Hadith for the World
फ़ज़ीलतें तथा आदाब

फ़ज़ीलतें

64 hadiths

64 hadiths

अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जिसने किसी मोमिन से दुनिया की परेशानियों में से कोई परेशानी दूर की, अल्लाह उससे क़यामत के दिन की परेशानियों में से किसी परेशानी को दूर करेगा। जिसने तंगी में पड़े हुए किसी व्यक्ति के साथ आसानी बरती, अल्लाह दुनिया एवं आख़िरत में उसके साथ आसानी करेगा। जिसने किसी मुसलमान की कमी एवं अवगुण को छुपाया, अल्लाह दुनिया और आख़िरत में उसके अवगुण एवं कमियों को छुपाएगा। अल्लाह अपने बंदे की मदद में रहता है, जब तक बंदा अपने भाई की मदद में रहता है। जो ज्ञान अर्जित करने के लिए किसी मार्ग पर चलता है, अल्लाह इसके बदले में उसके लिए जन्नत का मार्ग आसान कर देता है। जब कुछ लोग अल्लाह के किसी घर में एकत्र होकर अल्लाह की किताब की तिलावत हैं और उसे आपस में समझने एवं समझाने का कार्य करते हैं, तो उनपर शांति अवतरित होती है, उन्हें अल्लाह की कृपा ढाँप लेती है, फ़रिश्ते घेरे रहते हैं और अल्लाह उनकी चर्चा उनके बीच करता है, जो उसके पास हैं (अर्फ़थात: रिश्तों के सामने)। जिसका कर्म उसे पीछे छोड़ दे, उसका कुल उसे आगे नहीं ले जा सकता।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के एक सहाबी अग़र्र -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "ऐ लोगो! अल्लाह के सामने तौबा करो, क्योंकि खुद मैं दिन में सौ बार तौबा करता हूँ।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अपने सर्वशक्तिमान एवं महान रब से रिवायत करते हुए कहते हैं : "एक बंदे ने एक गुनाह किया और उसके बाद कहा : ऐ अल्लाह, मुझे मेरे गुनाह क्षमा कर दे! तो बरकत वाले एवं महान अल्लाह ने कहा : मेरे बंदे ने एक गुनाह किया, फिर उसने जाना कि उसका रब गुनाह माफ़ करता है और गुनाह के कारण पकड़ता भी है। फिर उसने दोबारा गुनाह किया और कहा : ऐ मेरे रब, मुझे मेरे गुनाह माफ़ कर दे! तो बरकत वाले एवं महान अल्लाह ने कहा : मेरे बंदे ने गुनाह किया और जाना कि उसका रब गुनाह माफ़ करता है और उसके कारण पकड़ता भी है। मैंने अपने बंदे को माफ़ कर दिया। अब वह जो चाहे, करे।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
जुबैर बिन मुतइम रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि उन्होंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना : "जन्नत में वह व्यक्ति प्रवेश नहीं करेगा, जो रिश्ते-नातों को काटता हो।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जो चाहता हो कि उसकी रोज़ी फैला दी जाए और उसकी आयु बढ़ा दी जाए, वह अपने रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार करे।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू उमामा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुनाः "क़ुरआन पढ़ो; क्योंकि क़ुरआन क़यामत के दिन अपने पढ़ने वालों के लिए सिफ़ारिशी बनकर आएगा।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबूज़र गिफ़ारी (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "क्या मैं तुम्हें वह शब्द न बताऊँ, जो अल्लाह के निकट सबसे प्रिय है? अल्लाह के निकट सबसे प्रिय शब्द हैः 'سبحان اللهِ وبحمدِهِ' (अर्थात अल्लाह पवित्र है अपनी प्रशंसा के साथ।)"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हुए कहते हैंः “उस ज़ात (अल्लाह) की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, यदि तुम लोग गुनाह न करो, तो अल्लाह तुम्हारा विनाश करके ऐसे लोगों को ले आए, जो गुनाह करें और उसके बाद अल्लाह से माफ़ी माँगें, तो अल्लाह उन्हें माफ़ करे।”इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः “शेष रहने वाली नेक चीज़ें हैंः ला इलाहा इल्लल्लाह (अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं है), सुबहान अल्लाह (अल्लाह पाक है), अल्लाहु अकबर (अल्लाह सबसे बड़ा है) अल-हम्दुलिल्लाह (समस्त प्रकार की प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है) तथा ला ह़ौला व ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह (अल्लाह की मदद बिना न हालात बदलने की ताक़त है और न कुछ करने का साहस)।”इसे इब्ने ह़िब्बान ने रिवायत किया है । - इसे ह़ाकिम ने रिवायत किया है। - इसे नसाई ने रिवायत किया है।
