Hadith for the World
फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह

परिवार से संबंधित फ़िक़्ह

24 hadiths

24 hadiths

अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "निश्चय ही दुनिया मीठी और हरी-भरी है और अल्लाह तुम्हें उसमें उत्तराधिकारी बनाने वाला है, ताकि देख सके कि तुम किस तरह के काम करते हो। अतः, दुनिया से बचो एवं स्त्रियों से बचो। क्योंकि बनू इसराईल की पहली परीक्षा स्त्रियों ही के विषय में थी।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "कोई मोमिन पुरुष किसी मोमिन स्त्री से नफ़रत न करे। यदि वह उसके किसी काम को नापसंद करता है, तो उसके किसी दूसरे (अथवा अन्य) काम को पसंद करेगा।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है कि उन्होंने अता बिन अबू रबाह से कहाः क्या मैं तुम्हें जन्नती स्त्रियों में से एक स्त्री न दिखाऊँ? अता कहते हैं कि मैंने कहाः अवश्य दिखाएँ। उन्होंने कहाः यह काली-कलोटी स्त्री, नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आई और कहने लगीः मुझपर मिर्गी का दौरा पड़ता है और मेरा शरीर खुल जाता है। अतः अल्लाह से मेरे लिए दुआ फ़रमाएँ। आपने कहाः "अगर तुम चाहो, तो सब्र करो, तुम्हें जन्नत मिलेगी और अगर चाहो, तो मैं अल्लाह से तुम्हारे लिए स्वास्थ्य लाभ की दुआ कर दूँ।" यह सुनकर उसने कहाः मैं सब्र करूँगी। फिर उसने कहाः मेरा शरीर खुल जाता है। अतः, अल्लाह से दुआ करें कि मेरा शरीर न खुले। चुनांचे आपने उसके लिए दुआ फ़रमाई।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू सईद ख़दरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हुए कहते हैंः "क़यामत के दिन अल्लाह के निकट सबसे बुरे लोगों में वह पुरुष भी शामिल होगा, जो अपनी पत्नी के पास जाए और उसकी पत्नी उसके पास आए, फिर वह अंदर की बातों को बाहर फैलाता फिरे।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू शुरैह ख़ुवैलिद बिन अम्र और अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहुमा) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "ऐ अल्लाह, मैं लोगों को दो कमज़ोरों के हक़ को नष्ट करने से डराता हूँ; यतीम तथा स्त्री।"इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "रिश्तों-नातों को निभाने वाला वह नहीं है जो एहसान के बदले एहसान करे, बल्कि असल रिश्तों-नातों को निभाने वाला वह है जो उससे संबंध विच्छेद किए जाने के बावजूद उसे जोड़े।"इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से वर्णित है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायः “वह मोमिन जो लोगों से मेल-जोल रखता है तथा उनकी ओर से मिलने वाली यातनाओं पर सब्र करता है, उस मोमिन से अच्छा है, जो लोगों से मेल-जोल नहीं रखता तथा उनकी यातनाओं पर सब्र नहीं करता।”इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, उन्होंने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "सबसे सम्पूर्ण ईमान वाला व्यक्ति वह है, जो सबसे अच्छे आचरण वाला हो और तुम्हारे अंदर सबसे उत्तम व्यक्ति वह है, जो अपनी पत्नियों के हक़ में सबसे अच्छा हो।"इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "दुनिया एक क्षणिक उपभोग की वस्तु है और उसकी सर्वश्रेठ वस्तु नेक स्त्री है।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अल्लाह फ़रमाता है : ऐ आदम की संतान! व्यय (खर्च) करो, तुमपर व्यय किया जाएगा।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
