HI
उसूल-ए-फ़िक़्ह
दो प्रमाणों के बीच टकराव तथा तरजीह
1 hadiths
शरई निर्णय
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शब्दों का अर्थों से संबंध तथा अहकाम एवं मसायल निकालने का तरीक़ा
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दो प्रमाणों के बीच टकराव तथा तरजीह
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शरीयत के उद्देश्य
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अबुल हौरा सादी कहते हैं : मैंने हसन बिन अली रज़ियल्लाहु अनहुमा से पूछा : आपने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से क्या याद किया है? उन्होंने उत्तर दिया : मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से यह याद किया है : "जो चीज़ तुम्हें संदेह में डाले, उसे छोड़कर वह अख़्तियार करो, जो संदेह में न डाले। क्योंकि सच्चाई इत्मीनान है और झूठ शक व शुबह है।"
इसे तिर्मिज़ी, नसई और अह़मद ने रिवायत किया है