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All hadiths
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पवित्र क़ुरआन तथा उससे संबंधित अन्य विषय
26
हदीस तथा उससे संबंधित अन्य विषय
3
अक़ीदा
135
फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह
288
फ़ज़ीलतें तथा आदाब
288
आह्वान एवं भलाई का आदेश देने तथा बुराई से रोकने का प्रबंध करना
15
सीरत एवं इतिहास
38
655 hadiths
अब्दुल्लाह बिन मसऊद- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "तुममें से किसे अपने धन की तुलना में अपने वारिस का धन अधिक प्रिय है?" सहाबा ने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, हममें से हर व्यक्ति को अपना धन अधिक प्रिय है। यह सुनकर आपने फ़रमायाः "तो सुनो, उसका धन वह है, जो उसने आगे भेज दिया और उसके वारिस का धन वह है, जो उसने पीछे छोड़ दिया।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मेरी ओर से मिली वाणी दूसरों तक पहुँचा दो, चाहे एक आयत ही हो, तथा इसराईली वंश के लोगों की घटनाओं का वर्णन करो, इसमें कोई हर्ज नहीं है, तथा जिसने मुझपर जान-बूझकर झूठ बोला, वह अपना ठिकाना जहन्नम में बना ले।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है : एक देहाती अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया और कहा : मुझे कोई ऐसा कर्म बताएँ कि उसे करूँ, तो जन्नत में दाखिल हो जाऊँ। फ़रमाया : "अल्लाह की इबादत करो, किसी को उसका साझी न बनाओ, फ़र्ज़ नमाज़ कायम करो, फ़र्ज़ ज़कात अदा करो और रमज़ान के रोज़े रखो।" उसने कहा : उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, मैं इससे ज़्यादा कुछ नहीं करूँगा। जब वह वापस हुआ, तो अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जो किसी जन्नती व्यक्ति को देखना चाहे, वह इसे देख ले।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
सह्ल बिन साद साइदी- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "अगर दुनिया, अल्लाह के निकट मच्छर के पर के बराबर भी महत्व रखती, तो अल्लाह किसी काफ़िर को उसका एक घूँट पानी तक नहीं देता।"
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है।
अबू सईद ख़ुदरी तथा अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मुसलमान को जो भी रोग, थकान, दुख, गम, कष्ट और विपत्ति पहुँचती है, यहाँ तक कि एक काँटा भी चुभता है, तो उसके ज़रिए अल्लाह उसके गुनाहों को मिटा देता है।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैैंनेे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह कहते हुए सुना है : "एक मुसलमान के दूसरे मुसलमान पर पाँच अधिकार हैं; सलाम का उत्तर देना, बीमार व्यक्ति का हाल जानने के लिए जाना, जनाज़े के पीछे चलना, निमंत्रण स्वीकार करना और छींकने वाले का उत्तर देना।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू मसऊद बदरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "तुमसे पहले की कौमों में से किसी कौम के एक व्यक्ति का हिसाब लिया गया, तो उसके पास कोई भी पुणित कर्म नहीं मिला। मिला तो बस इतना कि वह एक धनी व्यक्ति था, लोगों के साथ मामला करता था और अपने सेवकों को आदेश देता था कि जो क़र्ज़ अदा करने में असमर्थ हो, उसे क्षमा कर दें। अतः, अल्लाह ने कहाः हम उसकी तुलना में इसे क्षमा कर देने के अधिक हक़दार हैं, जाओ, उसे माफ़ कर दो।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "सबसे उत्तम दिन जिसमें सूरज निकला, जुमा का दिन है। इसी दिन आदम पैदा हुए, इसी दिन जन्नत में दाख़िल हुए और इसी दिन वहाँ से निकाले गए। क़यामत भी जुमा के दिन ही क़ायम होगी।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "बहुत-से बिखरे हुए बालों वाले और दरवाज़ों से भगा दिए जाने वाले लोग ऐसे हैं कि यदि अल्लाह पर क़सम खा लें, तो अल्लाह उनकी क़समों की लाज रख ले।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
