Hadith for the World
Topic

फ़िक़्ह तथा उसूल-ए-फ़िक़्ह

288 hadiths

288 hadiths

अबू सईद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "ऐ अबू सईद! जो अल्लाह के रब होने, इस्लाम के धर्म होने और मुहम्मद के रसूल होने से संतुष्ट हो गया, उसके लिए जन्नत अनिवार्य हो गई।" आपकी इस बात से अबू सईद -रज़ियल्लाहु अन्हु- को आश्चर्य हुआ। अतः बोले : ऐ अल्लाह के रसूल! इसे ज़रा दोहरा दें। अतः आपने इस वाक्य को दोहरा दिया और फ़रमाया : "एक और कार्य है, जिसके ज़रिए जन्नत में बंदे की एक सौ श्रेणियाँ ऊँची कर दी जाती हैं, जबकि उसकी हर दो श्रेणियों के बीच उतना फ़ासला है, जितना आकाश और धरती के बीच है।" उन्होंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! वह कार्य है कौन-सा? फ़रमाया : "अल्लाह के मार्ग में जिहाद करना, अल्लाह के मार्ग में जिहाद करना।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू क़तादा रज़ियल्लाहु अनहु कहते हैं कि वह अपने एक क़र्ज़दार की तलाश में थे। और वह छुपते फिर रहा था। एक बार मिल गया, तो बोला कि मैं अभाव का शिकार हूँ। उन्होंने अल्लाह की क़सम खाने को कहा, तो उसने अल्लाह की क़सम खा ली। तब अबू क़तादा रज़ियल्लाहु अनहु ने कहा : मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है : "जिसे यह पसंद हो कि अल्लाह उसे क़यामत के दिन की परेशानियों से मुक्त कर दे, उसे चाहिए कि किसी अभावग्रस्त व्यक्ति को मोहलत दे या उसका क़र्ज़ माफ़ कर दे।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, उन्होंने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जिसने ईमान के साथ और नेकी की आशा मन में लिए हुए, रमज़ान के रोज़े रखे, उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, उन्होंने कहा : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जो ईमान के साथ और नेकी की आशा मन में लिए हुए, लैलतुल क़द्र (सम्मानित रात्रि) में कयाम करता है, उसके पिछले सारे गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
सालिम बिन अब्दुल्लाह बिन उमर बिन ख़त्ताब- रज़ियल्लाहु अन्हुम- अपने पिता से रिवायत करते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः अब्दुल्लाह अच्छा आदमी है, यदि वह रात को नमाज़ पढ़ता। सालिम कहते हैंः इसके बाद (मेरे पिता) अब्दुल्लाह रात को कम ही सोया करते थे।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू सईद ख़ुदरी -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते हुए सुना है : "जो अल्लाह के पथ में एक दिन रोज़ा रखेगा, उसके चेहरे को अल्लाह (जहन्नम की) आग से सत्तर साल दूर कर देगा।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
सह्ल बिन साद -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "लोग उस समय तक भलाई में रहेंगे, जब तक इफ़तार करने में जल्दी करते रहेंगे।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
ज़ैद बिन साबित -रज़ियल्लाहु अनहु- से रिवायत है, वह कहते हैं : "हमने अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के साथ सहरी का खाना खाया, फिर नमाज के लिए चले गए। अनस कहते हैं : मैंने पूछा : अज़ान और सहरी के बीच कितना समय था? उन्होंने जवाब दिया : पचास आयतें पढ़ने के बराबर समय।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- की पत्नी मुसलमानों की माता आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है कि : अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मृत्यु तक रमज़ान के अंतिम दस दिनों में एतिकाफ़ करते रहे। आपके बाद आपकी पत्नियों ने भी एतिकाफ़ किया।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "तुम लोग सहरी खाया करो, क्योंकि सहरी में बरकत है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
जाबिर बिन अब्दुल्लाह -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- का वर्णन है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम एक यात्रा पर थे, कि एक भीड़ देखी, जहाँ एक व्यक्ति के लिए छाँव का प्रबंध किया गया था। आपने पूछा कि : "यह क्या है?" तो लोगों ने बताया कि यह रोज़ेदार है। आपने फ़रमाया : "यात्रा में रोज़ा रखना पुण्य का कार्य नहीं है", तथा सहीह मुस्लिम की एक रिवायत में है : "तुम अल्लाह की ओर से मिली हुई छूट को सहृदय स्वीकार करो।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "रमज़ान से एक या दो दिन पहले रोज़े न रखो। परन्तु जो व्यक्ति (पहले से) रोज़े रख रहा हो, वह रख सकता है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अनहुमा- से रिवायत है, वह कहते हैं : अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने सदक़ा-ए-फ़ित्र मुसलमान ग़ुलाम और आज़ाद, मर्द और औरत, छोटे और बड़े (सब पर) एक साअ् खजूर या एक साअ् जौ फ़र्ज़ क़रार दिया है और आदेश दिया है कि उसे नमाज़ के लिए लोगों के निकलने से पहले-पहले अदा कर दिया जाए।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "किसी मुसलमान औरत के लिए जायज़ नहीं कि एक दिन एवं एक रात की यात्रा किसी महरम के बिना करे।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
