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Topic
फ़ज़ीलतें तथा आदाब
288 hadiths
फ़ज़ीलतें
64
सद्व्यवहार पर आधारित फ़िक़्ह
56
शरई आदाब
67
दुआओं तथा अज़कार पर आधारित फ़िक़्ह
62
दिलों को पिघलाने वाली बातें और नसीहतें
63
288 hadiths
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "बलवान वह नहीं है, जो किसी को पछाड़ दे, बलवान तो वह है, जो क्रोध के समय अपने आप को नियंत्रण में रखे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अंहु) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हुए कहते हैंः "छोटे बड़े को, गुज़रने वाला बैठे हुए को और छोटा समूह बड़े समूह को सलाम करे।" तथा एक रिवायत में हैः "तथा सवार पैदल चलने वाले को सलाम करे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू मस्ऊद अंसारी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन, उन्होंने कहा : एक व्यक्ति अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के पास आया और कहने लगा : मेरी सवारी हलाक हो चुकी है, अतः मुझे सवारी के लिए एक जानवर दीजिए। चुनांचे अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मेरे पास जानवर नहीं है।" यह सुन एक व्यक्ति ने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! मैं इसे एक व्यक्ति के बारे में बता सकता हूँ, जो इसे सवारी के लिए जानवर दे सकता है। इसपर अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जिसने किसी अच्छे काम का मार्ग दिखाया, उसे उसके करने वाले के बराबर प्रतिफल मिलेगा।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अली बिन अबू तालिब (रज़ियल्लाहु अंहु) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हुए कहते हैंः "जब तुममें से कोई जूता पहने, तो दाएँ पाँव से शुरू करे और जब जूता उतारे, तो बाएँ पाँव से शुरू करे। दाएँ पाँव में पहले जूता पहना जाए और बाद में उतारा जाए।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, उन्होंने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मरे हुए लोगों को बुरा-भला न कहो, क्योंकि वे उसकी ओर जा चुके हैं, जो कर्म उन्होंने आगे भेजे हैं।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
अबू ऐयूब अंसारी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "किसी मुसलमान के लिए हलाल नहीं है कि अपने भाई से तीन दिन से अधिक बात-चीत बंद रखे, इस प्रकार कि दोनों मिलें, लेकिन यह भी मुँह फेर ले और वह भी मुँह फेर ले। उन दोनों में उत्तम वह है, जो पहले सलाम करे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
जुबैर बिन मुतइम रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि उन्होंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना : "जन्नत में वह व्यक्ति प्रवेश नहीं करेगा, जो रिश्ते-नातों को काटता हो।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "अल्लाह उस व्यक्ति की ओर नहीं देखेगा, जो अभिमान के कारण अपना कपड़ा लटकाकर चलता हो।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जो चाहता हो कि उसकी रोज़ी फैला दी जाए और उसकी आयु बढ़ा दी जाए, वह अपने रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार करे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस (रज़ियल्लाहु अंहुमा) से वर्णित है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "बड़े पापों में से एक यह है कि आदमी अपने माता-पिता को गाली दे।" कहा गया कि क्या आदमी अपने माता-पिता को गाली दे सकता है? तो फ़रमायाः "हाँ, आदमी किसी के बाप को गाली दे, तो वह उसके बाप को गाली दे और आदमी किसी की माँ को गाली दे, तो वह उसकी माँ को गाली दे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुर रहमान बिन अबू लैला कहते हैं कि काब बिन उजरा मुझसे मिले और कहने लगे : क्या मैं तुम्हें कोई तोहफ़ा न दूँ? अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हमारे पास आए, तो हमने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, हम यह तो जान गए हैं कि हम आप पर सलाम कैसे भेजें, लेकिन हम आप पर दरूद कैसे भेजें? तो आपने फ़रमाया : "कहो : «اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ، اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا بَارَكْتَ عَلَى آلِ إِبْرَاهِيمَ، إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ» (ऐ अल्लाह! मुहम्मद और मुहम्मद के परिवार-परिजन पर रहमत नाज़िल फरमा, जैसे तूने इबराहीम के परिवार-परिजन पर रहमत नाज़िल की थी। बेशक तू प्रशंसा के योग्य और महिमावान है। ऐ अल्लाह! मुहम्मद और मुहम्मद के परिवार-परिजन पर बरकत नाज़िल फरमा, जैसे तूने इबराहीम के परिवार-परिजन पर बरकत नाज़िल की थी। बेशक तू प्रशंसा के योग्य और महिमावान है।)
