Hadith for the World
शरई आदाब

बात करने तथा चुप रहने के आदाब

12 hadiths

12 hadiths

मिक़दाम बिन मादीकरिब रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जब कोई अपने भाई से मोहब्बत रखे, तो उसे बता दे कि वह उससे मोहब्बत रखता है।"इसे अबू दावूद ने, तिर्मिज़ी ने तथा नसई ने अल-सुनन अल-कुबरा में एवं अह़मद ने रिवायत किया है
जुंदुब बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "एक व्यक्ति ने कहाः अल्लाह की क़सम, अल्लाह अमुक व्यक्ति को क्षमा नहीं करेगा, तो अल्लाह ने कहाः यह कौन होता है मुझपर क़सम उठाने वाला कि मैं अमुक व्यक्ति को क्षमा नहीं करूँगा? मैंने उसे क्षमा कर दिया और तेरे कर्मों को व्यर्थ कर दिया।" तथा एक हदीस में है कि ऐसा कहने वाला एक सदाचारी बंदा था। अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि उसने एक बात ऐसी कह दी कि उसकी दुनिया एवं आख़िरत चौपट हो गई।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि उन्होंने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुनाः बंदा एक बात करता है और उसमें सोच-विचार नहीं करता, जिसके कारण वह जहन्नम के गढ़े में उससे कहीं अधिक दूर जा गिरता है, जितनी दूरी पूरब और पश्चिम के बीच में है।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "बंदा अल्लाह तआला को प्रसन्न करने वाली कोई बात करता है और उसे कोई महत्व नहीं देता, परन्तु उसके कारण अल्लाह उसकी श्रेणियों को बढ़ा देता है। इसी तरह, बंदा अल्लाह तआला को नाराज़ करने वाली कोई बात करता है और उसे कोई महत्व नहीं देता, परन्तु उसके कारण जहन्नम में गिर जाता है।" तथा अबू अब्दुर रहमान बिलाल बिन हारिस मुज़नी- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "बंदा अल्लाह तआला को प्रसन्न करने वाली कोई बात मुँह से निकालता है, वह नहीं समझता कि वह बात उतनी महत्वपूर्ण है, जितनी कि वास्तविक रूप से है, अल्लाह उसके कारण अपने उस बंदे के लिए मिलने के दिन तक अपनी प्रसन्नता लिख देता है। इसी तरह, बंदा अल्लाह को नाराज़ करने वाली कोई बात कह देता है, उसे अंदाज़ा नहीं होता कि वह बात वहाँ तक पहुँच सकती है, जहाँ तक सचमुच पहुँच चुकी है, अल्लाह उसके कारण अपने उस बंदे के लिए मिलने के दिन तक अपनी नाराज़गी लिख देता है।"इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है। - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे मालिक ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "क्या तुम जानते हो कि ग़ीबत (चुग़लखोरी-पिशुनता) क्या है?" सहाबा ने कहा : अल्लाह और उसका रसूल अधिक जानते हैं। फ़रमाया : "तेरा अपने भाई की चर्चा ऐसी बात से करना, जो उसे पसंद न हो।" सहाबा ने पूछा : आपका क्या विचार है, यदि वह बात जो मैं कहता हूँ, सच-मुच मेरे भाई में हो? फ़रमाया : "यदि वह बात उसमें है, जो तुम कहते हो, तो तुमने उसकी चुग़लखोरी की और यदि नहीं है, तो तुमने उसपर झूठा आरोप लगाया।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस (रज़ियल्लाहु अंहुमा) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "बड़े पापों में से एक यह है कि आदमी अपने माता-पिता को गाली दे।" कहा गया कि क्या आदमी अपने माता-पिता को गाली दे सकता है? तो फ़रमायाः "हाँ, आदमी किसी के बाप को गाली दे, तो वह उसके बाप को गाली दे और आदमी किसी की माँ को गाली दे, तो वह उसकी माँ को गाली दे।