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नमाज़
नमाज़ में ग़लती, तिलावत तथा शुक्र के सजदे
4 hadiths
नमाज़ की अनिवार्यता तथा नमाज़ छोड़ने वाले का हुक्म
5
नमाज़ की फ़ज़ीलत
10
अज़ान तथा इक़ामत
6
वो समय, जिनमें नमाज़ पढ़ना मना है
2
नमाज़ की शर्तें
3
नमाज़ के अर्कान
2
واجبات الصلاة
1
नमाज़ की सुन्नतें
1
नमाज़ का तरीक़ा
10
नमाज़ के अज़कार
15
नमाज़ तोड़ देने वाली चीज़ें
1
नमाज़ियों से होने वाली गलतियाँ
5
नमाज़ में ग़लती, तिलावत तथा शुक्र के सजदे
4
जमात से पढ़ी जाने वाली नमाज़ की फ़ज़ीलत तथा अहकाम
7
इमाम तथा उसके पीछे नमाज़ पढ़ने वाले के अहकाम
4
उज़्र वाले लोगों की नमाज़
1
जुमे की नमाज़
7
नफ़ल नमाज़
40
सूरज तथा चाँद ग्रहण की नमाज़
2
बारिश माँगने की नमाज़
1
मस्जिदों के आदाब
9
4 hadiths
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु् अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जब आदम की संतान सजदे वाली आयत पढ़ती है और सजदा करती है, तो शैतान रोता हुआ दूर हट जाता है। वह कहता है: हाय मेरी बरबादी! आदम की संतान को सजदे का आदेश दिया गया और उसने सजदा किया, तो उसके लिए जन्नत है, जबकि मुझे सजदे का आदेश दिया गया, तो मैंने इनकार कर दिया, अतः मेरे लिए जहन्नम है।
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : "जब तुममें से किसी को नमाज़ में संदेह हो जाए और याद न रहे कि कितनी रकात पढ़ी है, तीन अथवा चार? तो संदेह को परे डाल दे और जिस पर यक़ीन हो, उसे आधार बनाए। फिर सलाम फेरने से पहले दो सजदे कर ले। ऐसे में, अगर उसने पाँच रकातें पढ़ ली हैं, तो दो सजदे उसकी नमाज़ को सम संख्या वाली नमाज़ बना देंगे और अगर उसने पूरी चार रकात पढ़ी है, तो दोनों सजदे शैतान के अपमान का सामान बन जाएँगे।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू राफ़े का वर्णन है, वह कहते हैं कि अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- ने उन्हें नमाज़ पढ़ाते समय सूरा «إذا السماء انْشَقَّتْ» पढ़ी और तिलावत का सजदा किया। जब नमाज़ पढ़ चुके, तो उन्होंने बताया कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने भी इस सूरा में सजदा किया है।
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू बकरा -रज़ियल्लाहु अंहु- नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के बारे में कहते हैं कि जब आपके पास कोई ख़ुशी की बात आती या आपको कोई खुशखबरी दी जाती , तो अल्लाह के शुक्राने के तौर पर सजदे में चल जाते।
इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।