Hadith for the World
Topic

फ़ज़ीलतें तथा आदाब

288 hadiths

288 hadiths

अबू सईद ख़ुदरी तथा अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : ''जब जन्नती जन्नत में प्रवेश कर जाएँगे, तो एक पुकारने वाला पुकार कर कहेगा : तुम सदा स्वस्थ रहोगे, कभी बीमार नहीं होगे। तुम सदा जीवित रहोगे तथा कभी मरोगे नहीं। तुम सदा जवान रहोगे, कभी बूढ़े नहीं होगे। तुम सदा सुख-सुविधाओं के आनंद में रहोगे, कभी परेशानी का सामना नहीं करोगे।'' अल्लाह तआला का फरमान है : {उन्हें पुकार कर कहा जाएगा : यही वह जन्नत है, जिसके वारिस तुम उसके कारण बनाए गए हो, जो तुम किया करते थे।} [सूरा अल-आराफ़ : 43]इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अन्हु से वर्णित है, वह कहते हैं अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया है : “अल्लाह तआला जन्नतियों से फ़रमाएगा : ऐ जन्नत वालो! वो कहेंगे : पूरे ध्यान से हाज़िर हैं ऐ हमारे रब और सदा तेरी मेहरबानी के मोहताज हैं। अल्लाह तआला फ़रमाएगा : अब तुम राज़ी हो? वो कहेंगे : क्या अब भी ख़ुश न होंगे, जबकि तूने हमें ऐसी-ऐसी नेमतें प्रदान की हैं, जो अपनी सारी मख़लूक़ में से किसी और को नहीं दीं? फिर अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाएगा : क्या मैं तुम्हें एक ऐसी चीज़ न दूँ, जो इन सबसे भी बढ़कर है? वो कहेंगे : ऐ अल्लाह! अब इन सबसे भी बढ़कर और कौन सी चीज़ हो सकती है? तब अल्लाह तआला फ़रमाएगा : मैं अपनी प्रसन्नता तुम्हें प्रदान करता हूँ। अब कभी मैं तुमसे नाराज़ नहीं हूँगा।”इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू मूसा रज़ियल्लाहु अन्हु अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- से रिवायत करते हैं कि आपने फ़रमाया है : "मोमिन के लिए जन्नत के अंदर एक खोखले मोती से बना एक तंबू होगा, जिसकी ऊँचाई साठ मील होगी। उसमें मोमिन की पत्नियाँ होंगी, जिनके पास वह आए-जाएगा और वह पत्नियाँ एक-दूसरे को देख नहीं सकेंगी।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जिसने पहले ही वार में किसी छिपकली को मारा, उसे इतनी नेकी मिलेगी और जिसने दूसरे वार में मारा उसे इतनी नेकी मिलेगी और जिसने तीसरे वार में मारा, उसे इतनी नेकी मिलेगी। एक रिवायत में है: जिसने पहली वार में छिपकली को मार दिया, उसके लिए सौ नेकी लिख दी जाएगी और दूसरे वार में मारने पर उस से कम और तीसरे वार में मारने पर उस से भी कम।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू सईद खु़दरी (रज़ियल्लाहु अनहु) से वर्णित है कि एक महिला अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आई और उसने कहा: ऐ अल्लाह के रसूल! मर्द लोग आपकी हदीस लेकर चले गए। इसलिए आप हमारे लिए भी एक दिन निर्धारित कर दें, जिसमें हम उपस्थित हों और आप हमें वह चीज़ सिखाएँ जो आपको अल्लाह ने सिखाई है। आप ने फ़रमाया: फ़लाँ फ़लाँ दिन तुम लोग एकत्रित हो जाओ। वायदे के मुताबिक, औरतें एकत्रित हो गईं और अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) उनके पास आए और उन्हें अल्लाह की सिखाई हुई बातों में से कुछ सिखाया, फिर फ़रमाया: तुममें से जिस महिला की तीन संतानें मर जाएँ, वह उसके लिए जहन्नम से आड़ बन जाती हैं। इस पर एक महिला ने पूछा: और यदि दो मरें तो? अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: यदि दो मरें तो भी।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अनहु) से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जब कोई आदमी कहे कि लोग हलाक व बर्बाद हो गए, तो वह सबसे अधिक हलाक व बर्बाद होने वाला है।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