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जिसने यह कहकर क़सम खाई कि लात तथा उज़्ज़ा की क़सम, वह 'ला इलाहा इल्लल्लाह' कहे और जिसने अपने साथी से कहा कि आओ हम जुआ खेलें, वह सद्क़ा करे।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है कि रसूलुल्लाह -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फरमाया : "किसी सच्चे आदमी को यह शोभा नहीं देता कि वह अत्यधिक लानत करने वाला हो।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जब कोई आदमी कहे कि लोग हलाक व बर्बाद हो गए, तो वह सबसे अधिक हलाक व बर्बाद होने वाला है।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मुसलमान वह है, जिसकी ज़बान और हाथ से मुसलमान सुरक्षित रहें और मुहाजिर वह है, जो अल्लाह की मना की हुई चीज़ें छोड़ दे।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह ने कहा है : "आदम की संतान मुझे कष्ट देती है। वह ज़माने को गाली देती है। जबकि मैं ही ज़माने (का मालिक) हूँ। मामला मेरे हाथ में है, मैं ही रात और दिन को पलटता हूँ।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
عَنْ عَائِشَةَ أَنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ: «اهْجُوا قُرَيْشًا، فَإِنَّهُ أَشَدُّ عَلَيْهَا مِنْ رَشْقٍ بِالنَّبْلِ»، فَأَرْسَلَ إِلَى ابْنِ رَوَاحَةَ، فَقَالَ: «اهْجُهُمْ» فَهَجَاهُمْ فَلَمْ يُرْضِ، فَأَرْسَلَ إِلَى كَعْبِ بْنِ مَالِكٍ، ثُمَّ أَرْسَلَ إِلَى حَسَّانَ بْنِ ثَابِتٍ، فَلَمَّا دَخَلَ عَلَيْهِ، قَالَ حَسَّانُ: قَدْ آنَ لَكُمْ أَنْ تُرْسِلُوا إِلَى هَذَا الْأَسَدِ الضَّارِبِ بِذَنَبِهِ، ثُمَّ أَدْلَعَ لِسَانَهُ فَجَعَلَ يُحَرِّكُهُ، فَقَالَ: وَالَّذِي بَعَثَكَ بِالْحَقِّ لَأَفْرِيَنَّهُمْ بِلِسَانِي فَرْيَ الْأَدِيمِ، فَقَالَ رَسُولُ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «لَا تَعْجَلْ، فَإِنَّ أَبَا بَكْرٍ أَعْلَمُ قُرَيْشٍ بِأَنْسَابِهَا، وَإِنَّ لِي فِيهِمْ نَسَبًا، حَتَّى يُلَخِّصَ لَكَ نَسَبِي» فَأَتَاهُ حَسَّانُ ثُمَّ رَجَعَ، فَقَالَ: يَا رَسُولَ اللهِ، قَدْ لَخَّصَ لِي نَسَبَكَ، وَالَّذِي بَعَثَكَ بِالْحَقِّ لَأَسُلَّنَّكَ مِنْهُمْ كَمَا تُسَلُّ الشَّعْرَةُ مِنَ الْعَجِينِ. قَالَتْ عَائِشَةُ: فَسَمِعْتُ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ، يَقُولُ لِحَسَّانَ: «إِنَّ رُوحَ الْقُدُسِ لَا يَزَالُ يُؤَيِّدُكَ، مَا نَافَحْتَ عَنِ اللهِ وَرَسُولِهِ»، وَقَالَتْ: سَمِعْتُ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ يَقُولُ: «هَجَاهُمْ حَسَّانُ فَشَفَى وَاشْتَفَى» قال حسان: هجوتَ محمَّدًا فأجبتُ عنه ... وعندَ الله في ذاك الجزاءُ هجوتَ محمَّدًا بَرًّا حنيفا ... رسولُ الله شيمتُه الوفاءُ فإنَّ أبي ووالدَه وعِرْضي ... لِعِرْضِ محمَّدٍ منكم وقاءُ ثَكِلْتُ بُنَيَّتِي إلم تَرَوها ... تُثِيرُ النَّقعَ من كَنَفَي كَداءِ يُبارِيْنَ الأَعِنَّةَ مُصْعِداتٍ ... على أكتافها الأَسَلُ الظِّماءُ تظلُّ جيادُنا مُتَمَطِّراتٌ ... تُلَطِّمُهُنَّ بالخمرِ النساءُ فإن أعرضتُمُو عنَّا اعتمرنا ... وكان الفتح وانكشف الغطاءُ وإلا فاصبروا لِضِراب يومٍ ... يُعِزُّ اللهُ فيه مَن يشاءُ وقال الله: قد أرسلت عبدًا ... يقولُ الحقَّ ليس به خفاء وقال الله: قد يَسَّرْتُ جُندًا ... همُ الأنصار عُرْضَتُها اللِّقاءُ لنا في كلِّ يومٍ من مَعَدٍّ ... سبابٌ أو قتالٌ أو هجاءُ فمَنْ يهجو رسولَ الله منكم ... ويمدحُهُ وينصرُهُ سواءُ؟ وجبريلٌ رسولُ الله فينا ... وروحُ القُدْسِ ليس له كِفَاءُ.رواه مسلم