उक़बा बिन आमिर जुहनी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "तुम लोग औरतों के यहाँ प्रवेश करने से बचो।" यह सुन एक अंसारी व्यक्ति ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! पति के निकट के रिश्तेदार (पति के भाई एवं चचेरे भाई आदि) के बारे में आप क्या फ़रमाते हैं? आपने फ़रमाया : "पति का निकट का रिश्तेदार तो मौत है।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
असवद बिन यज़ीद कहते हैं कि आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) से प्रश्न किया गया कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) घर में क्या करते थे? उन्होंने कहाः आप अपने घर वालों की सेवा में लगे रहते और जब नमाज़ का समय आ जाता, तो नमाज़ के लिए चले जाते थे।इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
अबू मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जब कोई आदमी अपने घर वालों पर, नेकी व सवाब की उम्मीद रखते हुए खर्च करता है, तो यह उसके लिए सदक़ा होता है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू सईद खु़दरी (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है कि एक महिला अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आई और उसने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! मर्द लोग आपकी हदीस लेकर चले गए। इसलिए आप हमारे लिए भी एक दिन निर्धारित कर दें, जिसमें हम उपस्थित हों और आप हमें वह चीज़ सिखाएँ जो आपको अल्लाह ने सिखाई है। आप ने फ़रमाया: फ़लाँ फ़लाँ दिन तुम लोग एकत्रित हो जाओ। वायदे के मुताबिक, औरतें एकत्रित हो गईं और अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उनके पास आए और उन्हें अल्लाह की सिखाई हुई बातों में से कुछ सिखाया, फिर फ़रमाया: तुममें से जिस महिला की तीन संतानें मर जाएँ, वह उसके लिए जहन्नम से आड़ बन जाती हैं। इस पर एक महिला ने पूछा: और यदि दो मरें तो? अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: यदि दो मरें तो भी।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने औरत का वस्त्र पहनने वाले मर्द पर और मर्द का वस्त्र पहनने वाली औरत पर लानत फ़रमाई है।इसे नसई ने अल-सुनन अल-कुबरा में तथा इब्न-ए-माजह ने समान अर्थ में एवं अह़मद ने रिवायत किया है
इब्ने उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) से वर्णित है, कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक बालक को देखा, जिसके कुछ बाल मुंडवाए हुए थे और कुछ छोड़े हुए थे। इसपर आपने उन्हें ऐसा करने से मना किया और कहा: पूरे बाल मुंडवा लो अथवा पूरे को छोड़ दो।इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।
अबू सईद खु़दरी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ईद अल-अज़हा या ईद अल-फ़ित्र के दिन ईदगाह की ओर निकले और इस दौरान औरतों के निकट से गुज़रे, तो फ़रमाया : "ऐ औरतो! तुम सदक़ा किया करो, क्योंकि मैंने जहन्नम के अंदर तुम्हारी संख्या अधिक देखी है।" औरतों ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! ऐसा क्यों है? आपने उत्तर दिया : "तुम लानत अधिक करती हो और पति की नाशुक्री करती हो। मैंने विवेक एवं दीन में अधूरी होने के बावजूद तुम (औरतों) से ज़्यादा किसी को भी एक विवेकशील व्यक्ति के विवेक को भ्रमित कर देने वाला नहीं देखा।" औरतों ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! हमारे दीन और हमारे विवेक की कमी क्या है? आपने उत्तर दिया : "क्या औरत की गवाही मर्द की आधी गवाही के बराबर नहीं है?" उन्होंने कहा : जी है। आपने कहा : "यही उसके विवेक की कमी को दर्शाता है। क्या ऐसा नहीं है कि जब औरत माहवारी की अवस्था में होती है, तो न नमाज़ पढ़ सकती है, न रोज़ा रख सकती है?" औरतों ने कहा : जी, ऐसा तो है। आपने फ़रमाया : "यही उसके दीन की कमी को दर्शाता है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
