HI
फ़ज़ीलतें तथा आदाब
सद्व्यवहार पर आधारित फ़िक़्ह
56 hadiths
सरहनायोग्य आचरण
35
कुत्सित आचरण
21
56 hadiths
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "दया करने वालों पर दयावान अल्लाह दया करता है। तुम ज़मीन वालों पर दया करो, आकाश वाला तुमपर दया करेगा।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया है
हिशाम बिन हकीम बिन हिज़ाम (रज़ियल्लाहु अनहुमा) से वर्णित है कि वह शाम में कुछ नब्तियों के पास से गुज़रे, जिन्हें धूप में खड़ा किया गया था और उनके सिरों पर तेल डाला गया था। तो उन्होंने कहा: यह क्या है? कहा गया: टैक्स न देने के कारण सज़ा दी जा रही है। तो हिशाम ने कहा: मैं गवाही देता हूँ कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुना है: बेशक अल्लाह तआला उन लोगों को -क़यामत के दिन- यातना देगा जो दुनिया में लोगों को यातना देते हैं। फिर वहाँ के मेयर के पास गए और उनसे बात की, तो उसने उन्हें छोड़ने का आदेश दिया।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "एक मर्द दूसरे मर्द के गुप्तांग और एक महिला दूसरी महिला के गुप्तांग को न देखे और न ही दो मर्द एक ही कपड़े में लेटें और न दो महिलाएँ एक कपड़े में लेटें।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मुसलमान वह है, जिसकी ज़बान और हाथ से मुसलमान सुरक्षित रहें और मुहाजिर वह है, जो अल्लाह की मना की हुई चीज़ें छोड़ दे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जिसने जान-बूझकर मुझपर झूठ बोला, वह अपना ठिकाना जहन्नम बना ले।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
عَن أَبي هُرَيْرَةَ، قَالَ: قَامَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ فِي صَلاَةٍ وَقُمْنَا مَعَهُ، فَقَالَ أَعْرَابِيٌّ وَهُوَ فِي الصَّلاَةِ: اللَّهُمَّ ارْحَمْنِي وَمُحَمَّدًا، وَلاَ تَرْحَمْ مَعَنَا أَحَدًا. فَلَمَّا سَلَّمَ النَّبِيُّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ لِلْأَعْرَابِيِّ: «لَقَدْ حَجَّرْتَ وَاسِعًا» يُرِيدُ رَحْمَةَ اللهِ.
رواه البخاري
عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: سَمِعْتُ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «إِنَّ اللَّهَ قَالَ: إِذَا ابْتَلَيْتُ عَبْدِي بِحَبِيبَتَيْهِ فَصَبَرَ، عَوَّضْتُهُ مِنْهُمَا الجَنَّةَ» يُرِيدُ: عَيْنَيْهِ.
رواه البخاري
أَنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَرَّ عَلَى صُبْرَةِ طَعَامٍ فَأَدْخَلَ يَدَهُ فِيهَا، فَنَالَتْ أَصَابِعُهُ بَلَلًا فَقَالَ: «مَا هَذَا يَا صَاحِبَ الطَّعَامِ؟» قَالَ أَصَابَتْهُ السَّمَاءُ يَا رَسُولَ اللهِ، قَالَ: «أَفَلَا جَعَلْتَهُ فَوْقَ الطَّعَامِ كَيْ يَرَاهُ النَّاسُ؟ @مَنْ غَشَّ فَلَيْسَ مِنِّي».
رواه مسلم
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