हिशाम बिन हकीम बिन हिज़ाम (रज़ियल्लाहु अनहुमा) से वर्णित है कि वह शाम में कुछ नब्तियों के पास से गुज़रे, जिन्हें धूप में खड़ा किया गया था और उनके सिरों पर तेल डाला गया था। तो उन्होंने कहा: यह क्या है? कहा गया: टैक्स न देने के कारण सज़ा दी जा रही है। तो हिशाम ने कहा: मैं गवाही देता हूँ कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुना है: बेशक अल्लाह तआला उन लोगों को -क़यामत के दिन- यातना देगा जो दुनिया में लोगों को यातना देते हैं। फिर वहाँ के मेयर के पास गए और उनसे बात की, तो उसने उन्हें छोड़ने का आदेश दिया।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू ज़र (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से कहा गया: आपका क्या ख़्याल है उस आदमी के प्रति जो नेक कर्म करता है और लोग उसकी उसपर प्रशंसा करते हैं? आपने फ़रमाया: यह मोमिन के लिए जल्द मिलने वाली शुभ सूचना है।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू सईद ख़ुदरी रज़ियल्लाहु अनहु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "एक मर्द दूसरे मर्द के गुप्तांग और एक महिला दूसरी महिला के गुप्तांग को न देखे और न ही दो मर्द एक ही कपड़े में लेटें और न दो महिलाएँ एक कपड़े में लेटें।"इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है
इब्ने उमर (रज़ियल्लाहु अनहुमा) से मरफ़ूअन रिवायत है: सोते समय अपने घरों में आग जला कर न छोड़ो।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
आइशा (रज़ियल्लाहु अनहा) कहती हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) जब तेज़ हवाएँ चलतीं तो यह दुआ पढ़ा करते थे: «اللَّهُمَّ إنِّي أسْأَلُك خَيرها وخير ما فيها وخَير ما أُرسِلت به، وأعوذ بك من شرِّها وشرِّ ما فيها وشرِّ ما أُرسِلت به» अर्थात, “ऐ अल्लाह ! मैं तुझसे इसकी भलाई तथा जो भलाई इसमें रखी गई है और जिस भलाई के साथ यह भेजी गई है, का सवाल करता हूँ और तेरी शरण माँगता हूँ, इसकी बुराई से तथा उस बुराई से जो इसमें में रखी गई है और उस बुराई से जिस के साथ यह भेजी गई है।”इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू सईद खु़दरी रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ईद अल-अज़हा या ईद अल-फ़ित्र के दिन ईदगाह की ओर निकले और इस दौरान औरतों के निकट से गुज़रे, तो फ़रमाया : "ऐ औरतो! तुम सदक़ा किया करो, क्योंकि मैंने जहन्नम के अंदर तुम्हारी संख्या अधिक देखी है।" औरतों ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! ऐसा क्यों है? आपने उत्तर दिया : "तुम लानत अधिक करती हो और पति की नाशुक्री करती हो। मैंने विवेक एवं दीन में अधूरी होने के बावजूद तुम (औरतों) से ज़्यादा किसी को भी एक विवेकशील व्यक्ति के विवेक को भ्रमित कर देने वाला नहीं देखा।" औरतों ने पूछा : ऐ अल्लाह के रसूल! हमारे दीन और हमारे विवेक की कमी क्या है? आपने उत्तर दिया : "क्या औरत की गवाही मर्द की आधी गवाही के बराबर नहीं है?" उन्होंने कहा : जी है। आपने कहा : "यही उसके विवेक की कमी को दर्शाता है। क्या