नोमान बिन बशीर रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, उन्होंने कहा : मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : “दुआ ही इबादत है।” फिर यह आयत पढ़ी : "तथा तुम्हारे रब ने कहा है : तुम मुझे पुकारो, मैं तुम्हारी प्रार्थना स्वीकार करूँगा। निःसंदेह जो लोग मेरी इबादत से अहंकार करते हैं, वे शीघ्र ही अपमानित होकर जहन्नम में प्रवेश करेंगे।" [सूरा ग़ाफ़िर : 60]इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : “अल्लाह के निकट दुआ से अधिक सम्मानित कोई चीज नहीं है।”इसे तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : “जिसने दिन भर में सौ बार 'सुबहानल्लाहि व बिह़म्दिहि' (अल्लाह के लिए पवित्रता है उसकी प्रशंसा के साथ) कहा, उसके सारे पाप क्षमा कर दिए जाएँगे, यद्यपि वे समुद्र के झाग के बराबर ही क्यों न हों।”इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
मुआविया रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णन है, उन्होंने कहा : मैंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "अल्लाह तआला जिसके साथ भलाई का इरादा करता है, उसे दीन की समझ प्रदान करता है। मैं केवल बाँटने वाला हूँ, देता तो अल्लाह है। यह उम्मत अल्लाह के आदेश पर क़ायम रहेगी, उसे उसका विरोध करने वाले नुक़सान नहीं पहुँचा सकेंगे, यहाँ तक कि क़यामत आ जाए।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन सलाम रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : जब अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम मदीना आए, तो लोग आपकी ओर दौड़ पड़े और कहा जाने लगा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम आ गए हैं। अल्लाह के रसूल आ गए हैं। अल्लाह के रसूल आ गए हैं। तीन बार। देखने के लिए मैं भी लोगों के साथ पहुँचा। जब ध्यान से आपका चेहरा देखा, तो पता लग गया कि यह किसी झूठे का चेहरा नहीं है। इस दौरान मैंने आपको जो पहली बात कहते हुए सुना वह यह थी : "हे लोगों, सलाम फैलाओ (प्रचारित करो), लोगों को खाना खिलाओ, रिश्तेदारियों को जोड़ो, रात्रि में जब लोग सो रहे होते हैं, तो उठ कर नमाज़ पढ़ो, (ऐसा करने पर) सुरक्षित रूप से जन्नत में प्रवेश पा जाओगे।"इसे तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
अली (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुनाः जब कोई मुस्लिम प्रातः किसी मुस्लिम व्यक्ति की इयादत (बीमारपुरसी) करता है, तो सत्तर हज़ार फ़रिश्ते शाम तक उस के लिए रहमत की प्रार्थना करते हैं। इसी प्रकार, जब कोई शाम को इयादत करता है, तो प्रातः तक फ़रिश्ते उसके लिए रहमत की दुआ करते रहते हैं तथा ऐसे व्यक्ति के लिए जन्नत में चुना हुआ फल है (अर्थात वह जन्नती है)।इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन मसऊद रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जो अल्लाह की किताब का कोई एक अक्षर पढ़ेगा, उसे एक नेकी मिलेगी और नेकी दस गुणा तक दी जाती है। मैं यह नहीं कहता कि अलिफ़ लाम मीम मिल कर एक अक्षर है, बल्कि अलिफ़ एक अक्षर, लाम एक अक्षर और मीम एक अलग अक्षर है।"इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "लोग सोने चाँदी के खदान की तरह खदान हैं। जो लोग जाहिलियत में बेहतर थे, वे इस्लाम में भी बेहतर हैं, यदि इस्लाम की समझ प्राप्त कर लें। सारे प्राण एकत्र सेना थे; जिस-जिस ने वहाँ एक-दूसरे को पहचाना, वह दुनिया में एक-दूसरे से प्रेम रखते हैं, और जिस-जिस ने वहाँ एक-दूसरे की पहचान न की, वह यहाँ एक-दूसरे से बेगाना रहते हैं।" तथा अबू हुरैरा -अल्लाह उनसे प्रसन्न हो- ही से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "तुम, लोगों को खदान के समान पाओगे। उनमें जो जाहिलियत में बेहतर थे, वे इस्लाम में भी बेहतर हैं, यदि दीन की समझ प्राप्त कर लें। तुम शासन के मामले सबसे अच्छा उन लोगों को पाओगे, जो उसे सबसे अधिक नापसंद करने वाले हों तथा तुम सबसे बुरा आदमी उसे पाओगे, जो दोमुँहा हो। इनके पास एक चेहरे के साथ आता हो और उनके पास दूसरे चेहरे के साथ आता हो।"