आइशा और उम्मे सलमा- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- का वर्णन है कि कभी-कभी इस हाल में फ़ज्र की नमाज़ का समय आ जाता कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) अपनी पत्नियों से संभोग के कारण नापाकी की अवस्था में होते। फिर इसके बाद स्नान करते और रोज़ा रखते।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जो रोज़ा रख कर भूल कर खा ले अथवा पी ले, वह अपना रोज़ा पूरा करे, क्योंकि उसे अल्लाह ने खिलाया एवं पिलाया है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है, वह कहते हैं : मुझे मेरे दोस्त (नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने तीन चीज़ों की वसीयत की है : हर महीना तीन दिन रोज़ा रखने, चाश्त की दो रकात नमाज़ पढ़ने और सोने से पहले वित्र पढ़ने की।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "शब-ए-क़द्र को (रमज़ान के) अंतिम दस दिनों की विषम रातों में तलाश करो।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
उमर बिन ख़त्ताब- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः जब रात्रि इधर से आ जाए और दिन उधर से चला जाए, तो जान लो कि इफ़तार का समय हो गया।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "जब तुम (रमज़ान का) चाँद देखो, तो रोज़ा रखो और जब (शव्वाल का) चाँद दखो, तो रोज़ा रखना बंद कर दो। (और) अगर आकाश बादल से ढका हुआ हो, तो उसका अंदाज़ा लगा लो। (यानी महीने के तीस दीन पूरे कर लो।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबुल हौरा सादी कहते हैं : मैंने हसन बिन अली रज़ियल्लाहु अनहुमा से पूछा : आपने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से क्या याद किया है? उन्होंने उत्तर दिया : मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम से यह याद किया है : "जो चीज़ तुम्हें संदेह में डाले, उसे छोड़कर वह अख़्तियार करो, जो संदेह में न डाले। क्योंकि सच्चाई इत्मीनान है और झूठ शक व शुबह है।"इसे तिर्मिज़ी, नसई और अह़मद ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, उन्होंने कहा कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "आदमी का जमात के साथ नमाज़ पढ़ना बाज़ार या घर में नमाज़ पढ़ने की तुलना में (पुण्य के मामले में) बीस से अधिक दर्जा बढ़ा हुआ होता है। इसका कारण यह है कि जब तुममें से कोई अच्छी तरह वज़ू करता है, फिर नमाज़ के इरादे से मस्जिद आता है और नमाज़ के सिवा कोई चीज़ उसे घर से नहीं निकालती, तो मस्जिद पहुँचने तक वह जो भी क़दम उठाता है, उसके बदले में उसका एक दर्जा ऊँचा होता है और एक गुनाह मिटाया जाता है। फिर जब मस्जिद में प्रवेश करता है तो जब तक नमाज़ उसे रोके रखती है, वह नमाज़ में होता है। तथा फ़रिश्ते तुममें से किसी के लिए रहमत की दुआ करते रहते हैं, जब तक वह उस जगह में होता है, जहाँ नमाज़ पढ़ी है। वे कहते रहते हैं : ऐ अल्लाह! इसपर दया कर, ऐ अल्लाह! इसे क्षमा कर दे और ऐ अल्लाह! इसकी तौबा कबूल कर। यह सिलसिला उस समय तक जारी रहता है, जब तक वहाँ किसी को कष्ट न दे, जब तक वहाँ उसका वज़ू टूट न जाए।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को कहते हुए सुनाः मैं तुम्हें जिस चीज़ से रोकूँ, उससे बचते रहो और जिस चीज का आदेश दूँ, उसे जहाँ तक हो सके किए जाओ, क्योंकि तुमसे पहले के लोगों को उनके अधिक प्रश्नों और नबियों के विरोध ने हलाक किया है।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू ज़र्र- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः मेरे आगे मेरी उम्मत के अच्छे और बुरे सब कर्म पेश किए गए। तो मैंने उसके अच्छे कर्मों में रास्ते से कष्टदायक वस्तु का हटाना भी पाया और उसके बुरे कर्मों में वह थूक भी पाया, जो मस्जिद में फेंका गया हो और उसे साफ़ न किया गया हो।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।