Hadith for the World
Topic

अक़ीदा

135 hadiths

135 hadiths

आइशा (रज़ियल्लाहु अन्हा) से रिवायत है, वह कहती हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : “जो अल्लाह से मिलना पसंद करता है, अल्लाह भी उससे मिलना पसंद करता है और जो अल्लाह से मिलना नापसंद करता है, अल्लाह भी उससे मिलना नापसंद करता है।” मैंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! क्या इससे अभिप्राय मौत को नापसंद करना है? वैसे तो हम सब लोग मौत को नापसंद करते हैं! आपने उत्तर दिया : “मतलब यह नहीं है, बल्कि मतलब यह है कि मोमिन को जब अल्लाह की रहमत, उसकी प्रसन्नता और उसकी जन्नत की ख़ुशख़बरी दी जाती है, तो वह अल्लाह से मिलना पसंद करता है और अल्लाह भी उससे मिलना पसंद करता है। लेकिन काफ़िर को जब अल्लाह के अज़ाब और उसके प्रकोप की सूचना दी जाती है, तो वह अल्लाह से मिलना नापसंद करता है और अल्लाह भी उससे मिलना नापसंद करता है।”इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया : "आमू (Oxus), सिर (Jaxartes), फ़रात और नील, यह सब जन्नत की नदियाँ हैैं।”इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "दया करने वालों पर दयावान अल्लाह दया करता है। तुम ज़मीन वालों पर दया करो, आकाश वाला तुमपर दया करेगा।"इस ह़दीस़ को अबू दावूद, तिर्मिज़ी और अह़मद ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस रज़ियल्लाहु अनहुमा से रिवायत है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब मस्जिद में प्रवेश करते, तो फ़रमाया करते :«أعوذ بالله العظيم، وبوجهه الكريم، وسلطانه القديم، من الشيطان الرَّجِيم» (मैं महान अल्लाह की, उसके सम्मानित चेहरे की और उसकी सनातन सत्ता की शरण माँगता हूँ, धिक्कारे हुए शैतान से।) पूछा गया : बस इतना ही ? मैंने कहा : हाँ। आपने फ़रमाया : जब (मस्जिद में प्रवेश करने वाला) व्यक्ति यह दुआ पढ़ता है तो शैतान कहता है : आज यह सारा दिन मुझसे सुक्षित हो गया।इसे अबू दावूद ने रिवायत किया है
अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है, वह कहते हैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : “अल्लाह तआला जन्नतियों से फ़रमाएगा : ऐ जन्नत वालो! वो कहेंगे : पूरे ध्यान से हाज़िर हैं ऐ हमारे रब और सदा तेरी मेहरबानी के मोहताज हैं। अल्लाह तआला फ़रमाएगा : अब तुम राज़ी हो? वो कहेंगे : क्या अब भी ख़ुश न होंगे, जबकि तूने हमें ऐसी-ऐसी नेमतें प्रदान की हैं, जो अपनी सारी मख़लूक़ में से किसी और को नहीं दीं? फिर अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाएगा : क्या मैं तुम्हें एक ऐसी चीज़ न दूँ, जो इन सबसे भी बढ़कर है? वो कहेंगे : ऐ अल्लाह! अब इन सबसे भी बढ़कर और कौन सी चीज़ हो सकती है? तब अल्लाह तआला फ़रमाएगा : मैं अपनी प्रसन्नता तुम्हें प्रदान करता हूँ। अब कभी मैं तुमसे नाराज़ नहीं हूँगा।”इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने औरत का वस्त्र पहनने वाले मर्द पर और मर्द का वस्त्र पहनने वाली औरत पर लानत फ़रमाई है।इसे नसई ने अल-सुनन अल-कुबरा में तथा इब्न-ए-माजह ने समान अर्थ में एवं अह़मद ने रिवायत किया है
