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दुआओं तथा अज़कार पर आधारित फ़िक़्ह
मस्जिद में प्रवेश करने और उससे बाहर निकलने के अज़कार
2 hadiths
नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम के ज़िक्र का तरीक़ा
5
सर्वशक्तिमान एवं महान अल्लाह के ज़िक्र के लाभ
8
सुबह तथा शाम के अज़कार
4
साधारण अज़कार
5
घर में प्रवेश करने और घर से निकलने के अज़कार
2
शौचालय में प्रवेश करने और उससे बाहर निकलने के अज़कार
1
मस्जिद में प्रवेश करने और उससे बाहर निकलने के अज़कार
2
कठिन परिस्थितियों में कहने के अज़कार
1
मुसीबत के समय के अज़कार
12
दुआ के अहकाम
1
दुआ के आदाब
2
दुआ ग्रहण होने में सहायक चीज़ें तथा उसे ग्रहण न होने देने वाली वस्तुएँ
4
मासूर दुआएँ
18
2 hadiths
अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस रज़ियल्लाहु अनहुमा से रिवायत है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम जब मस्जिद में प्रवेश करते, तो फ़रमाया करते :«أعوذ بالله العظيم، وبوجهه الكريم، وسلطانه القديم، من الشيطان الرَّجِيم» (मैं महान अल्लाह की, उसके सम्मानित चेहरे की और उसकी सनातन सत्ता की शरण माँगता हूँ, धिक्कारे हुए शैतान से।) पूछा गया : बस इतना ही ? मैंने कहा : हाँ। आपने फ़रमाया : जब (मस्जिद में प्रवेश करने वाला) व्यक्ति यह दुआ पढ़ता है तो शैतान कहता है : आज यह सारा दिन मुझसे सुक्षित हो गया।
इसे अबू दावूद ने रिवायत किया है
अबू हुमैद या अबू उसैद से रिवायत है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जब तुममें से कोई मस्जिद में प्रवेश करे, तो यह दुआ पढ़े : "اللَّهُمَّ افْتَحْ لِي أَبْوَابَ رَحْمَتِكَ" (ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के द्वार खोल दे) और जब मस्जिद से निकले, तो यह दुआ पढ़े : "اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ مِنْ فَضْلِكَ" (ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरा अनुग्रह माँगता हूँ।)
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है