Hadith for the World
हज तथा उमरा

हज तथा उमरा के अहकाम एवं मसायल

3 hadiths

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अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) वर्णन करते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) मक्का में कदा की ओर से, बतहा की ऊँची घाटी से होते हुए दाखिल हुए और नीची घाटी से निकले।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
उमर -रज़ियल्लाहु अनहु- से वर्णित है कि वह हजर-ए-असवद के पास आए, उसे चूमा और फ़रमाया : मैं अच्छी तरह जानता हूँ कि तू एक पत्थर है। न हानि पहुँचा सकता है और न लाभ दे सकता है। यदि मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को तुझे चूमते न देखा होता, तो मैं तुझे न चूमता।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
عن ابن عباس رضي الله عنهما أنه سمع النبي صلى الله عليه وسلم يقول: «لا يَخْلُوَنَّ رجلٌ بامرأةٍ، ولا تسافِرَنَّ امرأةٌ إلا ومعها محرمٌ»، فقام رجل فقال: يا رسول الله، ‌اكتتبت في غزوة كذا وكذا، وخرجت امرأتي حاجة، قال: «اذهب فحج مع امرأتك».متفق عليه