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मामलात पर आधारित फ़िक़्ह
क्रय-विक्रय
4 hadiths
क्रय-विक्रय
4
सूद
1
क़र्ज़
4
सुलह तथा पड़ोसियों से संबंधित अहकाम
2
الإجارة
1
वक़्फ़
1
हिबा तथा अतिय्या (दान)
1
क़समें और मन्नतें
3
4 hadiths
ज़ुबैर बिन अव्वाम- रज़ियल्लाहु अन्हु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः तुममें से कोई अपनी रस्सियाँ लेकर पर्वत की ओर जाए और अपनी पीठ पर लकड़ियों का गट्ठर लादकर ले आए तथा उसे बेचे और इस तरह अल्लाह उसके चेहरे को (माँगने के अपमान से) बचा ले तो यह उसके लिए इस बात से बेहतर है कि लोगों से माँगे और लोग उसे दें या देने से मना कर दें।
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
अबू क़तादा (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि उन्होंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुना: ख़रीद- बिक्री में अधिक क़सम खाने से बचो, क्योंकि कसम सामान बेचवाकर मुनाफ़ा सामयिक रूप से बढ़ा तो देती है मगर फिर घटा भी देती है।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
عَن حَكِيمِ بْنِ حِزَامٍ رَضِيَ اللَّهُ عَنْهُ قَالَ: قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ: «البَيِّعَانِ بِالخِيَارِ مَا لَمْ يَتَفَرَّقَا، -أَوْ قَالَ: حَتَّى يَتَفَرَّقَا-، فَإِنْ صَدَقَا وَبَيَّنَا بُورِكَ لَهُمَا فِي بَيْعِهِمَا، وَإِنْ كَتَمَا وَكَذَبَا مُحِقَتْ بَرَكَةُ بَيْعِهِمَا».
متفق عليه
أَنَّ رَسُولَ اللهِ صَلَّى اللهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ مَرَّ عَلَى صُبْرَةِ طَعَامٍ فَأَدْخَلَ يَدَهُ فِيهَا، فَنَالَتْ أَصَابِعُهُ بَلَلًا فَقَالَ: «مَا هَذَا يَا صَاحِبَ الطَّعَامِ؟» قَالَ أَصَابَتْهُ السَّمَاءُ يَا رَسُولَ اللهِ، قَالَ: «أَفَلَا جَعَلْتَهُ فَوْقَ الطَّعَامِ كَيْ يَرَاهُ النَّاسُ؟ @مَنْ غَشَّ فَلَيْسَ مِنِّي».
رواه مسلم