HI
मामलात पर आधारित फ़िक़्ह
सुलह तथा पड़ोसियों से संबंधित अहकाम
2 hadiths
क्रय-विक्रय
4
सूद
1
क़र्ज़
4
सुलह तथा पड़ोसियों से संबंधित अहकाम
2
الإجارة
1
वक़्फ़
1
हिबा तथा अतिय्या (दान)
1
क़समें और मन्नतें
3
2 hadiths
अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा से वर्णित है, उन्होंने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जिबरील मुझे बराबर पड़ोसी के बारे में ताकीद करते रहे, यहाँ तक कि मुझे लगने लगा कि वह उसे वारिस बना देंगे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू शुरैह -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : “अल्लाह की क़सम! वह व्यक्ति मोमिन नहीं है, अल्लाह की क़सम! वह व्यक्ति मोमिन नहीं है, अल्लाह की क़सम! वह व्यक्ति मोमिन नहीं है।” पूछा गया कि ऐ अल्लाह के रसूल! यह बात आप किसके बारे में कह रहे हैं? आपने उत्तर दिया : “जिसका पड़ोसी उसके कष्ट से सुरक्षित नहीं रहता।”
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है