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शरई आदाब
छींकने तथा उबासी के आदाब
3 hadiths
विद्यावान तथा विद्यार्थी के आदाब
6
पवित्र क़ुरआन की तिलावत के आदाब
1
सलाम करने तथा प्रवेश की अनुमति लेने के आदाब
9
बात करने तथा चुप रहने के आदाब
12
खाने-पीने के आदाब
11
यात्रा के आदाब तथा अहकाम
4
सोने तथा जागने के आदाब
3
स्वप्न से संबंधित आदाब
2
ज़ियारत तथा प्रवेश की अनुमति लेने के आदाब
3
छींकने तथा उबासी के आदाब
3
बीमार का हाल जानने जाने के आदाब
5
परिधान के आदाब
8
3 hadiths
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "जब तुममें से कोई छींके, तो 'अल-हम्दु लिल्लाह' (सारी प्रशंसा अल्लाह की हैं) कहे और उसका भाई अथवा उसका साथी 'यरहमुकल्लाह' (अल्लाह तुझपर दया करे) कहे। फिर जब उसका साथी 'यरहमुकल्लाह' कहे, तो वह 'यहदीकुमुल्लाह व युसलिहु बालकुम' (अल्लाह तुम्हें हिदायत दे और तुम्हारा हाल सही कर दे) कहे।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैैंनेे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह कहते हुए सुना है : "एक मुसलमान के दूसरे मुसलमान पर पाँच अधिकार हैं; सलाम का उत्तर देना, बीमार व्यक्ति का हाल जानने के लिए जाना, जनाज़े के पीछे चलना, निमंत्रण स्वीकार करना और छींकने वाले का उत्तर देना।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू सईद ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जब तुममें से किसी को जमाही आए, तो अपना हाथ मुँह पर रखकर उसे रोके। क्योंकि शैतान अंदर दाख़िल हो जाता है।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है