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655 hadiths

आयशा- रज़ियल्लाहु अन्हा- से रिवायत है, उन्होंने फरमाया किः नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने एक बार सारी रात एक आयत को ही निरंतर पढ़ते हुए क़्याम किया।इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।
इब्ने अब्बास- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है वह कहते हैं कि नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को जब नबी बनाया गया तो आप की आयु चालीस वर्ष थी, आप मक्का में तेरह वर्ष तक रहे जहाँ आप पर वह्य उतरती रही, फिर आप को हिजरत (पलायन) का आदेश दिया गया तो आप ने हिजरत की जहां (मदीना में) आप दस साल तक रहे, और जब आप की मृत्यु हुई उस समय आप की आयु तिरसठ (63) साल थी।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है, वह कहते हैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : ''मेरे सहाबा को बुरा-भला मत कहो। तुममें से कोई यदि उहुद पर्वत के बराबर सोना ख़र्च कर दे, तब भी उनके एक या आधा मुद खर्च करने के बराबर नेकी प्राप्त नहीं कर सकता।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
मिसवर बिन मख़रमा -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से रिवायत करते हैं कि आपने फ़रमायाः "फ़ातिमा मेरा अंग है, जिसने उसे नाराज़ किया, उसने मुझे नाराज़ किया।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "जिसने हसन और हुसैन से मुहब्बत की, उसने मुझसे मुहब्बत की और जिसने उन दोनों से दुश्मनी की, उसने मुझसे दुश्मनी की।"इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "तुम्हारे अंदर सबसे अच्छा व्यक्ति वह है, जो मेरे बाद मेरे परिवार के लिए सबसे अच्छा हो।" वह कहते हैंः अब्दुर्रहमान बिन औफ़ ने चार लाख में एक बाग़ बेचा और पूरा पैसा नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की पत्नियों में बाँट दिया।इसे इब्ने अबी आसिम ने रिवायत किया है। - इसे ह़ाकिम ने रिवायत किया है।
आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि मुझे नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की पत्नियों में से केवेल ख़दीजा पर ग़ैरत आती थी। हालाँकि मेरे विवाह से पहले ही उनका निधन हो चुका था। वह कहती हैंः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- जब बकरी ज़बह करते, तो कहतेः "इस में से ख़दीजा की सहेलियों को भेजो।" वह कहती हैं कि मैंने एक दिन आप को नाराज करदिया, और मैंने कहा: खदीजा! तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "मेरे अंदर उसका प्रेम रचा-बसा है।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि जब तक ख़दीजा -रज़ियल्लाहु अन्हा- जीवित रहीं, नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने दूसरा निकाह नहीं किया।।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- का वर्णन है कि जिबरील एक हरे रंग के रेशमी कपड़े में उनका चित्र लेकर नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास आए और कहाः यह दुनिया तथा आख़िरत में आपकी पत्नी है।इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।
अबू मूसा -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "पुरुषों में से बहुत-से लोग संपूर्ण हुए, लेकिन स्त्रियों में से संपूर्ण केवल फ़िरऔन की पत्नी आसिया और मरयम बिंत इमरान हुईं। हाँ, सारी स्त्रियों में आइशा का वही स्थान है, जो सारे खानों में सरीद का है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुर्रहमान बिन अबी अमीरा, जिनका शुमार अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के सहाबा में होता है, नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से रिवायत करते हैं कि आपने मुआविया -रज़ियल्लाहु अन्हु- के बारे में फ़रमायाः "ऐ अल्लाह, इसे सीधा रास्ता बताने वाला और सीधे रास्ते पर चलने वाला बना तथा इसके ज़रिए लोगों को सीधा रास्ता दिखा।"इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
अबू अज़्ज़ा हुज़ली -रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "जब अल्लाह किसी बंदे को किसी स्थान में मृत्यु देना चाहता है, तो वहाँ उसकी कोई ज़रूरत रख देता है।"इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद तयालिसी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "तुममें से कोई जब मर जाता है, तो सुबह-शाम उसे उसका ठिकाना दिखाया जाता है। अगर वह जन्नती है, तो जन्नत वालों का और अगर जहन्नमी है, तो जहन्नम वालों का। उससे कहा जाता है कि यही तेरा ठिकाना है, (जो तुझे उस समय तक प्राप्त नहीं हो सकता) जब तक अल्लाह क़यामत के दिन तुझे दोबारा न उठाए।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
