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जनाज़े
मृत्यु तथा उससे संबंधित अहकाम
6 hadiths
मृत्यु तथा उससे संबंधित अहकाम
6
जनाज़े को ले जाने और दफ़न करने से संबंधित बातें
2
क़ब्रों की ज़ियारत
2
الأعمال الصالحة عن الميت وإهداء الثواب له
1
6 hadiths
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) एक स्त्री के पास से गु़जरे, जो क़ब्र के पास बैठकर रो रही थी। आपने फरमायाः "अल्लाह का तक़वा अख़्तियार कर तथा सब्र कर।" उसने ऊत्तर दियाः आप मुझसे दूर रहें, मुझ जैसी मुसीबत का सामना न तो आपने किया है और न आप उसे जानते हैं! उसके बाद उसको बताया गया कि यह नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) हैं, तो वह नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के द्वार पर आई और वहाँ उसे दरबान नहीं मिले, (जो उसे आपके पास जाने से रोकते। अतः, वह आपके पास आई और) बोलीः मैं आपको पहचान नहीं पाई थी। आपने फरमायाः "सब्र तो मुसीबत के शुरू में करना होता है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, उन्होंने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मरे हुए लोगों को बुरा-भला न कहो, क्योंकि वे उसकी ओर जा चुके हैं, जो कर्म उन्होंने आगे भेजे हैं।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से रिवायत है, वह कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “जो अल्लाह से मिलना पसंद करता है, अल्लाह भी उससे मिलना पसंद करता है और जो अल्लाह से मिलना नापसंद करता है, अल्लाह भी उससे मिलना नापसंद करता है।” मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! क्या इससे अभिप्राय मौत को नापसंद करना है? वैसे तो हम सब लोग मौत को नापसंद करते हैं! आपने उत्तर दिया : “मतलब यह नहीं है, बल्कि मतलब यह है कि मोमिन को जब अल्लाह की रहमत, उसकी प्रसन्नता और उसकी जन्नत की ख़ुशख़बरी दी जाती है, तो वह अल्लाह से मिलना पसंद करता है और अल्लाह भी उससे मिलना पसंद करता है। लेकिन काफ़िर को जब अल्लाह के अज़ाब और उसके प्रकोप की सूचना दी जाती है, तो वह अल्लाह से मिलना नापसंद करता है और अल्लाह भी उससे मिलना नापसंद करता है।”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबुल असवद कहते हैं कि मैं मदीने आया तो उमर बिन खत्ताब (रज़ियल्लाहु अनहु) के पास बैठा। इसी बीच एक जनाज़ा वहां से गुज़रा तो उस मृतक की प्रशंसा की गई। उमर ने कहा: अनिवार्य हो गई। फिर दूसरा जनाज़ा गुज़रा तो उसकी भी प्रशंसा की गई। उमर ने कहा: वाजिब हो गई। फिर तीसरा जनाज़ा गुज़रा तो उसकी बुराई की गई। उमर ने कहा: अनिवार्य हो गई। मैंने कहा: ऐ अमीरुल मोमेनीन! क्या वाजिब हो गई? फ़रमाया: मैंने वही कहा है, जो अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने कहा था: जिस मुस्लिम आदमी के बारे में चार व्यक्तियों ने भलाई की गवाही दी, अल्लाह उसे जन्नत में दाख़िल कर देगा। हमने कहा: और यदि तीन लोग गवाही दें? फ़रमाया: तीन भी। हमने कहा: और अगर दो लोग गवाहीं दें? फ़रमाया: दो भी। फिर हमने एक के गवाही देने के बारे में नहीं पूछा।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "मर रहे लोगों को "ला इलाहा इल्लल्लाह" पढ़ने के लिए प्रेरित करो।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
عن عائشة عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: «ما من ميت تصلي عليه أُمَّةٌ من المسلمين يبلغون مائة، كلهم يشفعون له، إلا شفعوا فيه».
رواه مسلم