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All hadiths
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पवित्र क़ुरआन तथा उससे संबंधित अन्य विषय
26
हदीस तथा उससे संबंधित अन्य विषय
3
अक़ीदा
135
फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह
288
फ़ज़ीलतें तथा आदाब
288
आह्वान एवं भलाई का आदेश देने तथा बुराई से रोकने का प्रबंध करना
15
सीरत एवं इतिहास
38
655 hadiths
अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अन्हु) अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हुए कहते हैंः “उस दिन जहन्नम लाई जाएगी, जिसकी सत्तर हज़ार लगामें होंगी और प्रत्येक लगाम को सत्तर हज़ार फरिश्ते खींच रहे होंगे।”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सजदे की हालत में यह दुआ किया करते थे : “हे अल्लाह, तू मेरे समस्त पापों को क्षमा कर दे; छोटे-बड़े, अगले-पिछले तथा स्पष्ट-अस्पष्ट सभी को।”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : ”अल्लाह के पास सबसे घृणित व्यक्ति वह है, जो अत्यधिक झगड़ालू तथा हमेशा विवाद में रहने वाला हो।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, उन्होंने कहा : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा गया कि कौन-सी चीज़ लोगों को जन्नत में सबसे अधिक प्रवेश कराएगी, तो आपने कहा : “अल्लाह का डर और अच्छा व्यवहार।” इसी तरह आपसे पूछा गया कि कौन-सी चीज़ लोगों को जहन्नम में सबसे अधिक प्रवेश कराएगी, तो आपने कहा : “मुँह और गुप्तांग।”
इसे तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः “शेष रहने वाली नेक चीज़ें हैंः ला इलाहा इल्लल्लाह (अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं है), सुबहान अल्लाह (अल्लाह पाक है), अल्लाहु अकबर (अल्लाह सबसे बड़ा है) अल-हम्दुलिल्लाह (समस्त प्रकार की प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है) तथा ला ह़ौला व ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह (अल्लाह की मदद बिना न हालात बदलने की ताक़त है और न कुछ करने का साहस)।”
इसे इब्ने ह़िब्बान ने रिवायत किया है । - इसे ह़ाकिम ने रिवायत किया है। - इसे नसाई ने रिवायत किया है।
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अज़ान तथा इक़ामत के बीच की जाने वाली दुआ रद्द नहीं होती।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और नसई ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "ऐ अल्लाह! मेरे लिए मेरे धर्म को सुधार दे, जो मेरे मामले का संरक्षण है और मेरे लिए मेरी दुनिया को सुधार दे, जिसके अंदर मेरी जीविका है, और मेरे लिए मेरी आख़िरत को सुधार दे, जहाँ मुझे लौटना है। तथा मेरे लिए जीवन को प्रत्येक भलाई में वृद्धि का कारण बना दे और मृत्यु को मेरे लिए प्रत्येक बुराई से मोक्ष का कारण बना दे।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू मूसा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम यह दुआ किया करते थे : "ऐ अल्लाह! मेरे गुनाह, मेरी अज्ञानता, अपने सभी कार्यों में मेरे सीमा का उल्लंघन करने को और हर उस बात को, जिसे तू मुझसे ज़्यादा जानता है, क्षमा कर दे। ऐ अल्लाह! मेरे गुनाहों, मुझसे जान-बूझकर होने वाली कोताहियों, अनजाने में होने वाली ग़लतियों और हंसी-मज़ाक़ में होने वाली त्रुटियों को क्षमा कर दे। इनमें से हर प्रकार की त्रुटियाँ मुझसे हुई हैं। ऐ अल्लाह! मेरे अगले और पिछले, छिपाकर होने वाले और दिखाकर होने वाले गुनाहों को क्षमा कर दे। तू ही आगे करने वाला है, तू ही पीछे करने वाला है और तू हर बात की क्षमता रखने वाला है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सुबह और शाम के समय इन दुआओं को पढ़ना नहीं छोड़ते थे : "ऐ अल्लाह! मैं तुझसे दुनिया एवं आख़िरत में सुरक्षा माँगता हूँ। ऐ अल्लाह! मैं तुझसे अपने धर्म, अपने संसार, अपने परिवार और अपने धन के संबंध में क्षमा एवं सुरक्षा माँगता हूँ। ऐ अल्लाह! मेरी त्रुटियों को छुपा दे और मुझे भय से सुरक्षा प्रदान कर। ऐ अल्लाह! तू मेरी, मेरे आगे, मेरे पीछे, मेरे दाएँ, मेरे बाएँ और मेरे ऊपर से रक्षा कर। मैं इस बात से तेरी महानता की शरण में आता हूँ कि मुझे नीचे से धर दबोचा जाए।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, नसई, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जो दुआएँ किया करते थे, उनमें से एक यह है : "ऐ अल्लाह! मैं तेरी नेमत के छिन के जाने, (विपत्ति में) तेरी प्रदान की हुई सुरक्षा के बदल जाने, तेरी अचानक आपदा तथा तेरे हर प्रकार के क्रोध से तेरी शरण चाहता हूँ।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम इन शब्दों द्वारा दुआ किया करते थे : "ऐ अल्लाह! मैं तेरी शरण माँगता हूँ क़र्ज़ के बोझ तथा शत्रुओं के हावी होने और दुश्मनों के हँसने से।"
इसे नसई और अह़मद ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से वर्णित है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायः “वह मोमिन जो लोगों से मेल-जोल रखता है तथा उनकी ओर से मिलने वाली यातनाओं पर सब्र करता है, उस मोमिन से अच्छा है, जो लोगों से मेल-जोल नहीं रखता तथा उनकी यातनाओं पर सब्र नहीं करता।”