उसामा बिन ज़ैद -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है, वह कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने मदीने के एक क़िले के ऊपर चढ़कर नीचे की ओर देखा और फ़रमायाः "क्या तुम वह देख रहे हो, जो मैं देख रहा हूँ?" सहाबा ने कहाः नहीं! तो फ़रमायाः "मैं देख रहा हूँ कि तुम्हारे घरों के बीच फ़ितने ऐसे उतर रहे हैं, जैसे (तेज़) बारिश बरसती हो।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जब तुममें से किसी को नमाज़ में संदेह हो जाए और याद न रहे कि कितनी रकात पढ़ी है, तीन अथवा चार? तो संदेह को परे डाल दे और जिस पर यक़ीन हो, उसे आधार बनाए। फिर सलाम फेरने से पहले दो सजदे कर ले। ऐसे में, अगर उसने पाँच रकातें पढ़ ली हैं, तो दो सजदे उसकी नमाज़ को सम संख्या वाली नमाज़ बना देंगे और अगर उसने पूरी चार रकात पढ़ी है, तो दोनों सजदे शैतान के अपमान का सामान बन जाएँगे।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू राफ़े का वर्णन है, वह कहते हैं कि अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने उन्हें नमाज़ पढ़ाते समय सूरा «إذا السماء انْشَقَّتْ» पढ़ी और तिलावत का सजदा किया। जब नमाज़ पढ़ चुके, तो उन्होंने बताया कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने भी इस सूरा में सजदा किया है।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू बकरा -रज़ियल्लाहु अंहु- नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के बारे में कहते हैं कि जब आपके पास कोई ख़ुशी की बात आती या आपको कोई खुशखबरी दी जाती , तो अल्लाह के शुक्राने के तौर पर सजदे में चल जाते।इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
हफ़सा -रज़ियल्लाहु अन्हा- का वर्णन है, वह कहती हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- फ़ज्र प्रकट होने के बाद दो हल्की रकातें पढ़ा करते थे। एक अन्य रिवायत में हैः जमात खड़ी होने से पहले।इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है कि : अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ज़ुहर से पहले की चार रकातें और फ़ज्र से पहले की दो रकातें नहीं छोड़ते थे।इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की पत्नी उम्म-ए-हबीबा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, वह कहती हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है : "जिसने ज़ुहर से पहले और ज़ुहर के बाद चार-चार रकातें पाबंदी से पढ़ीं, अल्लाह उसपर जहन्नम की आग हराम कर देगा।"इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, नसई, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "अल्लाह उस आदमी पर रहम करे, जिसने अस्र से पहले चार रकात पढ़ी।"इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन मुग़फ़्फ़ल मुज़नी -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "मग़रिब से पहले दो रकात पढ़ो।" फिर फ़रमायाः "मग़रिब से पहले दो रकात पढ़ो। यह आदेश उसके लिए है, जो स्वेच्छा से ऐसा करना चाहे।" आपने ऐसा इस भय से कहा कि कहीं लोग उसे सुन्नत न ठहरा लें।इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि जब मुअज़्ज़िन फ़ज्र की नमाज़ की अज़ान देकर ख़ामोश हो जाता, तो अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- खड़े होते और फ़ज्र की नमाज़ से पहले दो हल्की-हल्की रकातें पढ़ते। यह फ़ज्र का समय हो जाने के बाद की बात है। फिर बाईं करवट पर लेट जाते, यहाँ तक मुअज़्ज़िन इक़ामत के लिए आता।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अन्हुमा का वर्णन है, वह कहते हैं : एक व्यक्ति ने नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से, जब आप मिंबर पर थे, पूछा : रात की नमाज़ के बारे में आप क्या कहते हैं? आपने फरमाया : "दो-दो रकात पढ़ा करो, फिर जब सुबह हो जाने का डर हो तो एक रकात पढ़ लो, यह उसकी पढ़ी हुई नमाज़ को वित्र (विषम) बना देगी।" और आप फ़रमाया करते थे : "अपनी अंतिम नमाज़ वित्र को बनाओ," क्योंकि नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने इसका आदेश दिया है।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है