उक़बा बिन आमिर (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "सबसे अच्छा निकाह वह है, जो सबसे आसान हो।" तथा नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक व्यक्ति से कहाः "क्या तुम्हें यह पसंद होगा कि मैं अमुक स्त्री से तुम्हारा निकाह कर दूँ?" उसने कहाः हाँ! आपने उस महिला से भी कहाः "क्या तुम्हें पसंद होगा कि मैं अमुक पुरुष से तुम्हारा निकाह कर दूँ?" उसने भी कहाः हाँ! तो आपने दोनों का निकाह महर तय किए बिना ही कर दिया। फिर उसने वैवाहिक जीवन आरंभ करते समय भी अपनी पत्नी को कुछ नहीं दिया। लेकिन, जब मरने लगा, तो बोलाः अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अमुक स्त्री से मेरा निकाह कराया था और मैंने उसे कुछ नहीं दिया था। अतः, अब उसे ख़ैबर का अपना हिस्सा देता हूँ। चुनांचे, उसका ख़ैबर का जो हिस्सा था, उसे उसकी पत्नी ने उससे लेकर बेचा, तो उसकी क़ीमत एक लाख हुई।इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।
عن ابن عباس رضي الله عنهما أنه سمع النبي صلى الله عليه وسلم يقول: «لا يَخْلُوَنَّ رجلٌ بامرأةٍ، ولا تسافِرَنَّ امرأةٌ إلا ومعها محرمٌ»، فقام رجل فقال: يا رسول الله، ‌اكتتبت في غزوة كذا وكذا، وخرجت امرأتي حاجة، قال: «اذهب فحج مع امرأتك».متفق عليه
عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «‌تُنْكَحُ المَرْأَةُ لِأَرْبَعٍ: لِمَالِهَا وَلِحَسَبِهَا وَجَمَالِهَا وَلِدِينِهَا، فَاظْفَرْ بِذَاتِ الدِّينِ، تَرِبَتْ يَدَاكَ».متفق عليه
عَنْ عَبْدِ اللهِ بْنِ عَبَّاسٍ أَنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ رَأَى خَاتَمًا مِنْ ذَهَبٍ فِي يَدِ رَجُلٍ، فَنَزَعَهُ فَطَرَحَهُ، وَقَالَ: «يَعْمِدُ أَحَدُكُمْ إِلَى جَمْرَةٍ مِنْ نَارٍ، فَيَجْعَلُهَا فِي يَدِهِ»، فَقِيلَ لِلرَّجُلِ بَعْدَ مَا ذَهَبَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: خُذْ خَاتِمَكَ انْتَفِعْ بِهِ، قَالَ: لَا وَاللهِ، لَا آخُذُهُ أَبَدًا وَقَدْ طَرَحَهُ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ.رواه مسلم
عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُمَا قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «إِذَا كَانَ جُنْحُ اللَّيْلِ أَوْ أَمْسَيْتُمْ فَكُفُّوا صِبْيَانَكُمْ، فَإِنَّ الشَّيَاطِينَ تَنْتَشِرُ حِينَئِذٍ، فَإِذَا ذَهَبَ سَاعَةٌ مِنَ اللَّيْلِ فَحُلُّوهُمْ، فَأَغْلِقُوا الأَبْوَابَ وَاذْكُرُوا اسْمَ اللَّهِ، فَإِنَّ الشَّيْطَانَ لاَ يَفْتَحُ بَابًا مُغْلَقًا، وَأَوْكُوا قِرَبَكُمْ وَاذْكُرُوا اسْمَ اللَّهِ، وَخَمِّرُوا آنِيَتَكُمْ وَاذْكُرُوا اسْمَ اللَّهِ، وَلَوْ أَنْ تَعْرُضُوا عَلَيْهَا شَيْئًا، وَأَطْفِئُوا مَصَابِيحَكُمْ».متفق عليه
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "अल्लाह तुम्हारे लिए तीन बातों को पसंद करता है और तुम्हारे लिए तीन बातों को नापसंद करता है। उसे तुम्हारे लिए पसंद है कि: तुम केवल उसी की इबादत करो, किसी को उसका साझी न बनाओ और सब मिलकर अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से पकड़ लो और बिखराव का शिकार होने से बचो। जबकि उसे तुम्हारे लिए नापसंद है: बेकार की बातें करना, बहुत ज़्यादा प्रश्न करन और धन बर्बाद करन।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
عَنْ أَبِي مُوسَى عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «إِنَّ المُؤْمِنَ لِلْمُؤْمِنِ كَالْبُنْيَانِ يَشُدُّ بَعْضُهُ بَعْضًا» وَشَبَّكَ أَصَابِعَهُ.متفق عليه