Hadith for the World
फ़ज़ीलतें तथा आदाब

शरई आदाब

67 hadiths

67 hadiths

अब्दुर रहमान बिन अबू लैला से रिवायत है कि वह हुज़ैफ़ा रज़ियल्लाहु अनहु के पास मौजूद थे कि उसी दौरान उन्होंने पीने के लिए पानी माँगा तो एक मजूसी ने पानी प्रस्तुत किया। जब उसने पानी का प्याला उनके हाथ में रखा, तो उन्होंने उसे उसी प्याले से मार दिया और फ़रमाया : अगर मैंने इसे एक-दो बार (सोने एवं चाँदी के बर्तन के प्रयोग से) मना न किया होता, तो मैं ऐसा न करता। मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को फ़रमाते हुए सुना है : "न रेशम पहनो और न दीबाज (मोटे रेशमी वस्त्र)। न सोने-चाँदी के बरतन में पियो और न उनकी थाली में खाओ। क्योंकि यह वस्तुएँ दुनिया में उन (काफ़िरों) के लिए हैं और आख़िरत में हमारे लिए।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
उमर रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जिसने दुनिया में रेशमी वस्त्र पहना, वह उसे आख़िरत में नहीं पहनेगा।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू वाक़िद हारिस बिन औफ़ (रज़ियल्लाहु अनहु) सेे रिवायत है कि एक बार अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मस्जिद में लोगों के साथ बैठे थे कि इतने में तीन आदमी आए। उनमें से दो लोग अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए और एक वापस चला गया। जो दो व्यक्ति अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आए, उनमें से एक मज्लिस में एक खाली स्थान देखकर बैठ गया और दूसरा लोगों के पीछे जाकर बैठा। रही बात तीसरे की, तो वह उलटे पाँव वापस हो गया। जब अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की व्यस्तता समाप्त हुई, तो फ़रमायाः क्या मैं तुम्हें उन तीन व्यक्तियों के बारे में न बताऊँ? उनमें से एक ने अल्लाह की शरण ली, तो अल्लाह ने उसे अपनी शरण दे दी। दूसरा शरमाया, तो अल्लाह ने भी उसकी लाज रख ली। तीसरे ने मुँह फेरा, तो अल्लाह ने भी उससे मुँह फेर लिया।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
मुग़ीरा रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं : मैं एक यात्रा में अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के साथ था। मैंने आपके मोज़े उतारने के लिए हाथ बढ़ाए, तो आपने फ़रमाया : "इन्हें रहने दो; क्योंकि मैंने इन्हें वज़ू की हालत में पहने थे।" फिर आपने उनपर मसह किया।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
मिक़दाम बिन मादीकरिब रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जब कोई अपने भाई से मोहब्बत रखे, तो उसे बता दे कि वह उससे मोहब्बत रखता है।"इसे अबू दावूद ने, तिर्मिज़ी ने तथा नसई ने अल-सुनन अल-कुबरा में एवं अह़मद ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) यात्रा पर निकलने वाले व्यक्ति से कहते थेः मेरे पास आओ, ताकि मैं तुम्हें उसी तरह विदा करूँ, जैसे अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हमें विदा करते थे। आप फ़रमाते थेः "मैं तेरे धर्म, तेरी अमानत और तेरे अंतिम कर्मों को अल्लाह के हवाले करता हूँ।" तथा अब्दुल्लाह बिन यज़ीद ख़तमी (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब सेना को विदा करते, तो फ़रमातेः "मैं तुम्हारे धर्म, तुम्हारी अमानत और तुम्हारे अंतिम कर्मों को अल्लाह के हवाले करता हूँ।"इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
आइशा- रज़ियल्लाहु अन्नान- का वर्णन है कि उन्होंने अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से प्लेग के बारे में पूछा, तो आप ने बताया किः यह अज़ाब था, जिसे अल्लाह जिसर चाहता, भेजता। परन्तु, अल्लाह ने इसे ईमान वालों के लिए अनुकंपा बना दिया है। अतः, जो भी बंदा प्लेग से ग्रस्त हो जाय और धैर्य के साथ तथा सवाब की आशा में अपने नगर में ठहरा रहे, तथा यह विश्वास रखे कि उसे वही पहुँच सकता है, जो अल्लाह ने उसके लिए लिख दिया है, उसे शहीद के बराबर नेकी मिलेगी।"इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "जब तुम वस्त्र धारण करो अथवा वज़ू करो, तो दाहिने ओर से प्रारंभ करो।"इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
जुंदुब बिन अब्दुल्लाह (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "एक व्यक्ति ने कहाः अल्लाह की क़सम, अल्लाह अमुक व्यक्ति को क्षमा नहीं करेगा, तो अल्लाह ने कहाः यह कौन होता है मुझपर क़सम उठाने वाला कि मैं अमुक व्यक्ति को क्षमा नहीं करूँगा? मैंने उसे क्षमा कर दिया और तेरे कर्मों को व्यर्थ कर दिया।" तथा एक हदीस में है कि ऐसा कहने वाला एक सदाचारी बंदा था। अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि उसने एक बात ऐसी कह दी कि उसकी दुनिया एवं आख़िरत चौपट हो गई।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "जब तुममें से कोई छींके, तो 'अल-हम्दु लिल्लाह' (सारी प्रशंसा अल्लाह की हैं) कहे और उसका भाई अथवा उसका साथी 'यरहमुकल्लाह' (अल्लाह तुझपर दया करे) कहे। फिर जब उसका साथी 'यरहमुकल्लाह' कहे, तो वह 'यहदीकुमुल्लाह व युसलिहु बालकुम' (अल्लाह तुम्हें हिदायत दे और तुम्हारा हाल सही कर दे) कहे।"इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "जो किसी बीमार व्यक्ति का हाल जानने जाता है या अपने किसी भाई से अल्लाह के लिए मिलने जाता है, तो एक पुकारने वाला उसे यह कहकर पुकारता है कि तुझे मुबारक हो, तेरा चलकर जाना मुबारक हो और तुझे जन्नत में ठिकाना नसीब हो।"इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब कोई बात कहते, तो तीन बार कहते, ताकि आपकी बात को ठीक से समझ लिया जाए और जब किसी समूह के पास जाते और उन्हें सलाम करते, तो तीन बार सलाम करते।इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि उन्होंने अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुनाः बंदा एक बात करता है और उसमें सोच-विचार नहीं करता, जिसके कारण वह जहन्नम के गढ़े में उससे कहीं अधिक दूर जा गिरता है, जितनी दूरी पूरब और पश्चिम के बीच में है।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जब तुममें से कोई अपने भाई से मिले, तो उसे सलाम करे। फिर, अगर दोनों के बीच पेड़, दीवार या पत्थर आ जाए और वह उससे (दोबारा) मिले, तो फिर उसे सलाम करे।"इसे अबू दावूद ने रिवायत किया है
अबू क़तादा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "अच्छा सपना अल्लाह की ओर से है और बुरा सपना शैतान की ओर से। अतः जब तुम में से कोई व्यक्ति डरावना सपना देखे, तो तीन बार बाएँ ओर थुत्कारे और उस सपने की बुराई से अल्लाह की शरण माँगे,(ऐसा करने से) यह उसकी हानि नहीं करेगा।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "बंदा अल्लाह तआला को प्रसन्न करने वाली कोई बात करता है और उसे कोई महत्व नहीं देता, परन्तु उसके कारण अल्लाह उसकी श्रेणियों को बढ़ा देता है। इसी तरह, बंदा अल्लाह तआला को नाराज़ करने वाली कोई बात करता है और उसे कोई महत्व नहीं देता, परन्तु उसके कारण जहन्नम में गिर जाता है।" तथा अबू अब्दुर रहमान बिलाल बिन हारिस मुज़नी- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "बंदा अल्लाह तआला को प्रसन्न करने वाली कोई बात मुँह से निकालता है, वह नहीं समझता कि वह बात उतनी महत्वपूर्ण है, जितनी कि वास्तविक रूप से है, अल्लाह उसके कारण अपने उस बंदे के लिए मिलने के दिन तक अपनी प्रसन्नता लिख देता है। इसी तरह, बंदा अल्लाह को नाराज़ करने वाली कोई बात कह देता है, उसे अंदाज़ा नहीं होता कि वह बात वहाँ तक पहुँच सकती है, जहाँ तक सचमुच पहुँच चुकी है, अल्लाह उसके कारण अपने उस बंदे के लिए मिलने के दिन तक अपनी नाराज़गी लिख देता है।"इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है। - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे मालिक ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है : एक देहाती अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया और कहा : मुझे कोई ऐसा कर्म बताएँ कि उसे करूँ, तो जन्नत में दाखिल हो जाऊँ। फ़रमाया : "अल्लाह की इबादत करो, किसी को उसका साझी न बनाओ, फ़र्ज़ नमाज़ कायम करो, फ़र्ज़ ज़कात अदा करो और रमज़ान के रोज़े रखो।" उसने कहा : उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, मैं इससे ज़्यादा कुछ नहीं करूँगा। जब वह वापस हुआ, तो अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जो किसी जन्नती व्यक्ति को देखना चाहे, वह इसे देख ले।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैैंनेे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह कहते हुए सुना है : "एक मुसलमान के दूसरे मुसलमान पर पाँच अधिकार हैं; सलाम का उत्तर देना, बीमार व्यक्ति का हाल जानने के लिए जाना, जनाज़े के पीछे चलना, निमंत्रण स्वीकार करना और छींकने वाले का उत्तर देना।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जिसने स्वप्न में मुझे देखा, वह जागते हुए भी मुझे देखेगा या कहा कि मानो, उसने मुझे जागते में देखा, क्योंकि शैतान मेरा रूप धारण नहीं कर सकता।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
वहशी बिन हर्ब- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के कुछ साथियों ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल! हम खाते हैं लेकिन संतुष्ट नहीं होते? आपने कहाः शायद तुम अलग-अलग खाते हो? उन्होंने कहाः हाँ! फ़रमायाः एक साथ जमा होकर खाओ और अल्लाह का नाम लो, तुम्हारे खाने में बरकत दी जाएगी।इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "सवार पैदल चलने वाले को सलाम करेगा, पैदल चलने वाला बैठे हुए को सलाम करेगा और छोटा समूह बड़े समूह को सलाम करेगा।" जबकि सहीह बुख़ारी में है : "छोटा बड़े को सलाम करेगा, गुज़रने वाला बैठे हुए को सलाम करेगा और छोटा समूह बड़े समूह को सलाम करेगा।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "किसी मुसलमान औरत के लिए जायज़ नहीं कि एक दिन एवं एक रात की यात्रा किसी महरम के बिना करे।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कभी किसी खाने में ऐब नहीं निकाला। यदि इच्छा हुई, तो खाया और यदि इच्छा नहीं हुई, तो छोड़ दिया।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू सईद ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जब तुममें से किसी को जमाही आए, तो अपना हाथ मुँह पर रखकर उसे रोके। क्योंकि शैतान अंदर दाख़िल हो जाता है।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है