जाबिर रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अल्लाह उस व्यक्ति पर दया करे, जो बेचते, खरीदते और क़र्ज का तकाज़ा करते समय नर्मी से काम ले।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "वह व्यक्ति अपमानित हो, फिर वह व्यक्ति अपमानित हो, फिर वह व्यक्ति अपमानित हो।" किसी ने पूछा : कौन ऐ अल्लाह के रसूल? फ़रमाया : "जिसने अपने माता-पिता को बुढ़ापे में पाया, चाहे दोनों में से एक को पाया हो या दोनों को, परन्तु (उनकी सेवा करके) जन्नत में दाखिल नहीं हुआ।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मक्का के रास्ते में चल रहे थे कि जुमदान नामी एक पर्वत के पास से गुज़रे। अतः फ़रमाया : "चलते रहो, यह जुमदान है। अतुल्य विशेषता वाले लोग आगे हो गए।" सहाबा ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! यह अतुल्य विशेषता वाले लोग कौन हैं? फ़रमाया : "अल्लाह को बहुत ज़्यादा याद करने वाले पुरुष और अल्लाह को बहुत-ज़्यादा याद करने वाली स्त्रियाँ।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
मादान बिन अबू तल्हा यामुरी से वर्णित है, वह कहते हैं : मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के आज़ाद किए हुए दास स़ौबान से मुलाक़ात की और कहा : मुझे किसी ऐसे कार्य के बारे में बताइए, जिसे करूँ, तो अल्लाह मुझे जन्नत में प्रवेश करा दे। उनका कहना है कि या मैंने यह कहा था : मुझे कोई ऐसा काम बताइए, जो अल्लाह के निकट सबसे महबूब हो। मेरी बात सुनकर वह चुप रहे। मैंने फिर प्रश्न किया, तो वह चुप रहे। मैंने तीसरी बार प्रश्न दोहराया, तो उन्होंने कहा : मैंने इसके बारे में अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा, तो आपने कहा : ''अधिक से अधिक अल्लाह के लिए सजदा करो, इसलिए कि तुम्हारे हर एक सजदे के बदले अल्लाह तुम्हारा एक दर्जा ऊँचा करता है और तुम्हारे एक गुनाह को मिटा देता है।'' मअदान कहते हैं : फिर मैं अबू दरदा से मिला और उनसे पूछा, तो उन्होंने भी उसी तरह कहा, जिस तरह सौबान ने कहा था।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "जब तुममें से कोई रात को नमाज़ पढ़े और उसकी ज़बान पर क़ुरआन ठीक से न आ रहा हो और उसे पता न चल रहा हो कि क्या कुछ पढ़ रहा है, तो सो जाए।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
सह्ल -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जन्नत में एक द्वार है, जिसे रय्यान कहा जाता है। क़यामत के दिन उससे रोज़ेदार प्रवेश करेंगे। उनके सिवा कोई उस द्वार से प्रवेश नहीं करेगा। कहा जाएगा : रोज़ेदार कहाँ हैं? अतः, वे उठ खड़े होंगे। उनके सिवा कोई उससे प्रवेश नहीं करेगा। जब वे दाख़िल हो जाएँगे, तो द्वार बंद कर दिया जाएगा और उससे कोई अंदर नहीं जाएगा।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हैं कि आपने फ़रमायाः "दाऊद (अलैहिस्सलाम) अपने हाथ की कमाई ही से खाते थे।" तथा मिक़दाम बिन मादीकरिब- रज़ियल्लाहु अन्हु- अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हैं कि आपने फ़रमायाः "किसी ने कोई भोजन ग्रहण नहीं किया, जो उसके हाथ की कमाई के भोजन से उत्तम हो तथा अल्लाह के नबी दाऊद (अलैहिस्सलाम) अपने हाथ की कमाई से खाते थे।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "एक व्यक्ति लोगों को क़र्ज़ देता और अपने सेवकों से कहा करता कि जब किसी ऋण चुकाने में असमर्थ व्यक्ति के पास जाओ तो उसके क़र्ज़ की अनदेखी करो। हो सकता है कि अल्लाह हमारे गुनाहों की अनदेखी करे। तो जब वह मरने के बाद, अल्लाह से मिला तो अल्लाह ने उसे क्षमा कर दिया।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
