Hadith for the World
शरई आदाब

बीमार का हाल जानने जाने के आदाब

5 hadiths

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अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "जो किसी बीमार व्यक्ति का हाल जानने जाता है या अपने किसी भाई से अल्लाह के लिए मिलने जाता है, तो एक पुकारने वाला उसे यह कहकर पुकारता है कि तुझे मुबारक हो, तेरा चलकर जाना मुबारक हो और तुझे जन्नत में ठिकाना नसीब हो।"इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैैंनेे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह कहते हुए सुना है : "एक मुसलमान के दूसरे मुसलमान पर पाँच अधिकार हैं; सलाम का उत्तर देना, बीमार व्यक्ति का हाल जानने के लिए जाना, जनाज़े के पीछे चलना, निमंत्रण स्वीकार करना और छींकने वाले का उत्तर देना।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि उन्होंने साबित (रह़िमहुल्लाह) से फ़रमायाः क्या मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के शब्दों के द्वारा तुम्हरा इलाज न करूँ? उन्होंने कहाः अवश्य कीजिए। तब उन्होंने यह दुआ पढ़ीः “ऐ लोगों के रब (पालनहार), तकलीफों तथा रोगों को दूर करने वाले, रोग से मुक्ति प्रदान कर। तेरे सिवा कोई शिफा देने वाला नहीं है। रोग से ऐसा छुटकारा प्रदान कर कि फिर कोई रोग शेष न रहे।”इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
सौबान (रज़ियल्लाहु अन्हु) का वर्णन है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः “जब कोई मुसलमान अपने बीमार भाई का हाल जानने जाता है, तो वापस लौटने तक वह जन्नत के फलों को चुनने में लगा होता है।" लोगों ने पूछाः ऐ अल्लाह के रसूल, (आपके शब्द) "ख़ुरफ़तुल जन्नह" से क्या अभिप्राय है? आपने फरमायाः "जन्नत के फल।”इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अली (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुनाः जब कोई मुस्लिम प्रातः किसी मुस्लिम व्यक्ति की इयादत (बीमारपुरसी) करता है, तो सत्तर हज़ार फ़रिश्ते शाम तक उस के लिए रहमत की प्रार्थना करते हैं। इसी प्रकार, जब कोई शाम को इयादत करता है, तो प्रातः तक फ़रिश्ते उसके लिए रहमत की दुआ करते रहते हैं तथा ऐसे व्यक्ति के लिए जन्नत में चुना हुआ फल है (अर्थात वह जन्नती है)।इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।