«अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब बिस्तर पर आते, तो फ़रमाया करते : "सारी प्रशंसा उस अल्लाह की है, जिसने हमें खिलाया, पिलाया, पर्याप्ति प्रदान की तथा शरण दी। कितने ऐसे लोग हैं, जिनको न कोई पर्याप्ति प्रदान करने वाला है, न शरण देने वाला।"»
Meaning translation ·
Explanation
The meaning in a few plain lines
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब बिस्तर में जाते, तो यह दुआ पढ़ते थे : "الحمد لله الذي أطعمنا وسقانا وكفانا وآوانا فكم ممن لا كافي له ولا مؤوي" (सारी प्रशंसा उस अल्लाह की है, जिसने हमें खिलाया, पिलाया, पर्याप्ति प्रदान की तथा शरण दी। कितने ऐसे लोग हैं, जिनको न कोई पर्याप्ति प्रदान करने वाला है, न शरण देने वाला।) आपने इसमें सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह की प्रशंसा की है, जिसने यदि तुम्हारे लिए इस भोजन एवं इस पेय का प्रबंध न किया होता, तो तुम्हें न खाने को मिलता और न पीने को। अतः उस अल्लाह की प्रशंसा होनी चाहिए जिसने तुम्हें खाने एवं पीने को दिया। आपके शब्द "पर्याप्ति प्रदान की" का अर्थ है, यानी हमारे लिए सारे कामों को आसान कर दिया और हमें रोज़ी-रोटी के मामले में पर्याप्ति प्रदान की। जबकि "शरण दी" का अर्थ है, हमारे लिए ठिकाना बनाया, जहाँ हम शरण ले सकें। न जाने कितने ऐसे लोग हैं, जिन्हें न कोई प्रयाप्ति प्रदान करने वाला है, न उनके पास कोई ठिकाना है और न उन्हें कोई ठिकाना प्रदान करने वाला है। अतः बिस्तर में जाते समय इस दुआ को पढ़ना चाहिए।