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फ़ज़ीलतें
दिल से संबंधित कर्मों की फ़ज़ीलतें
4 hadiths
ज्ञान तथा विद्या की फ़ज़ीलत
8
तौहीद (एकेश्वरवाद) की फ़ज़ीलतें
4
पवित्र क़ुरआन की फ़ज़ीलतें
5
माता-पिता के साथ अच्छा व्यवहार करने की फ़ज़ीलतें
3
रिश्तों-नातों को निभाने की फ़ज़ीलतें
1
आल-ए-बैत रज़ियल्लाहु अनहुम की फ़ज़ीलतें
4
सुकर्मों की फ़ज़ीलतें
16
ज़िक्र की फ़ज़ीलतें
10
दुआ की फ़ज़ीलतें
5
दिल से संबंधित कर्मों की फ़ज़ीलतें
4
शरीर के विभिन्न अंगों से होने वाले कर्मों से फ़ज़ीलत
6
4 hadiths
अबू मूसा अशअरी (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "अल्लाह तआला के सम्मान में यह बात भी सम्मिलित है कि सफ़ेद बाल वाले मुसलमान का तथा उस कुरवान वाले का, जो न उसमें अतिशयोक्ति करता हो और न उससे बेवफ़ाई करता हो एवं उस प्रशासक का सम्मान किया जाए, जो न्यायप्रिय हो।"
इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।
इमरान बिन हुसैन (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसू (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "हया केवल भलाई ही लाती है।" एक और रिवायत में हैः "हया भलाई ही भलाई है।" या फिर फ़रमायाः "हया संपूर्ण रूप से भलाई है।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
उमर बिन ख़त्ताब रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, उन्होंने कहा कि उन्होंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह कहते हुए सुना : "अगर तुम अल्लाह पर वैसा ही भरोसा करने लगो, जैसा भरोसा उसपर होना चाहिए, तो वह तुम्हें उसी तरह रोज़ी दे, जैसे चिड़ियों को रोज़ी देता है; वह सुबह को खाली पेट निकलती हैं और शाम को पेट भरकर लोटती हैं।"
इसे तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “अल्लाह कहता है : जब मेरा बंदा किसी गुनाह का इरादा करे, तो उसे न लिखो, यहाँ तक कि उसे कर डाले। यदि वह उस गुनाह को कर डालता है, तो बस उतना ही लिखो जितना उसने किया हो। और यदि मेरे (भय के) कारण उस गुनाह को छोड़ देता है, तो उसके लिए एक नेकी लिख दो। इसी प्रकार यदि वह कोई नेकी करने का इरादा करे, लेकिन उसे कर न डाले, तो उसके लिए एक नेकी लिख दो। और यदि वह उस नेकी को कर ले, तो उसे उसके लिए दस गुना से लेकर सात सौ गुना तक लिख दो।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।