बुरैदा रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जिसने अमानत की क़सम खाई, वह हममें से नहीं है।"इस ह़दीस़ को अबू दावूद और अह़मद ने रिवायत किया है
عن أبي هريرة رضي الله عنه مرفوعاً: «إذا أَحَبَّ اللهُ تعالى العَبْدَ، نَادَى جِبْرِيلَ: إنَّ اللهَ تعالى يُحِبُّ فلاناً، فَأَحْبِبْهُ، فَيُحِبُّهُ جِبْرِيلُ، فَيُنَادِي في أَهْلِ السَّمَاءِ: إنَّ اللهَ يحِبُّ فلاناً، فَأَحِبُّوهُ، فَيُحِبُّهُ أَهْلُ السَّمَاءِ، ثُمَّ يُوضَعُ لَهُ القَبُولُ في الأرضِ». وفي رواية: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم : «إنَّ اللهَ تعالى إذا أَحَبَّ عَبْدًا دَعَا جِبْرِيلَ، فقال: إني أُحِبُّ فلاناً فَأَحْبِبْهُ، فَيُحِبُّهُ جِبْرِيلُ، ثم ينادي في السَّمَاءِ، فيقول: إنَّ اللهَ يُحِبُّ فلاناً فَأَحِبُّوهُ، فَيُحِبُّهُ أَهْلُ السَّمَاءِ، ثُمَّ يُوضَعُ له القَبُولُ في الأرضِ، وإذا أَبْغَضَ عَبْدًا دَعَا جِبْرِيلَ، فيقول: إني أُبْغِضُ فلاناً فَأَبْغِضْهُ. فَيُبْغِضُهُ جِبْرِيلُ، ثُمَّ ينادي في أَهْلِ السَّمَاءِ: إنَّ اللهَ يُبْغِضُ فلاناً فَأَبْغِضُوهُ، ثُمَّ تُوضَعُ له البَغْضَاءُ في الأرضِ».متفق عليه. الرواية الأولى لفظ البخاري، والثانية لفظ مسلم
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने, जबकि मुआज़ रज़ियल्लाहु अनहु सवारी पर आपके पीछे बैठे थे, फ़रमाया : "ऐ मुआज़ बिन जबल!" उन्होंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! मैंं उपस्थित हूँ। आपने फिर कहा : "ऐ मुआज़ बिन जबल!" उन्होंने दोबारा कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, मैं उपस्थि हूँ! आपने फिर कहा : "ऐ मुआज़ बिन जबल!" तो उन्होंने तीसरी बार कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, मैं उपस्थित हूँ! तीसरी बार के बाद आपने फ़रमाया : "जिस बंदे ने सच्चे दिल से यह गवाही दी कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के बंदे तथा उसके रसूल हैं, अल्लाह उसे जहन्नम पर हराम कर देगा।" उन्होंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! क्या मैं लोगों को आपकी यह बात बता न दूँ कि वे ख़ुश हो जाएँ? आपने फ़रमाया : "तब तो वे इसी पर भरोसा कर बैठेंगे।" चुनांचे मृत्यु के समय मुआज़ रज़ियल्लाहु अनहु ने गुनाह के भय से यह हदीस लोगों को बता दी।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: एक व्यक्ति किसी रास्ते से गुज़र रहा था कि उसे सख़्त प्यास लगी। इतने में उसे एक कुआँ मिला, तो उसमें उतरकर उसने पानी पिया। ऊपर आया तो देखा कि एक कुत्ता प्यास के कारण हाँप रहा है और कीचड़ चाट रहा है। उसने अपने दिल में कहा: इस कुत्ते को भी उतनी ही प्यास लगी होगी, जितनी मुझे लगी थी। इसलिए वह कुएँ में उतरा, अपने मोज़े में पानी भरा और उसे अपने मुँह से पकड़कर ऊपर आया तथा कुत्ते को पानी पिलाया। अल्लाह को उसका यह नेक काम इतना पसंद आया कि उसे क्षमा कर दिया। सहाबा ने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! क्या हमें जानवरों की सहायता करने में भी नेकी मिलती है? आपने कहा: हर ज़िंदा कलेजे वाले की सहायता में नेकी है। एक रिवायत में हैः अल्लाह ने उसके इस कार्य की क़द्र की और उसे क्षमा कर दिया तथा जन्नत में दाख़िल होने का सौभाग्य प्रदान किया। तथा एक रिवायत में है: एक कुत्ता एक कुएँ के चारों ओर चक्कर लगा रहा था और क़रीब था कि वह प्यास से हलाक हो जाए कि उसे बनी इसराईल की एक वेश्या ने देख लिया। उसने कुत्ते पर दया करते हुए, अपना मोज़ा उतारा और उसके ज़रिए कुत्ते के लिए पानी निकालकर उसे पिलाया, तो इस पुण्य के कारण उसे क्षमा कर दिया गया।इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है। - इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मुसलमान वह है, जिसकी ज़बान और हाथ से मुसलमान सुरक्षित रहें और मुहाजिर वह है, जो अल्लाह की मना की हुई चीज़ें छोड़ दे।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: काफ़िर जब कोई अच्छा काम करता है, तो उसके बदले में उसे दुनिया में रोज़ी दे दी जाती है, लेकिन जहाँ तक मोमिन की बात है, तो उसकी नेकियों को अल्लाह उसकी आख़िरत के लिए जमा रखता है और उसके आज्ञापालन का बदला उसे दुनिया में रोज़ी भी प्रदान करता है। एक अन्य रिवायत में है: अल्लाह किसी मोमिन की किसी नेकी की उपेक्षा नहीं करता। उसे दुनिया में भी उसका बदला दिया जाता है और आख़िरत में भी उसका बदला दिया जाएगा। लेकिन जहाँ तक काफ़िर की बात है, तो जो अच्छे काम वह अल्लाह के लिए करता है, उनके बदले में उसे दुनिया में रोज़ी दे दी जाती है, यहाँ तक कि जब वह आख़िरत में पहुँचेगा, तो उसके पास कोई नेकी नहीं होगी कि उसका बदला उसे दिया जाए।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
मुआविया -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को यह फरमाते हुए सुना है : "क़यामत के दिन अज़ान देने वालों की गर्दनें सबसे ऊँची होंगी।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि 'इसरा' की रात अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास शराब तथा दूध के दो प्याले लाए गए। आपने दोनों को देखा और दूध के प्याले को ले लिया। यह देखकर जिबरील (अलैहिस्सलाम) ने कहा: सारी प्रशंसा अल्लाह की है, जिसने आपका मार्गदर्शन 'फ़ितरत' की ओर किया। यदि आपने शराब का प्याला उठाया होता, तो आपकी उम्मत गुमराह हो जाती।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
इयाज़ बिन हिमार मुजाशिई (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि एक दिन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने संबोधन में फ़रमाया: सुन लो, मेरे रब ने मुझे आदेश दिया है कि उसने आज मुझे जो बातें सिखाई हैं, उनमें से वह बातें मैं तुम्हें बता दूँ, जो तुम नहीं जानते। (अल्लाह तआला का फ़रमान है) हर वह माल, जो मैंने अपने बंदे को दिया है, वह उसके लिए हलाल है। मैंने अपने सारे बंदों को एक अल्लाह की वंदना करने वाला बनाकर पैदा किया है। फिर शैतान उनके पास आए और उन्हें उनके धर्म से बहकाने लगे। उनपर वह चीज़ें हराम कर दीं, जो मैंने उनके लिए हलाल की थीं। उन्हें आदेश दिया कि उन चीज़ों को मेरा साझी ठहराएँ, जिनके साझी होने की कोई दलील मैंने नहीं उतारी है। अल्लाह ने धरती की ओर देखा, तो कुछ बचे- खुचे अह्ले किताब (यहूदी और ईसाई) को छोड़कर उनके अरब तथा ग़ैरअरब सबसे