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : “शक्तिशाली मोमिन कमज़ोर मोमिन के मुकाबले में अल्लाह के समीप अधिक बेहतर तथा प्रिय है, किंतु प्रत्येक के अंदर भलाई है। जो चीज तुम्हारे लिए लाभदायक हो, उसके लिए तत्पर रहो और अल्लाह की मदद मांगो तथा असमर्थता न दिखाओ। फिर यदि तुम्हें कोई विपत्ति पहुँचे, तो यह न कहो कि यदि मैंने ऐसा किया होता, तो ऐसा और ऐसा होता। बल्कि यह कहो कि "قدر الله وما شاء فعل" (अर्थात् अल्लाह तआला ने ऐसा ही भाग्य में लिख रखा था और वह जो चाहता है, करता है।) क्योंकि ‘अगर’ शब्द शैतान के कार्य का द्वार खोलता है।”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः“एक मोमिन अपने दूसरे मोमिन भाई का आईना है।”
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।
अबू दरदा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है : "बहुत ज़्यादा लानत करने वाले क़यामत के दिन गवाही देने वाले और सिफ़ारिश करने वाले नहीं होंगे।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
नोमान बिन बशीर रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, उन्होंने कहा : मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : “दुआ ही इबादत है।” फिर यह आयत पढ़ी : "तथा तुम्हारे रब ने कहा है : तुम मुझे पुकारो, मैं तुम्हारी प्रार्थना स्वीकार करूँगा। निःसंदेह जो लोग मेरी इबादत से अहंकार करते हैं, वे शीघ्र ही अपमानित होकर जहन्नम में प्रवेश करेंगे।" [सूरा ग़ाफ़िर : 60]
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
अयाज़ बिन हिमार (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः “अल्लाह तआला ने मेरी ओर वह़्य की है कि तुम लोग विनम्रता धारण करो, यहाँ तक कि कोई किसी पर अत्याचार न करे और न कोई किसी को घमंड दिखाए।”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अनस रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम सर्वाधिक जो दुआ करते थे वह यह है : “हे अल्लाह, हमारे रब, हमें दुनिया में भी अच्छी दशा प्रदान कर और आख़िरत में भी अच्छी दशा प्रदान कर और हमें जहन्नम की यातना से बचा ले।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
शद्दाद बिन औस रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : “सय्यदुल इस्तिग़फार (सर्वश्रेष्ठ क्षमायाचना) यह है कि बंदा इस प्रकार कहे : ऐ अल्लाह, तू ही मेरा रब है। तेरे सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है। तू ने ही मेरी रचना की है और मैं तेरा बंदा हूँ। मैं तुझसे की हुई प्रतिज्ञा एवं वादे को हर संभव पूरा करने का प्रयत्न करूँगा। मैं अपने कर्म की बुराई से तेरी शरण चाहता हूँ। मैं तेरी ओर से दी जाने वाली नेमतों (अनुग्रहों) का तथा अपनी ओर से किए जाने वाले पापों का इक़रार करता हूँ। तू मुझे माफ कर दे, क्योंकि तेरे सिवा पापों को क्षमा करने वाला कोई नहीं।” आपने कहा : "जिसने इसे विश्वास के साथ दिन में कहा और उसी दिन शाम से पहले मर गया, वह जन्नतवासी है। और जिसने इसे विश्वास के साथ रात में कहा और सुबह होने से पहले मर गया, वह जन्नतवासी है।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : “सच्चाई को मज़बूती से थाम लो, क्योंकि सच्चाई नेकी (सुकर्म) की राह दिखाती है और नेकी जन्नत की ओर ले जाती है। आदमी सर्वदा सत्य बोलता है तथा सत्य की खोज में लगा रहता है, यहाँ तक कि अल्लाह के निकट सत्यवादी लिख लिया जाता है। तुम झूठ बोलने से बचो, क्योंकि झूठ बुराई की ओर ले जाता है और बुराई जहन्नम की ओर ले जाती है। आदमी सदा झूठ बोलता रहता है तथा झूठ ही की खोज में लगा रहता है, यहाँ तक कि अल्लाह के यहाँ झूठा लिख लिया जाता है।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : दो शब्द रहमान (अल्लाह) को बड़े प्रिय हैं, ज़ुबान पर बड़े हलके हैं और तराज़ू में बड़े भारी होंगे : सुबहानल्लाहिल अज़ीम, सुबहानल्लाहि व बिहम्दिहि (अल्लाह पाक है अपनी प्रशंसा समेत, पाक है अल्लाह जो बड़ा महान है)।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : “अल्लाह के निकट दुआ से अधिक सम्मानित कोई चीज नहीं है।”
इसे तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : “सदक़ा करने से किसी का माल कम नहीं होता है, बंदो को क्षमा करने से अल्लाह माफ़ करने वाले के आदर-सम्मान को और बढ़ा देता है और जो व्यक्ति अल्लाह के लिए विनम्रता धारण करता है, अल्लाह उसका स्थान ऊँचा कर देता है।”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू दरदा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : “जो अपने भाई की मान-सम्मान की रक्षा करेगा, क़यामत के दिन अल्लाह जहन्नम की अग्नि से उसकी रक्षा करेगा।”
इसे तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया है
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