़ देने वाली वस्तुएँ
2
रोज़ेदार के लिए अनिवार्य कार्य
1
रोज़ेदार के लिए जायज़ कार्य
1
नफ़ल रोज़े
12
ऐतिकाफ़
1
रमज़ान के अंतिम दस दिन
4
रमज़ान
2
2 hadiths
अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सब लोगों से ज़्यादा दानी थे। खासकर रमज़ान में जब जिबरील अलैहिस्सलाम से आपकी मुलाक़ात होती तो और अधिक दानी हो जाते। जिबरील अलैहिस्सलाम रमज़ान में हर रात आपसे मुलाक़ात करते और आप को क़ुरआन मजीद का दौर फ़रमाते। ऐसे में, अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सदक़ा करने में आंधी से भी ज़्यादा द्रुतगामी हो जाते थे।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
عن أبي هريرة أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: «من قام رمضان إيمانًا واحتسابًا غفر له ما تقدم من ذنبه».
متفق عليه