नाराज़ हुआ तथा फ़रमाया: मैंने तुम्हें इसलिए भेजा है, ताकि तुम्हें आज़माऊँ और तुम्हारे द्वारा अन्य लोगों को भी। मैंने तुमपर एक ऐसी किताब उतारी है, जिसे पानी धो नहीं सकता। तुम उसे सोते- जागते पढ़ते हो। अल्लाह ने मुझे आदेश दिया है कि मैं क़ुरैश को जला डालूँ। मैंने कहा: ऐ मेरे रब! तब तो वे मेरे सर को कुचलकर रोटी बना देंगे। अल्लाह ने कहा: उन्हें निकालो, जैसे उन्होंने तुम्हें निकाला, उनसे युद्ध करो, हम तुम्हें युद्ध करने की शक्ति प्रदान करेंगे, ख़र्च करो, हम तुमपर ख़र्च करेंगे, तुम सेना भेजो, हम उस जैसी पाँच सेनाएँ भेजेंगे तथा अपने मानने वालों को साथ लेकर उन लोगों से युद्ध करो, जो नहीं मानते। अल्लाह ने कहा: जन्नती तीन प्रकार के लोग होंगे: न्यायकारी, सदक़ा करने वाला और अल्लाह की ओर से सत्य पर चलने का सामर्थ्य प्राप्त किया हुआ बादशाह, सभी रिश्तेदारों तथा मुसलमानों के लिए नर्म दिल तथा दयालु व्यक्ति एवं पाकदामन और माँगने से बचने वाला परिवार वाला। अल्लाह ने कहा: जहन्नम में पाँच प्रकार के लोग दाख़िल होंगे: बुद्धिहीन कमज़ोर जो तुम्हारे अधीन हो और परिवार तथा धन की चाहत न रखता हो, ऐसा छल करने वाला, जिसका लालच छुपा नहीं रहता, छोटी से छोटी चीज़ के बारे में भी छल करने पर उतर आता हो और ऐसा व्यक्ति, जो तुम्हें सुबह व शाम तुम्हारे परिवार तथा धन के बारे में धोखा दे। तथा कंजूस अथवा झूठे व्यक्ति और ऐसे बदचलन एवं अशिष्ट आदमी का भी ज़िक्र किया, जो गंदी तथा अश्लील भाषा प्रयोग करता हो।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अनहुमा) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) यह दुआ किया करते थेः «ربِّ أَعِنِّي ولا تُعِن عليَّ، وانصرني ولا تنصر عليَّ، وامكر لي ولا تمكر عليَّ، واهدني ويسِّر هُدايَ إليَّ، وانصرني على مَن بغى عليَّ، اللهم اجعلني لك شاكرًا، لك ذاكرًا، لك راهبًا، لك مِطواعًا، إليك مُخْبِتًا، أو مُنِيبا، رب تقبَّل توبتي، واغسل حَوْبتي، وأجب دعوتي، وثبِّت حُجَّتي، واهدِ قلبي، وسدِّد لساني، واسْلُلْ سَخِيمةَ قلبي». अर्थात, ऐ मेरे रब! मेरी सहायता कर और मेरे विरुद्ध सहायता न कर, मुझे विजय प्रदान कर और किसी को मेरे विरुद्ध विजय प्रदान न कर, मेरे हक़ में योजना बना तथा मेरे विरुद्ध योजना मत बना, मुझे सच्चाई के रास्ते पर चला और सच्चाई के रास्ते पर चलना मेरे लिए आसान कर तथा मेरे विरुद्ध विपलव करने वाले पर मुझे विजयी बना। ऐ अल्लाह! मुझे अपना शुक्र अदा करने वाला, अपना ज़िक्र करने वाला, अपने से डरने वाला, अपना अनुकरण करने वाला और अपने आगे झुकने वाला या अपनी ओर लौटने वाला बना। ऐ मेरे रब! मेरी तौबा क़बूल कर, मेरे गुनाह धो दे, मेरी दुआ क़बूल कर, मेरी दलील को सिद्ध कर, मेरे दिल को सच्चा रास्ता दिखा, मेरी ज़बान को दुरुस्त रख और मेरे दिल के मैल- कुचैल को निकाल दे।इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "हमारा बरकत वाला तथा उच्च रब हर रात, जबकि रात का एक तिहाई भाग शेष रह जाता है, दुनिया से निकट वाले आसमान पर उतरकर फरमाता है : कौन है जो दुआ करे कि मैं उसे क़बूल करूँ; कौन है जो मुझसे माँगे कि मैं उसे प्रदान करूँ, कौन है जो मुझसे क्षमा माँगे कि मैं उसे क्षमा कर दूँॽ''इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अनस (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है, वह कहते हैं: ऐसा लगता है कि आज भी मैं बनी ग़नम की गली में वह उड़ती हुई धूल देख रहा हूँ, जो जिबरील (सलवातुल्लाहि अलैहि) के क़ाफ़िले से उठी थी, जब वह अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के साथ बनू क़ुरैज़ा की ओर चले थे।इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: मदीने की गुज़रगाहों पर फरिश्ते नियुक्त हैं, यहाँ न ताऊन प्रवेश कर सकता है, न दज्जाल।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
ज़ैद बिन साबित (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि हम अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास रहकर चर्मपत्रों से क़ुरआन एकत्र कर रहे थे। इसी बीच आपने कहा: शाम की धरती धन्य है! हमने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! आपने ऐसा क्यों कहा? तो आपने फ़रमाया: क्योंकि दयावान (अल्लाह) के फ़रिश्ते उसपर अपने पर फैलाए हुए हैं।इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
जाबिर (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: इब्लीस (शैतान) अपना सिंहासन पानी पर रखता है। फिर अपनी सेनाओं को भेजता है। उसके यहाँ निकटतम स्थान उसे प्राप्त होता है, जो सबसे अधिक उपद्रव मचाने वाला हो। उनमें एक आकर कहता है: मैंने (आज) ऐसा और ऐसा किया है। इब्लीस कहता है: तुमने कुछ नहीं किया। फिर कोई आता है और कहता है: मैंने अमुक व्यक्ति को नहीं छोड़ा, यहाँ तक कि उसके तथा उसकी पत्नी के बीच जुदाई डाल दी। तब शैतान उसे अपने निकट करता है और कहता है: हाँ, तुमने अच्छा किया है। आमश कहते हैं: मैं समझता हूँ कि उन्होंने यह भी कहा था: फिर वह उसे सीने से लगा लेता है।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : ''जिसने अज़ान सुनते समय यह दुआ पढ़ी : "ऐ अल्लाह! इस संपूर्ण आह्वान तथा खड़ी होने वाली नमाज़ के रब! मुहम्मद -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को वसीला (जन्नत का सबसे ऊँचा स्थान) और श्रेष्ठतम दर्जा प्रदान कर और उन्हें वह प्रशंसनीय स्थान प्रदान कर, जिसका तूने उन्हें वचन दिया है।" उसके लिए क़यामत के दिन मेरी सिफ़ारिश अनिवार्य हो जाएगी।''इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
अबू मरसद ग़नवी रज़ियल्लाहु अनहु बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : “क़ब्रों पर मत बैठो और उनकी ओर मुँह करके नमाज़ न पढ़ो।”इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
वासिला बिन असक़ा (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः “अल्लाह ने इसमाईल की संतानों में से किनाना को चुन लिया, और किनाना में से क़ुरैश को चुन लिया, तथा क़ुरैश में से बनू हाशिम को चुन लिया, एवं बनू हाशिम में से मुझे चुन लिया, और मैं आदम की संतान का सरदार हूँ, लेकिन मैं गर्व नहीं करता हूँ। सबसे पहले मेरी ही क़ब्र खुलेगी, सबसे पहले मैं ही सिफ़ारिश करूँगा और सबसे पहले मेरी ही सिफ़ारिश क़बूल की जाएगी।”इसे इब्ने ह़िब्बान ने रिवायत किया है ।