मुसलमानों की माता आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है कि : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- रमज़ान महीने के अंतिम दस दिनों में दूसरे दिनों की तुलना में कहीं अधिक इबादत में लीन रहा करते थे।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "मेरी उम्मत के सभी लोगों को माफ़ कर दिया जाएगा, सिवाय उनके जो खुलम-खुल्ला गुनाह करते हैं। तथा खुलम-खुल्ला गुनाह करने का एक रूप यह है कि आदमी रात को कोई गुनाह करे और सुबह आए तो वह कहता फिरे कि ऐ अमुक! मैंने रात को ऐसा और ऐसा किया है, हालांकि अल्लाह ने उसे लोगों से छुपा रखा था। उसके रब ने रात भर उसके गुनाह को छिपा रखा, लेकिन उसने सुबह को अल्लाह के डाले हुए परदे को उठा दिया।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
साद बिन अबू वक़्क़ास- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास थे कि आपने फ़रमायाः क्या तुममें से कोई इस बात से विवश है कि प्रत्येक दिन एक हज़ार नेकियाँ प्राप्त करे? आपके पास बैठे लोगों में से एक व्यक्ति ने पूछाः आदमी एक हज़ार नेकियाँ कैसे प्राप्त कर सकता है? आपने फ़रमायाः सौ बार 'सुबहानल्लाह' कहने से उसके लिए एक हज़ार नेकियाँ लिखी जाएँगी अथवा उसके एक हज़ार गुनाह मिटाए जाएँगे।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन मसऊद- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः ईर्ष्या केवल दो प्रकार के लोगों से रखना जायज़ है; एक वह व्यक्ति, जिसे अल्लाह ने धन प्रदान किया हो तथा उसने उस धन को सत्य के मार्ग में खर्च करने पर लगा दिया हो तथा दूसरा वह व्यक्ति, जिसे अल्लाह ने हिकमत (अंतर्ज्ञान) प्रदान की हो और वह उसी के अनुसार निर्णय करता हो और उसकी शिक्षा देता हो। तथा अब्दुल्लाह बिन उमर- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- नबी- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से रिवायत करते हैं कि आपने फ़रमायाः "ईर्ष्या केवल दो मामलों में जायज़ है; एक वह व्यक्ति, जिसे अल्लाह ने क़ुरआन दिया हो और वह रात दिन पढ़ने में लगा हो और एक वह व्यक्ति, जिसे अल्लाह ने धन दिया हो और वह रात दिन उसे- अल्लाह के रास्ते में- खर्च करने में लगा हो।"
इसे दोनों रिवायतों के साथ बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः अल्लाह के भय से रोने वाला व्यक्ति उसी प्रकार जहन्नम में प्रवेश नहीं कर सकता, जिस प्रकार दूध थन में लौट नहीं सकता। तथा अल्लाह के मार्ग की धूल और जहन्नम का धुआँ एकत्रित नहीं हो सकते।
इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे नसाई ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
जाबिर रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को फ़रमाते हुए सुना है : "तुममें से हर व्यक्ति की मृत्यु इस अवस्था में आनी चाहिए कि वह अल्लाह से अच्छा गुमान रखता हो।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
ज़ुबैर बिन अव्वाम- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः तुममें से कोई अपनी रस्सियाँ लेकर पर्वत की ओर जाए और अपनी पीठ पर लकड़ियों का गट्ठर लादकर ले आए तथा उसे बेचे और इस तरह अल्लाह उसके चेहरे को (माँगने के अपमान से) बचा ले तो यह उसके लिए इस बात से बेहतर है कि लोगों से माँगे और लोग उसे दें या देने से मना कर दें।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
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