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नमाज़
नमाज़ियों से होने वाली गलतियाँ
5 hadiths
नमाज़ की अनिवार्यता तथा नमाज़ छोड़ने वाले का हुक्म
5
नमाज़ की फ़ज़ीलत
10
अज़ान तथा इक़ामत
6
वो समय, जिनमें नमाज़ पढ़ना मना है
2
नमाज़ की शर्तें
3
नमाज़ के अर्कान
2
واجبات الصلاة
1
नमाज़ की सुन्नतें
1
नमाज़ का तरीक़ा
10
नमाज़ के अज़कार
15
नमाज़ तोड़ देने वाली चीज़ें
1
नमाज़ियों से होने वाली गलतियाँ
5
नमाज़ में ग़लती, तिलावत तथा शुक्र के सजदे
4
जमात से पढ़ी जाने वाली नमाज़ की फ़ज़ीलत तथा अहकाम
7
इमाम तथा उसके पीछे नमाज़ पढ़ने वाले के अहकाम
4
उज़्र वाले लोगों की नमाज़
1
जुमे की नमाज़
7
नफ़ल नमाज़
40
सूरज तथा चाँद ग्रहण की नमाज़
2
बारिश माँगने की नमाज़
1
मस्जिदों के आदाब
9
5 hadiths
आइशा रज़ियल्लाहु अनहा का वर्णन है, वह कहती हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को कहते हुए सुना है : "खाने की मौजूदगी में नमाज़ न पढ़ी जाए और न उस समय जब इन्सान को पेशाब-पाखाना की हाजत सख़्त हो।"
इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अनस बिन मालिक (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने एक बार (मस्जिद के अंदर) क़िबले की ओर थूक देखा, तो यह आपको बहुत बुरा लगा और इसका प्रभाव आपके चेहरे पर देखा गया। चुनांचे आप खड़े हुए और उसे अपने हाथ से साफ़ किया तथा फ़रमाया : "तुममें से कोई जब नमाज़ में खड़ा होता है, तो वह अपने रब से व्यक्तिगत रूप से बात कर रहा होता है या उसका रब उसके और क़िबले के बीच होता है। इसलिए, तुममें से कोई (नमाज़ की हालत में) क़िबले की ओर न थूके। बल्कि बाएँ तरफ़ या अपने क़दमों के नीचे थूके।" फिर आपने अपनी चादर के एक किनारे को पकड़कर उसमें थूका और उसे आपस में रगड़ दिया और कहा : "या फिर इस तरह करे।"
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अनस बिन मालिक -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "कुछ लोगों को क्या हो गया है कि वे नमाज़ में अपनी नज़रें आकाश की ओर उठाते हैं?" आपने इसके बारे में बड़ी सख़्त बात करते हुए यहाँ तक फ़रमा दिया : "वे इससे ज़रूर रुक जाएँ, वरना उनकी आँखें उचक ली जाएँगी।"
इसे बुख़ारी ने रिवायत किया है
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "जो व्यक्ति किसी नमाज़ को भूल जाए, तो वह उसे उस समय पढ़ ले, जब याद आ जाए। इसके सिवा उसका कोई कफ़्फ़ारा (प्रायश्चित) नहीं है : {وَأَقِمِ الصَّلاةَ لِذِكْرِي} (तथा मेरे स्मरण (याद) के लिए नमाज़ स्थापित कर।) [सूरा ताहा : 14] "
इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहु बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "सबसे बुरा चोर वह है, जो अपनी नमाज़ में चोरी करता है।" किसी सहाबी ने पूछा कि नमाज़ में चोरी करने का क्या मतलब है? आपने उत्तर दिया : "रुकू एवं सजदा संपूर्ण रूप से न किया जाए।"
इसे इब्ने ह़िब्बान ने रिवायत किया है