इसे दोनों रिवायतों के साथ बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अनस बिन मालिक और अबू हुरैरा -अल्लाह उन दोनों से प्रसन्न हो- से रिवायत है कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- अपने रब से रिवायत करते हुए कहते हैं कि अल्लाह तआला फरमाता है : "जब बंदा मुझसे एक बित्ता क़रीब आता है, तो मैं उससे एक हाथ क़रीब आता, जब वह मुझसे एक हाथ क़रीब आता है, तो मैं उससे दोनों हाथों को फैलाकर जितनी दूरी बनती है, उतना क़रीब आता हूँ और जब वह मेरे पास चलकर आता है, तो मैं उसके पास दौड़ कर आता हूँ।"इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "एक व्यक्ति रास्ते में जा रहा था कि उसने रास्ते में कांटेदार टहनी देखी, तो उसने उसे हटा दिया। अल्लाह ने उसके इस काम को पसंद किया और उसे माफ कर दिया।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन मसऊद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "अल्लाह उस व्यक्ति को ख़ुश व आबाद रखे, जिसने मुझसे कोई बात सुनी और उसे उसी प्रकार दूसरों तक पहुँचा दिया, जिस प्रकार मुझसे सुनी थी। क्योंकि बहुत बार सुनने वाले से वह व्यक्ति अधिक याद रखता है (या अधिक समझदार होता है) जिस तक बात पहुँचाई गई हो।"इसे तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “अल्लाह कहता है : जब मेरा बंदा किसी गुनाह का इरादा करे, तो उसे न लिखो, यहाँ तक कि उसे कर डाले। यदि वह उस गुनाह को कर डालता है, तो बस उतना ही लिखो जितना उसने किया हो। और यदि मेरे (भय के) कारण उस गुनाह को छोड़ देता है, तो उसके लिए एक नेकी लिख दो। इसी प्रकार यदि वह कोई नेकी करने का इरादा करे, लेकिन उसे कर न डाले, तो उसके लिए एक नेकी लिख दो। और यदि वह उस नेकी को कर ले, तो उसे उसके लिए दस गुना से लेकर सात सौ गुना तक लिख दो।”इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जिसने पहले ही वार में किसी छिपकली को मारा, उसे इतनी नेकी मिलेगी और जिसने दूसरे वार में मारा उसे इतनी नेकी मिलेगी और जिसने तीसरे वार में मारा, उसे इतनी नेकी मिलेगी। एक रिवायत में है: जिसने पहली वार में छिपकली को मार दिया, उसके लिए सौ नेकी लिख दी जाएगी और दूसरे वार में मारने पर उस से कम और तीसरे वार में मारने पर उस से भी कम।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू सईद खु़दरी (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है कि एक महिला अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आई और उसने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! मर्द लोग आपकी हदीस लेकर चले गए। इसलिए आप हमारे लिए भी एक दिन निर्धारित कर दें, जिसमें हम उपस्थित हों और आप हमें वह चीज़ सिखाएँ जो आपको अल्लाह ने सिखाई है। आप ने फ़रमाया: फ़लाँ फ़लाँ दिन तुम लोग एकत्रित हो जाओ। वायदे के मुताबिक, औरतें एकत्रित हो गईं और अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उनके पास आए और उन्हें अल्लाह की सिखाई हुई बातों में से कुछ सिखाया, फिर फ़रमाया: तुममें से जिस महिला की तीन संतानें मर जाएँ, वह उसके लिए जहन्नम से आड़ बन जाती हैं। इस पर एक महिला ने पूछा: और यदि दो मरें तो? अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: यदि दो मरें तो भी।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू ज़र (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से कहा गया: आपका क्या ख़्याल है उस आदमी के प्रति जो नेक कर्म करता है और लोग उसकी उसपर प्रशंसा करते हैं? आपने फ़रमाया: यह मोमिन के लिए जल्द मिलने वाली शुभ सूचना है।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।