Hadith for the World
शरई आदाब

सलाम करने तथा प्रवेश की अनुमति लेने के आदाब

9 hadiths

9 hadiths

अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब कोई बात कहते, तो तीन बार कहते, ताकि आपकी बात को ठीक से समझ लिया जाए और जब किसी समूह के पास जाते और उन्हें सलाम करते, तो तीन बार सलाम करते।इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जब तुममें से कोई अपने भाई से मिले, तो उसे सलाम करे। फिर, अगर दोनों के बीच पेड़, दीवार या पत्थर आ जाए और वह उससे (दोबारा) मिले, तो फिर उसे सलाम करे।"इसे अबू दावूद ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैैंनेे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह कहते हुए सुना है : "एक मुसलमान के दूसरे मुसलमान पर पाँच अधिकार हैं; सलाम का उत्तर देना, बीमार व्यक्ति का हाल जानने के लिए जाना, जनाज़े के पीछे चलना, निमंत्रण स्वीकार करना और छींकने वाले का उत्तर देना।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "सवार पैदल चलने वाले को सलाम करेगा, पैदल चलने वाला बैठे हुए को सलाम करेगा और छोटा समूह बड़े समूह को सलाम करेगा।" जबकि सहीह बुख़ारी में है : "छोटा बड़े को सलाम करेगा, गुज़रने वाला बैठे हुए को सलाम करेगा और छोटा समूह बड़े समूह को सलाम करेगा।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हुए कहते हैंः "छोटे बड़े को, गुज़रने वाला बैठे हुए को और छोटा समूह बड़े समूह को सलाम करे।" तथा एक रिवायत में हैः "तथा सवार पैदल चलने वाले को सलाम करे।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू ऐयूब अंसारी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "किसी मुसलमान के लिए हलाल नहीं है कि अपने भाई से तीन दिन से अधिक बात-चीत बंद रखे, इस प्रकार कि दोनों मिलें, लेकिन यह भी मुँह फेर ले और वह भी मुँह फेर ले। उन दोनों में उत्तम वह है, जो पहले सलाम करे।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अनस (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है कि वह कुछ बच्चों के पास से गुज़रे, तो उनको सलाम किया और कहा कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ऐसा किया करते थे।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा से रिवायत है कि एक आदमी ने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा कि इस्लाम का कौन-सा कार्य सबसे अच्छा है? आपने उत्तर दिया : "यह कि तुम खाना खिलाओ और जाने-पहचाने तथा अनजान सबको सलाम करो।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
كُنْتُ فِي مَجْلِسٍ مِنْ مَجَالِسِ الأَنْصَارِ، إِذْ جَاءَ أَبُو مُوسَى كَأَنَّهُ مَذْعُورٌ، فَقَالَ: اسْتَأْذَنْتُ عَلَى عُمَرَ ثَلاَثًا، فَلَمْ يُؤْذَنْ لِي فَرَجَعْتُ، فَقَالَ: مَا مَنَعَكَ؟ قُلْتُ: اسْتَأْذَنْتُ ثَلاَثًا فَلَمْ يُؤْذَنْ لِي فَرَجَعْتُ، وَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: @«إِذَا اسْتَأْذَنَ أَحَدُكُمْ ثَلاَثًا فَلَمْ يُؤْذَنْ لَهُ فَلْيَرْجِعْ»* فَقَالَ: وَاللَّهِ لَتُقِيمَنَّ عَلَيْهِ بِبَيِّنَةٍ، أَمِنْكُمْ أَحَدٌ سَمِعَهُ مِنَ النَّبِيِّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ؟ فَقَالَ أُبَيُّ بْنُ كَعْبٍ: وَاللَّهِ لاَ يَقُومُ مَعَكَ إِلَّا أَصْغَرُ القَوْمِ، فَكُنْتُ أَصْغَرَ القَوْمِ فَقُمْتُ مَعَهُ، فَأَخْبَرْتُ عُمَرَ أَنَّ النَّبِيَّ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ قَالَ ذَلِكَ.متفق عليه