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "बंदा अपने रब से सबसे अधिक निकट उस समय होता है, जब वह सजदे में होता है। अतः तुम उसमें ख़ूब दुआएँ किया करो।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू उमामा (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुनाः "क़ुरआन पढ़ो; क्योंकि क़ुरआन क़यामत के दिन अपने पढ़ने वालों के लिए सिफ़ारिशी बनकर आएगा।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबूज़र गिफ़ारी (रज़ियल्लाहु अंहु) कहते हैं कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः "क्या मैं तुम्हें वह शब्द न बताऊँ, जो अल्लाह के निकट सबसे प्रिय है? अल्लाह के निकट सबसे प्रिय शब्द हैः 'سبحان اللهِ وبحمدِهِ' (अर्थात अल्लाह पवित्र है अपनी प्रशंसा के साथ।)"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जो अल्लाह एवं अंतिम दिवस पर ईमान रखता हो, वह अच्छी बात करे या चुप रहे, जो अल्लाह तथा अंतिम दिवस पर ईमान रखता हो, वह अपने पड़ोसी को सम्मान दे एवं जो अल्लाह तथा अंतिम दिवस पर ईमान रखता हो, वह अपने अतिथि का सत्कार करे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
जरीर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जो लोगों पर दया नहीं करता, उसपर सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह भी दया नहीं करता।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन अब्बास -रज़ियल्लाहु अनहुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "दो नेमतें ऐसी हैं कि उनमें बहुत-से लोग घाटा उठाते हैं : स्वास्थ्य तथा फुरसत के क्षण।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हुए कहते हैंः “उस ज़ात (अल्लाह) की क़सम, जिसके हाथ में मेरी जान है, यदि तुम लोग गुनाह न करो, तो अल्लाह तुम्हारा विनाश करके ऐसे लोगों को ले आए, जो गुनाह करें और उसके बाद अल्लाह से माफ़ी माँगें, तो अल्लाह उन्हें माफ़ करे।”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अन्हु) अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से रिवायत करते हुए कहते हैंः “उस दिन जहन्नम लाई जाएगी, जिसकी सत्तर हज़ार लगामें होंगी और प्रत्येक लगाम को सत्तर हज़ार फरिश्ते खींच रहे होंगे।”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- सजदे की हालत में यह दुआ किया करते थे : “हे अल्लाह, तू मेरे समस्त पापों को क्षमा कर दे; छोटे-बड़े, अगले-पिछले तथा स्पष्ट-अस्पष्ट सभी को।”
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : ”अल्लाह के पास सबसे घृणित व्यक्ति वह है, जो अत्यधिक झगड़ालू तथा हमेशा विवाद में रहने वाला हो।”
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, उन्होंने कहा : अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से पूछा गया कि कौन-सी चीज़ लोगों को जन्नत में सबसे अधिक प्रवेश कराएगी, तो आपने कहा : “अल्लाह का डर और अच्छा व्यवहार।” इसी तरह आपसे पूछा गया कि कौन-सी चीज़ लोगों को जहन्नम में सबसे अधिक प्रवेश कराएगी, तो आपने कहा : “मुँह और गुप्तांग।”
इसे तिर्मिज़ी, इब्न-ए-माजह और अह़मद ने रिवायत किया है
अबू सईद ख़ुदरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः “शेष रहने वाली नेक चीज़ें हैंः ला इलाहा इल्लल्लाह (अल्लाह के सिवा कोई सच्चा पूज्य नहीं है), सुबहान अल्लाह (अल्लाह पाक है), अल्लाहु अकबर (अल्लाह सबसे बड़ा है) अल-हम्दुलिल्लाह (समस्त प्रकार की प्रशंसा अल्लाह ही के लिए है) तथा ला ह़ौला व ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह (अल्लाह की मदद बिना न हालात बदलने की ताक़त है और न कुछ करने का साहस)।”
इसे इब्ने ह़िब्बान ने रिवायत किया है । - इसे ह़ाकिम ने रिवायत किया है। - इसे नसाई ने रिवायत किया है।
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अज़ान तथा इक़ामत के बीच की जाने वाली दुआ रद्द नहीं होती।"
इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और नसई ने रिवायत किया है
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