ऐसा नहीं है कि जब औरत माहवारी की अवस्था में होती है, तो न नमाज़ पढ़ सकती है, न रोज़ा रख सकती है?" औरतों ने कहा : जी, ऐसा तो है। आपने फ़रमाया : "यही उसके दीन की कमी को दर्शाता है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अनहु का वर्णन है कि अल्लह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने, जबकि मुआज़ रज़ियल्लाहु अनहु सवारी पर आपके पीछे बैठे थे, फ़रमाया : "ऐ मुआज़ बिन जबल!" उन्होंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! मैंं उपस्थित हूँ। आपने फिर कहा : "ऐ मुआज़ बिन जबल!" उन्होंने दोबारा कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, मैं उपस्थि हूँ! आपने फिर कहा : "ऐ मुआज़ बिन जबल!" तो उन्होंने तीसरी बार कहा : ऐ अल्लाह के रसूल, मैं उपस्थित हूँ! तीसरी बार के बाद आपने फ़रमाया : "जिस बंदे ने सच्चे दिल से यह गवाही दी कि अल्लाह के सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं है और मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम अल्लाह के बंदे तथा उसके रसूल हैं, अल्लाह उसे जहन्नम पर हराम कर देगा।" उन्होंने कहा : ऐ अल्लाह के रसूल! क्या मैं लोगों को आपकी यह बात बता न दूँ कि वे ख़ुश हो जाएँ? आपने फ़रमाया : "तब तो वे इसी पर भरोसा कर बैठेंगे।" चुनांचे मृत्यु के समय मुआज़ रज़ियल्लाहु अनहु ने गुनाह के भय से यह हदीस लोगों को बता दी।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन अम्र रज़ियल्लाहु अनहुमा का वर्णन है कि अल्लाह के नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : "मुसलमान वह है, जिसकी ज़बान और हाथ से मुसलमान सुरक्षित रहें और मुहाजिर वह है, जो अल्लाह की मना की हुई चीज़ें छोड़ दे।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अनस (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) साद बिन उबादा (रज़ियल्लाहु अनहु) के यहाँ पहुँचे, तो उन्होंने रोटी और तेल पेश किया। आपने उसे खाया और यह दुआ फ़रमाई : "أفْطَرَ عِنْدَكُمُ الصَّائِمُونَ؛ وَأكَلَ طَعَامَكُمُ الأَبرَارُ، وَصَلَّتْ عَلَيْكُمُ المَلاَئِكَةُ" (तुम्हारे यहाँ रोज़ेदार इफ़तार किया करें, तुम्हारा खाना नेक लोग खाएँ और फ़रिश्ते तुम्हारे लिए दुआ करें)।इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है। - इसे दारिमी ने रिवायत किया है।
आइशा -रज़ियल्लाहु अनहा- का वर्णन है, वह कहती हैं कि अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जो कुरान में निपुण है, वह सम्मानित और नेक राजदूतों (फरिश्तों) के साथ होगा, तथा जो अटक-अटक कर क़ुरान पढ़ता है और उसे क़ुरान पढ़ने में कठिनाई होती है, उसके लिए दोहरा सवाब है।"इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
अब्दुल्लाह बिन अम्र बिन आस (रज़ियल्लाहु अनहुमा) से रिवायत है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुना है: अल्लाह ज्ञान को लोगों से छीनकर नहीं उठाएगा, बल्कि वह ज्ञान को बंदों से उलेमा को मौत देकर उठाएगा। यहाँ तक कि जब कोई आलिम (ज्ञानी) नहीं बचेगा, तो लोग जाहिलों को सरदार बना लेंगे। फिर उनसे धर्म के विधि- विधान पूछे जाएँगे, तो वे जानकारी के बिना फ़तवे देंगे और इस तरह ख़ुद भी गुमराह होंगे और दूसरों को भी गुमराह करेंगे।इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : बरकत वाले एवं महान अल्लाह ने कहा है : मैंने अपने अच्छे कर्म करने वाले बंदों के लिए वह चीज़ें तैयार कर रखी हैं, जिन्हें न किसी आँख ने देखा है, न किसी कान ने सुना है और न किसी इनसान के दिल में उनका ख़याल आया है।" अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अनहु- ने कहा : यदि तुम चाहो, तो यह आयत पढ़ लो : (कोई प्राणी नहीं जानता कि हमने उनके लिए आँखें ठंडी करने वाली क्या-क्या चीज़ें छुपा रखी हैं।) [सूरा सजदा : 17]इसे बुख़ारी एवं मुस्लिम ने रिवायत किया है
इयाज़ बिन हिमार मुजाशिई (रज़ियल्लाहु अनहु) का वर्णन है कि एक दिन अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने अपने संबोधन में फ़रमाया: सुन लो, मेरे रब ने मुझे आदेश दिया है कि उसने आज मुझे जो बातें सिखाई हैं, उनमें से वह बातें मैं तुम्हें बता दूँ, जो तुम नहीं जानते। (अल्लाह तआला का फ़रमान है) हर वह माल, जो मैंने अपने बंदे को दिया है, वह उसके लिए हलाल है। मैंने अपने सारे बंदों को एक अल्लाह की वंदना करने वाला बनाकर पैदा किया है। फिर शैतान उनके पास आए और उन्हें उनके धर्म से बहकाने लगे। उनपर वह चीज़ें हराम कर दीं, जो मैंने उनके लिए हलाल की थीं। उन्हें आदेश दिया कि उन चीज़ों को मेरा साझी ठहराएँ, जिनके साझी होने की कोई दलील मैंने नहीं उतारी है। अल्लाह ने धरती की ओर देखा, तो कुछ बचे- खुचे अह्ले किताब (यहूदी और ईसाई) को छोड़कर उनके अरब तथा ग़ैरअरब सबसे नाराज़ हुआ तथा फ़रमाया: मैंने तुम्हें इसलिए भेजा है, ताकि तुम्हें आज़माऊँ और तुम्हारे द्वारा अन्य लोगों को भी। मैंने तुमपर एक ऐसी किताब उतारी है, जिसे पानी धो नहीं सकता। तुम उसे सोते- जागते पढ़ते हो। अल्लाह ने मुझे आदेश दिया है कि मैं क़ुरैश को जला डालूँ। मैंने कहा: ऐ मेरे रब! तब तो वे मेरे सर को कुचलकर रोटी बना देंगे। अल्लाह ने कहा: उन्हें निकालो, जैसे उन्होंने तुम्हें निकाला, उनसे युद्ध करो, हम तुम्हें युद्ध करने की शक्ति प्रदान करेंगे, ख़र्च करो, हम तुमपर ख़र्च करेंगे, तुम सेना भेजो, हम उस जैसी पाँच सेनाएँ भेजेंगे तथा अपने मानने वालों को साथ लेकर उन लोगों से युद्ध करो, जो नहीं मानते। अल्लाह ने कहा: जन्नती तीन प्रकार के लोग होंगे: न्यायकारी, सदक़ा करने वाला और अल्लाह की ओर से सत्य पर चलने का सामर्थ्य प्राप्त किया हुआ बादशाह, सभी रिश्तेदारों तथा मुसलमानों के लिए नर्म दिल तथा दयालु व्यक्ति एवं पाकदामन और माँगने से बचने वाला परिवार वाला। अल्लाह ने कहा: जहन्नम में पाँच प्रकार के लोग दाख़िल होंगे: बुद्धिहीन कमज़ोर जो तुम्हारे अधीन हो और परिवार तथा धन की चाहत न रखता हो, ऐसा छल करने वाला, जिसका लालच छुपा नहीं रहता, छोटी से छोटी चीज़ के बारे में भी छल करने पर उतर आता हो और ऐसा व्यक्ति, जो तुम्हें सुबह व शाम तुम्हारे परिवार तथा धन के बारे में धोखा दे। तथा कंजूस अथवा झूठे व्यक्ति और ऐसे बदचलन एवं अशिष्ट आदमी का भी ज़िक्र किया, जो गंदी तथा अश्लील भाषा प्रयोग करता हो।इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अनहुमा) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) यह दुआ किया करते थेः «ربِّ أَعِنِّي ولا تُعِن عليَّ، وانصرني ولا تنصر عليَّ، وامكر لي ولا تمكر عليَّ، واهدني ويسِّر هُدايَ إليَّ، وانصرني على مَن بغى عليَّ، اللهم اجعلني لك شاكرًا، لك ذاكرًا، لك راهبًا، لك مِطواعًا، إليك مُخْبِتًا، أو مُنِيبا، رب تقبَّل توبتي، واغسل حَوْبتي، وأجب دعوتي، وثبِّت حُجَّتي، واهدِ قلبي، وسدِّد لساني، واسْلُلْ سَخِيمةَ قلبي». अर्थात, ऐ मेरे रब! मेरी सहायता कर और मेरे विरुद्ध सहायता न कर, मुझे विजय प्रदान कर और किसी को मेरे विरुद्ध विजय प्रदान न कर, मेरे हक़ में योजना बना तथा मेरे विरुद्ध योजना मत बना, मुझे सच्चाई के रास्ते पर चला और सच्चाई के रास्ते पर चलना मेरे लिए आसान कर तथा मेरे विरुद्ध विपलव करने वाले पर मुझे विजयी बना। ऐ अल्लाह! मुझे अपना शुक्र अदा करने वाला, अपना ज़िक्र करने वाला, अपने से डरने वाला, अपना अनुकरण करने वाला और अपने आगे झुकने वाला या अपनी ओर लौटने वाला बना। ऐ मेरे रब! मेरी तौबा क़बूल कर, मेरे गुनाह धो दे, मेरी दुआ क़बूल कर, मेरी दलील को सिद्ध कर, मेरे दिल को सच्चा रास्ता दिखा, मेरी ज़बान को दुरुस्त रख और मेरे दिल के मैल- कुचैल को निकाल दे।इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
ज़ैद बिन अरक़म (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: इन शौच के स्थानों में शैतान तथा जिन्न उपस्थित रहते हैं। अतः, जब तुममें से कोई शौच के स्थान में आए, तो यह दुआ पढ़े: أعوذُ باللهِ مِنَ الخُبُثِ والخَبَائث अर्थात, मैं नापाक जिन्नों और नापाक जिन्नियों (की बुराइयों से) से अल्लाह की शरण में आता हूँ।इसे इब्ने माजा ने रिवायत किया है । - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है। - इसे अह़मद ने रिवायत किया है।
अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के मुक्त किए हुए दास ज़ैद (रज़ियल्लाहु अनहु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमाया: जिसने कहा: أستغفر الله الذي لا إله إلا هو الحي القيوم وأتوب إليه अर्थात,'मैं अल्लाह से क्षमा माँगता हूँ, जिसके सिवा कोई सत्य पूज्य नहीं, वह जीवित है, सारी कायनात को संभालने वाला है और मैं उसी की ओर लौटता हूँ', उसके गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं, यद्यपि वह युद्ध के मैदान से भागा हो।इसे तिर्मिज़ी ने रिवायत किया है। - इसे अबू दाऊद ने रिवायत किया है।
अबू उमामा बाहिली (रज़ियल्लाहु अन्हु) से वर्णित है, वह कहते हैं कि मैंने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को फ़रमाते हुए सुना : “क़ुरआन पढ़ो; क्योंकि क़ुरआन क़यामत के दिन अपने पढ़ने वालों के लिए सिफ़ारिशी बनकर आएगा। दो चमकती हुई सूरतेंः सूरा बक़रा तथा सूरा आल-ए- इमरान पढ़ो; क्योंकि दोनों सूरतें क़यामत के दिन इस प्रकार आएँगी, जैसे दो बादल हों, या दो सायबान हों, या पंक्तिबद्ध चिड़ियों के दो झुंड हों। दोनों सूरतें पढ़ने वालों के बचाव में बहस करेंगी। सूरा बक़रा पढ़ो; क्योंकि इसे लेना बरकत है, इसे छोड़ना हसरत है और जादूगर इसका मुक़ाबला नहीं कर सकते।”इसे मुस्लिम ने रिवायत किया है।
वासिला बिन असक़ा (रज़ियल्लाहु अन्हु) कहते हैं कि अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फ़रमायाः “अल्लाह ने इसमाईल की संतानों में से किनाना को चुन लिया, और किनाना में से क़ुरैश को चुन लिया, तथा क़ुरैश में से बनू हाशिम को चुन लिया, एवं बनू हाशिम में से मुझे चुन लिया, और मैं आदम की संतान का सरदार हूँ, लेकिन मैं गर्व नहीं करता हूँ। सबसे पहले मेरी ही क़ब्र खुलेगी, सबसे पहले मैं ही सिफ़ारिश करूँगा और सबसे पहले मेरी ही सिफ़ारिश क़बूल की जाएगी।”इसे इब्ने ह़िब्बान ने रिवायत किया है ।