Hadith for the World
अल्लाह की ओर बुलाना

इस्लाम की विशिष्टता तथा गुण

5 hadiths

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अबू मूसा अशअरी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है,, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जब बंदा बीमार होता है या यात्रा में निकलता है, तो उसके लिए उसी तरह की इबादतों का सवाब लिखा जाता है, जो वह घर में रहते तथा स्वस्थ रहते समय किया करता था।"इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "जब तुममें से कोई रात को नमाज़ पढ़े और उसकी ज़बान पर क़ुरआन ठीक से न आ रहा हो और उसे पता न चल रहा हो कि क्या कुछ पढ़ रहा है, तो सो जाए।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
जाबिर- रज़ियल्ललाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जो मुसलमान कोई पेड़ लगाता है तो उससे जो कुछ खाया जाएगा वह उसके लिए सद्क़ा होगा, जो कुछ चुराया जाएगा वह उसके लिए सदक़ा होगा और जो कुछ किसी के द्वारा लिया जाएगा वह भी उसके लिए सदक़ा होगा। तथा एक अनय रिवायत में है कि जो मुसलमान कोई पेड़ लगाता है और उससे कोई इंसान, चौपाया और पक्षी कुछ खाता है तो वह उसके लिए सद्क़ा होता है। तथा एक और रिवायत में है कि जब कोई मुसलमान पेड़ लगाता है और खेती करता है तथा उससे कोई इंसान, चौपाया अथवा कोई और कुछ खाता है तो वह उसके लिए सद्क़ा होता है।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबुल असवद कहते हैं कि मैं मदीने आया तो उमर बिन खत्ताब (रज़ियल्लाहु अनहु) के पास बैठा। इसी बीच एक जनाज़ा वहां से गुज़रा तो उस मृतक की प्रशंसा की गई। उमर ने कहा: अनिवार्य हो गई। फिर दूसरा जनाज़ा गुज़रा तो उसकी भी प्रशंसा की गई। उमर ने कहा: वाजिब हो गई। फिर तीसरा जनाज़ा गुज़रा तो उसकी बुराई की गई। उमर ने कहा: अनिवार्य हो गई। मैंने कहा: ऐ अमीरुल मोमेनीन! क्या वाजिब हो गई? फ़रमाया: मैंने वही कहा है, जो अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहा था: जिस मुस्लिम आदमी के बारे में चार व्यक्तियों ने भलाई की गवाही दी, अल्लाह उसे जन्नत में दाख़िल कर देगा। हमने कहा: और यदि तीन लोग गवाही दें? फ़रमाया: तीन भी। हमने कहा: और अगर दो लोग गवाहीं दें? फ़रमाया: दो भी। फिर हमने एक के गवाही देने के बारे में नहीं पूछा।इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: एक व्यक्ति किसी रास्ते से गुज़र रहा था कि उसे सख़्त प्यास लगी। इतने में उसे एक कुआँ मिला, तो उसमें उतरकर उसने पानी पिया। ऊपर आया तो देखा कि एक कुत्ता प्यास के कारण हाँप रहा है और कीचड़ चाट रहा है। उसने अपने दिल में कहा: इस कुत्ते को भी उतनी ही प्यास लगी होगी, जितनी मुझे लगी थी। इसलिए वह कुएँ में उतरा, अपने मोज़े में पानी भरा और उसे अपने मुँह से पकड़कर ऊपर आया तथा कुत्ते को पानी पिलाया। अल्लाह को उसका यह नेक काम इतना पसंद आया कि उसे क्षमा कर दिया। सहाबा ने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! क्या हमें जानवरों की सहायता करने में भी नेकी मिलती है? आपने कहा: हर ज़िंदा कलेजे वाले की सहायता में नेकी है। एक रिवायत में हैः अल्लाह ने उसके इस कार्य की क़द्र की और उसे क्षमा कर दिया तथा जन्नत में दाख़िल होने का सौभाग्य प्रदान किया। तथा एक रिवायत में है: एक कुत्ता एक कुएँ के चारों ओर चक्कर लगा रहा था और क़रीब था कि वह प्यास से हलाक हो जाए कि उसे बनी इसराईल की एक वेश्या ने देख लिया। उसने कुत्ते पर दया करते हुए, अपना मोज़ा उतारा और उसके ज़रिए कुत्ते के लिए पानी निकालकर उसे पिलाया, तो इस पुण्य के कारण उसे क्षमा कर दिया गया।इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।