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नमाज़
नमाज़ की अनिवार्यता तथा नमाज़ छोड़ने वाले का हुक्म
5 hadiths
नमाज़ की अनिवार्यता तथा नमाज़ छोड़ने वाले का हुक्म
5
नमाज़ की फ़ज़ीलत
10
अज़ान तथा इक़ामत
6
वो समय, जिनमें नमाज़ पढ़ना मना है
2
नमाज़ की शर्तें
3
नमाज़ के अर्कान
2
واجبات الصلاة
1
नमाज़ की सुन्नतें
1
नमाज़ का तरीक़ा
10
नमाज़ के अज़कार
15
नमाज़ तोड़ देने वाली चीज़ें
1
नमाज़ियों से होने वाली गलतियाँ
5
नमाज़ में ग़लती, तिलावत तथा शुक्र के सजदे
4
जमात से पढ़ी जाने वाली नमाज़ की फ़ज़ीलत तथा अहकाम
7
इमाम तथा उसके पीछे नमाज़ पढ़ने वाले के अहकाम
4
उज़्र वाले लोगों की नमाज़
1
जुमे की नमाज़
7
नफ़ल नमाज़
40
सूरज तथा चाँद ग्रहण की नमाज़
2
बारिश माँगने की नमाज़
1
मस्जिदों के आदाब
9
5 hadiths
अम्र बिन शोऐब अपने पिता के माध्यम से अपने दादा से वर्णन करते हैं, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "अपने बच्चों को नमाज़ का आदेश दो, जब उनकी आयु सात साल हो जाए, और उन्हें उसके लिए मारो, जब उनकी आयु दस साल हो जाए तथा उनके बिसतर अलग कर दो।"
इसे अबू दावूद ने रिवायत किया है
बुरैदा बिन हुसैब रज़ियल्लाहु अनहु से वर्णित है, वह कहते हैं : अस्र की नमाज़ जल्दी पढ़ा करो। क्योंकि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जिसने अस्र की नमाज़ छोड़ दी, उसके सभी कर्म व्यर्थ हो गए।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन अमर रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "इस्लाम की बुनियाद पाँच चीज़ों पर क़ायम है : इस बात की गवाही देना कि अल्लाह के अतिरिक्त कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के रसूल हैं, नमाज़ स्थापित करना, ज़कात देना, हज करना और रमज़ान मास के रोज़े रखना।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जो व्यक्ति किसी नमाज़ को भूल जाए, तो वह उसे उस समय पढ़ ले, जब याद आ जाए। इसके सिवा उसका कोई कफ़्फ़ारा (प्रायश्चित) नहीं है : {وَأَقِمِ الصَّلاةَ لِذِكْرِي} (तथा मेरे स्मरण (याद) के लिए नमाज़ स्थापित कर।) [सूरा ताहा : 14] "
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
जाबिर रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को फ़रमाते हुए सुना है : "आदमी के बीच तथा कुफ़्र एवं शिर्क के बीच की रेखा नमाज़ छोड़ना है।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है