HI
परिवार से संबंधित फ़िक़्ह
मुस्लिम समाज
4 hadiths
निकाह
5
बाल-बच्चों आदि का खर्च
2
वस्त्र तथा शोभा
3
मुस्लिम समाज
4
स्त्रियों से संबंधित अहकाम
10
नवजात शिशु से संबंधित अहकाम
1
4 hadiths
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "रिश्तों-नातों को निभाने वाला वह नहीं है जो एहसान के बदले एहसान करे, बल्कि असल रिश्तों-नातों को निभाने वाला वह है जो उससे संबंध विच्छेद किए जाने के बावजूद उसे जोड़े।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से वर्णित है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायः “वह मोमिन जो लोगों से मेल-जोल रखता है तथा उनकी ओर से मिलने वाली यातनाओं पर सब्र करता है, उस मोमिन से अच्छा है, जो लोगों से मेल-जोल नहीं रखता तथा उनकी यातनाओं पर सब्र नहीं करता।”
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "अल्लाह तुम्हारे लिए तीन बातों को पसंद करता है और तुम्हारे लिए तीन बातों को नापसंद करता है। उसे तुम्हारे लिए पसंद है कि: तुम केवल उसी की इबादत करो, किसी को उसका साझी न बनाओ और सब मिलकर अल्लाह की रस्सी को मज़बूती से पकड़ लो और बिखराव का शिकार होने से बचो। जबकि उसे तुम्हारे लिए नापसंद है: बेकार की बातें करना, बहुत ज़्यादा प्रश्न करन और धन बर्बाद करन।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
عَنْ أَبِي مُوسَى عَنِ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «إِنَّ المُؤْمِنَ لِلْمُؤْمِنِ كَالْبُنْيَانِ يَشُدُّ بَعْضُهُ بَعْضًا» وَشَبَّكَ أَصَابِعَهُ.
متفق عليه