Hadith for the World
शरई राजनीति

जनता पर इमाम (शासनाध्यक्ष) का अधिकार

3 hadiths

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अदी बिन उमैर किंदी (रज़ियल्लाहु अंहु) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हुए कहते हैंः "तुममें से जिसे मैं किसी प्रशासनिक काम की ज़िम्मेवारी दूँ, फिर उसने हमसे एक सूई या उससे भी छोटी चीज़ छिपाई, तो वह ख़यानत में शुमार होगा, जिसे लेकर वह क़यामत के दिन उपस्थित होगा।" यह सुन एक काला-कलौटा अंसारी आदमी आपके पास आया। ऐसा लग रहा है कि मैं उसे आज भी देख रहा हूँ। वह कहने लगाः ऐ अल्लाह के रसूल, आपने जो काम मुझे दिया था, उसे मुझसे वापस ले लें। आपने कहाः "ऐसा क्यों?" उसने कहाः मैंने आपको इस इस तरह की बात कहते सुना है। फ़रमायाः "वही बात मैं अब भी कह रहा हूँ; जिसे मैं किसी प्रशासनिक काम का ज़िम्मेवार बनाऊँ, तो वह कम तथा ज़्यादा सब कुछ लाकर रख दे। फिर उसमें से जो कुछ उसे दिया जाए, उसे ले ले और जिससे मना किया जाए, उससे दूर रहे।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
इब्ने उमर -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- से मरफ़ूअन वर्णित है : "एक मुस्लिम व्यक्ति पर ज़रूरी है कि वह सुने और आज्ञा का पानल करे। चाहे उसे पसंद हो या नापसंद। यह और बात है कि उसे किसी गुनाह का आदेश दिया जाए। यदि उसे किसी गुनाह का आदेश दिया जाता है, तो सुनना और आज्ञा का पालन करना ज़रूरी नहीं है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- से मरफ़ूअन वर्णित है : "जिसने मेरी आज्ञा का पानल किया, उसने अल्लाह की आज्ञा का पालन किया और जिसने मेरी अवज्ञा की, उसने अल्लाह की अवज्ञा की। जो अमीर की आज्ञा का पालन करता है, वह मेरी आज्ञा का पालन करता है और जो अमीर की अवज्ञा करता, वह मेरी अवज्ञा करता है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।